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पुणे की अदालत ने ट्रैकिंग एप की मदद से तड़ीपार को सुनाई सजा

पुणे की अदालत ने ट्रैकिंग एप की मदद से तड़ीपार को सुनाई सजा

डिजिटल डेस्क, पुणे। स्थानीय अदालत ने एक ‘तड़ीपार’ अपराधी को चार महीने कैद की सजा सुनाई है। पुणे पुलिस को अपने ट्रैकिंग एप से पता चला कि अपराधी ने ‘तड़ीपार’ होने की शर्तों का उल्लंघन किया है। पुणे पुलिस के अनुसार एक्स्ट्रा एप (एक्सटर्नीज मॉनिटरिंग एंड ट्रैकिंग सिस्टम) के नतीजों के आधार पर पहली बार सजा सुनाई गई है। जो घर में पृथक रह रहे लोगों पर नजर रखने वाली प्रणाली का उन्नत संस्करण है। पुणे पुलिस के उपायुक्त (अपराध) बच्चन सिंह ने बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट एम ए शेख ने शंकर बाबू कैलाश पंढेरकर को गुरुवार को चार महीने कैद की सजा सुनाई। उस पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया। अधिकारी ने बताया, हिस्ट्रीशीटर पंढेरकर को पुणे पुलिस ने तड़ीपार घोषित किया था। बहरहाल एक्स्ट्रा एप का इस्तेमाल कर हमने पाया कि उसने पुणे पुलिस के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश कर अपने तड़ीपार होने की शर्तों का उल्लंघन किया। सिंह ने बताया कि उसके खिलाफ बिबवेवाडी थाने में 30 जून को मामला दर्ज किया गया। दो दिन के भीतर आरोपपत्र दाखिल किया गया।

आरोपपत्र दाखिल करने पर रोक

उधर मुंबई में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक इंजीनियर की पिटाई को लेकर राज्य के गृह निर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड की कथित भूमिका से जुड़े मामले में पुलिस को एक सप्ताह तक के लिए आरोप पत्र दायर करने से रोक दिया है। इससे पहले सरकारी वकील ने कहा कि इस मामले की जांच पूरी हो गई है। आरोप पत्र तैयार है। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उन्हें इस प्रकरण को लेकर अभी अपनी बात रखनी है। इसलिए उन्हें थोड़ा वक्त दिया जाए। हाईकोर्ट में पीड़ित ठाणे के सिविल इंजीनियर अनंत करमुसे की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई चल रही हैं। याचिका में मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि पुलिस ने पहले उसे मामले की जांच के लिए बुलाया था। बाद में उसे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता व गृहनिर्माण मंत्री आव्हाड के बंगले में ले जाया गया । जहां उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। 23 अप्रैल 2020 को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस को आव्हाड के बंगले की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने को कहा था। 

शवों की गरिमा व नागरिकों की सुरक्षा का रखें ध्यान : अदालत

इसके अलावा बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि पुलिस व मुंबई महानगरपालिका तथा सभी प्राधिकरण आश्वस्त करें कि शवों की गरिमा भी बनी रहे और शमशान घाट के निकट रहने वाले नागरिकों के जीवन को कोई खतरा भी न हो। हाईकोर्ट ने पत्रकार केतन तिरोडकर की ओर से दायर  जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही। मामले में मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मुंबई महानगरपालिका की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल साखरे ने कहा कि कोविड-19 संक्रमण से मरने वालों के शवों के सुरक्षित निस्तारण के लिए नगर निकाय, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा तय किए गए मानकों का पालन कर रहा है। शवों का दहन बिजली शवदाहगृह में होता हैं। ऐसे में धुंआ फैलने का सवाल ही नहीं उठता। कर्मचारियों को सभी जरूरी सामग्री दी जाती हैं। मनपा ने इस दिशा में पर्याप्त कदम उठाए हैं। शमशान घाट में एक दिन में सिर्फ 20 शवों का दहन किया जाता हैं। 

प्रदेश में राशन वितरण प्रणाली में सुधार के लिए हाईकोर्ट में याचिका

रामटेक के विधायक आशीष जयस्वाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर कर प्रदेश भर में राशन वितरण प्रणाली में कई खामियों और लापरवाही का मुद्दा उठाया है। उन्होंने हाईकोर्ट से प्रार्थना की है कि वे राज्य सरकार को आदेश दें कि राशन वितरण से जुड़ी शिकायतों के लिए एक शिकायत निवारण प्रणाली बनाई जाए, साथ ही अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाए। मंत्री को भी दी थी जानकारी  याचिकाकर्ता ने अपनी 40 शिकायतों का प्रस्ताव बना कर सुधारित प्रणाली लागू करने से जुड़ा एक ज्ञापन भी खाद्य व नागरी आपूर्ति विभाग मंत्री को 19 अप्रैल को सौंपा था, लेकिन यह लागू नहीं हुआ। ऐसे में हाईकोर्ट ने बीती सुनवाई में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। साथ ही याचिकाकर्ता के निवेदन पर भी अमल करने को कहा था। शुक्रवार को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने सुधारित फैसले लागू करने के लिए कोर्ट से दो सप्ताह का समय मांगा। कोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह का समय दिया है। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से एड. मोहित खजांची ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ता के अनुसार कोरोना संक्रमण से जूझ रहे महाराष्ट्र में इस अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन जरूरी है। मौजूदा स्थिति में ऐसा होता नहीं दिख रहा। राशन की दुकानें कामकाज के समय में बंद रहती हैं और कई जरूरतमंदों काे राशन नहीं मिल पाता। ऐसे  सभी राशनकार्ड धारकों को तय राशन मिले, इसके लिए एफपीएस ऑटोमेशन मशीन द्वारा रसीद प्रदान की जाए। याचिकाकर्ता ने ऐसे बहुत से सुझाव दिए हैं। अब सरकार को इस पर जवाब देना है। 

महापौर को राहत, प्रतिवादियों को नोटिस

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने महापौर संदीप जोशी को राहत दी है। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, मुंबई के उस आदेश पर स्थगन लगा दिया है, जिसके द्वारा जोशी का डायरेक्टर आईडेंटिफिकेशन नंबर (डीआईएन) रद्द कर अगले 5 वर्ष तक उन्हें किसी भी कंपनी के संचालक पद के लिए अपात्र घोषित कर दिया था। इसका नतीजा हुआ कि स्मार्ट सिटी कारपोरेशन में उनका संचालक पद भी खतरे में आ गया। ऐसे में उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। जोशी की याचिका पर शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, मुंबई को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से सुबोध धर्माधिकारी, देवेन चौहान और निखिल कीर्तने ने पक्ष रखा। वर्ष 2009 में बनी नागपुर महानगरपालिका परिवहन लिमिटेड कंपनी में जोशी को संचालक बनाया गया। इसके बाद मनपा ने वर्ष 2013 में यह कंपनी बंद कर दी। इससे उनका डायरेक्टर आईडेंटिफिकेशन नंबर (डीआईएन) रद्द कर दिया गया। बाद में वर्ष 2016 में केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत नागपुर मनपा ने शहर के विकास के लिए स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन नामक एक नई कंपनी बनाई। महापौर बनने के बाद जोशी इसके पदसिद्ध संचालक चुने गए, लेकिन 21 फरवरी 2019 को केंद्र सरकार ने कंपनीज एक्ट के प्रावधानों में संशोधन कर नए सिरे से कंपनी वेरिफिकेशन और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करने का आदेश जारी किया। मनपा द्वारा औपचारिकताएं समय पर पूरी नहीं की गईं। जोशी की दलील है कि सरकारी पोर्टल पर अपलोड करने पर बार-बार रद्द होता रहा, जिसके कारण सरकारी पोर्टल पर जोशी का डीआईएन रद्द ही दर्शाया गया। अंतत: रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने उन्हें स्मार्ट सिटी के संचालक पद के लिए अपात्र घोषित कर दिया। मामला अब कोर्ट में विचाराधीन है। 
 


 

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