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दो हजार मवेशियों की तस्करी को हाईकोर्ट में चुनौती

दो हजार मवेशियों की तस्करी को हाईकोर्ट में चुनौती

हाईकोर्ट ने सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने कहा, अगली सुनवाई 11 को
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
हाईकोर्ट ने मंगलवार को उस मामले पर सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने कहा, जिसमें ग्वालियर के श्योपुर से 2 हजार मवेशियों की तस्करी किए जाने का आरोप लगाया गया है। चीफ जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने याचिका में लगाए गए आरोपों को संजीदगी से लेते हुए उक्त निर्देश दिए। मामले पर अगली सुनवाई 11 फरवरी को होगी। यह जनहित याचिका जबलपुर के गोकलपुर में रहने वाले व्यवसायी ब्रजेन्द्र लक्ष्मी यादव की ओर से दायर की गई है। आवेदक का कहना है कि 12 नवम्बर 2019 को वो दमोह जिले के तेन्दूखेड़ा गांव से गुजर रहे थे, तभी उन्हें दो हजार मवेशियों का झुंड आते हुए दिखा। कुछ जानवरों के पैरों से खून रिस रहा था। पूछने पर मवेशी ले जा रहे लोगों ने याचिकाकर्ता को बताया कि ये जानवर वे श्योपुर से पैदल लाए हैं, जिन्हें बरघाट के मेले में बेचने के लिए ले जाया जा रहा है। पशुओं के साथ की जा रही क्रूरता की आशंका को देखते हुए याचिकाकर्ता ने तेन्दूखेड़ा थाने को सूचना दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उलटा मवेशी ले जा रहे लोगों ने याचिकाकर्ता को बताया कि पुलिस वालों को उन्होंने दो सौ रुपए दिए, जिसके कारण उन्हें आगे जाने दिया जा रहा है। याचिका में आरोप है कि ये सभी मवेशी स्लाटर के लिए नागपुर के रास्ते हैदराबाद भेजे जा रहे थे। आरोप यह भी है कि पशुओं के साथ की जा रही क्रूरता को लेकर संबंधितों को शिकायतें देने के बाद भी कोईकार्रवाई नहीं की गई, क्योंकि कानूनन झुण्ड में सिर्फ दो सौ मवेशी ही ले जाए जा सकते हैं। संबंधितों के मूक दर्शक बने होने पर यह याचिका दायर की गई। मामले पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता योगेश धाण्डे हाजिर हुए। उनका पक्ष सुनने के बाद युगलपीठ ने सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
नहीं रखा जाता कोई हिसाब
याचिका में आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में ले जाए जा रहे इन मवेशियों का कहीं कोई रिकार्ड नहीं रखा जाता। श्योपुर से कितने मवेशी रवाना हुए, कितने मवेशी बरघाट पहुंचे और कितने मवेशी वहां के मेले में बिके, इसकी भी जानकारी किसी के पास नहीं होती। यह एकतरह से मवेशियों की तस्करी का मामला है, जिनको क्रूरता के साथ ले जाया जा रहा था।
हाईकोर्ट ने कहा- मामला जनहित का
 पूर्व में यह रिट याचिका 30 नवम्बर 2019 को जस्टिस अतुल श्रीधरन की एकलपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए लगी थी। अदालत ने याचिका में उठाए गए मुद्दे को जनहित के रूप में मानते हुए याचिकाकर्ता को कहा था कि वे उसे पीआईएल में तब्दील करने आवश्यक कार्रवाई करें। 19 दिसंबर को जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने याचिका में संशोधन की इजाजत दी थी।
 

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