दैनिक भास्कर हिंदी: मादा चील से तीन विभाग परेशान -दो माह से थाने का नेटवर्क ठप ,टावर में चील ने घोंसला बनाकर दिए अंडे ,अब उसके बच्चों के उड़ने का इंतजार 

July 8th, 2021

डिजिटल डेस्क कटनी/उमरियापान। यह खबर आपको थोड़ा सा हैरान कर सकती है कि भला एक मादा बाज तीन-तीन विभागों के अफसर को कैसे परेशान कर सकती है, पर यह हकीकत है। ढीमरखेड़ा के स्वॉन रुम सेंटर का नेटवर्क इसलिए ठप्प पड़ा हुआ है कि यहां पर बाज घोसले में अंडे पाल रही है। अधिकारी भी इस मामले में पूरी तरह से संवेदनशीलता बरतते हुए अंडे से परिदें निकलने और उनके उड़ान का इंतजार कर रहे हैं। विभाग के अफसरों का कहना है कि घोसले से जब परिंदे उड़ जाएंगे। तभी वे नेटवर्क की सुविधा दोबारा से बहाल कर पाएंगे। अधिकारियों के संवेदना की चर्चा ढीमरखेड़ा और उमरियापान में हो रही है। नेटवर्क न होने के कारण थाने में होने वाली एफआई आर ऑन लाइन नहीं हो पा रही है । पुलिस फरियादियों की शिकायत रिपोर्ट आदि अपने कंप्युटर पर  दर्ज कर रही है । इससे उनका अंतरविभागीय कार्य प्रभावित हो रहा है हालांकि जनता को कोई परेशानी नहीं है
नेटवर्क की समस्या से आया मामला
यह मामला तब अधिकारियों की संज्ञान में आया, जब उमरियापान थाने का नेटवर्क ठप्प हो गया। पुलिस के माध्यम से इसकी शिकायत स्वॉन (स्टेट वाइड
एरिया नेटवर्क) के माध्यम से ई-गवर्नेस सोसायटी तक पहुंची। कंट्रोल रुम से सभी टावर चालू हालात में रहे। इसके बाद भी जब थाने का नेटवर्क चालू नहीं हो पाया तो रेडिया फ्रिक्वेंसी और स्वॉन के इंजीनियर यहां पहुंचे। दूर से इन्होंने देखा कि टॉवर में एक घोसला बना हुआ है। जिसके बाद वन विभाग के अधिकारियों की मदद ली।
टॉवर में चढ़े, बाज ने मारा झपट्टा
टॉवर में पक्षी का घोसला होने के चलते इंजीनियर इसके लिए वन विभाग की मदद लिए। वन विभाग की टीम लोक सेवा केन्द्र के समीप लगे टॉवर में घोसले की स्थिति का जायजा लेने पहुंची। विभाग के कर्मचारी जब टॉवर के ऊपर घोसले को देखने के लिए चढ़ने लगे तो उसी समय मादा बाज हमलावार हो गई। जिसके बाद वन विभाग के कर्मचारी टॉवर से नीचे उतर आए। बाद में कैमरे की मदद ली गई। जिसमें पाया गया कि उक्त घोसले में बाज ने तीन से चार अंडे दे रखे हैं।
इनका कहना है
उमरियापान थाने में स्वॉन नेटवर्क की समस्या आने पर पाया गया कि ढीमरखेड़ा स्थित स्वॉन टॉवर में मादा बाज ने घोसला बनाया है। घोसले में अंडे भी है। नेटवर्क तो जरुरी है, लेकिन साथ में बाज को भी संरक्षित रखना है। जिसके बाद वन विभाग के साथ यह निर्णय लिया गया है कि जब तक अंडे से परिंदे न निकल जाएं। तब तक घोसले को सुरक्षित रखा जाए।
- सौरभ नामदेव, प्रबंधक ई-गवर्नेस कटनी
ढीमरखेड़ा लोक सेवा केन्द्र परिसर में ही यह टॉवर लगा हुआ है। टॉवर के ऊपर बाज का घोसला है। जिसमें उसके अंडे भी है। संरक्षित वन्य प्राणी की श्रेणी में बाज आता है। जब तक अंडे से परिदें नहीं निकलते तब तक घोसला नहीं हटाया जा सकता। इसमें अन्य विभाग के अफसरों ने भी सहमति दी है।
- दिनेश सिंह, डिप्टी रेंजर वन परिक्षेत्र ढीमरखेड़ा

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