comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

फंदा लगाकर किया गया बाघिन का शिकार -  कान्हा बफर जोन की घटना , दो आरापी गिरफ्तार 

फंदा लगाकर किया गया बाघिन का शिकार -  कान्हा बफर जोन की घटना , दो आरापी गिरफ्तार 

 डिजिटल डेस्क बालाघाट । कान्हा नेशनल पार्क से महज एक किलोमीटर दूर बफर जोन में गत दिवस फंदा  लगाकर एक वयस्क बाघिन का शिकार किया गया । घटना स्थल पर क्लच वायर का फंदा बरामद किया गया है । विभागीय सूत्रों के अनुसार शव बदामद कर क्लच वायर को काटकर बाघिन से अलग किया गया। बाघिन के समस्त अंग प्रत्यंग सुरक्षित (सभी नाखून, मूंछ के बाल, केनाईन) मिले। इस मामले मेें दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गाय है । बताया गया है कि  जिले में वन्य जीवों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कान्हा नेशनल पार्क से महज एक किलोमीटर दूर बफर जोन में मंगलवार, 26 जनवरी को तार के फंदे में फंसकर बाघिन की मौत हो गई। डॉ. संदीप अग्रवाल, वन्यप्राणी चिकित्सक, कान्हा टायगर रिज़र्व, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की प्रतिनिधि सुश्री श्रवर्णा गोस्वामी, वन्यजीव संस्थान देहरादून, वन्यप्राणी संरक्षण से सम्बद्ध अषासकीय संस्था कॉर्बेट फाऊण्डेषन की प्रतिनिधि सुश्री. प्रिया बारेकर की उपस्थिति में मृत बाघ (मादा) के शव का बाह्य परीक्षण किया गया एवं क्लच वायर को काटकर बाघिन से अलग किया गया। बाघिन के समस्त अंग प्रत्यंग सुरक्षित (सभी नाखून, मूंछ के बाल, केनाईन) मिले। बाघिन के शव को सूर्यास्त हो जाने के कारण वन्यप्राणी चिकित्सालय/क्वारेन्टाईन हाउस मुक्की में सुरक्षित रखा गया। 
आज प्रात: 8 बजे एन.के. सनोडिया मुख्य वन संरक्षक वन वृत्त बालाघाट, एन.एस. यादव, उप संचालक कान्हा टायगर रिज़र्व, एस. के सिन्हा, सहायक संचालक सिझौरा/मलाजखण्ड कान्हा टायगर रिज़र्व, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की प्रतिनिधि, कार्बेट फाउण्डेषन की प्रतिनिधि की उपस्थिति में शव विच्छेदन की कार्यवाही डॉ. संदीप अग्रवाल द्वारा की गई तथा फारेन्सिक एवं हिस्टोपैथेलॉजिकल अन्वेषण हेतु सेम्पल एकत्र किये गये। घटना स्थल के आस-पास के 6 संदिग्ध व्यक्तियों को पूछताछ के लिये बलाया गया है। 
सप्ताहभर पहले हो चुकी है तीन तेंदुए की मौत 
हफ्तेभर पहले जिले में उकवा क्षेत्र के ग्राम भुरुक में पांच लोगों ने एक तेंदुए का शिकार किया था। पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, चार दिन पहले ग्राम धापेवाड़ा के आगरवाड़ा जंगल में 3 साल का नर और 6 साल की मादा तेंदुए का शव मिला था। इस मामले में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
 

कमेंट करें
L32tG
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।