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टॉपर छात्र रह गए पीछे, हमेशा लडख़ड़ाते हुए पास होने वाले विद्यार्थियों ने आखिर कैसे मार ली बाजी

टॉपर छात्र रह गए पीछे, हमेशा लडख़ड़ाते हुए पास होने वाले विद्यार्थियों ने आखिर कैसे मार ली बाजी

प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड भोपाल द्वारा आयोजित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी परीक्षा में लगा धांधली का आरोप
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
जो विद्यार्थी कक्षाओं में हमेशा पीछे रहे, तीन सालों का कोर्स चार से पाँच सालों में लडख़ड़ाते हुए पूरा किया, उन विद्यार्थियों ने अचानक से ऐसा कौन सा ज्ञान प्राप्त कर लिया कि उन्होंने  ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के पदों पर आयोजित परीक्षा में 100 में से 99 अंक हासिल कर लिए। ये आरोप बीएससी कृषि से स्नातक हो चुके उन विद्यार्थियों ने लगाया है जो हमेशा अच्छे नंबरों से पास होते आए हैं। ऐसे सभी विद्यार्थियों ने जवाहर लाल नेहरू कृषि विवि के बाहर आंदोलन शुरू कर दिया है।  ये परीक्षाएँ प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड भोपाल द्वारा आयोजित कराई जाती है। छात्र गोपी अंजना ने व्यापमं द्वारा कराई गई इस परीक्षा में फर्जीवाड़ा होने का आरोप लगाया है। बताया जा रहा है िक अधिकारी बनने हेतु आयोजित यह परीक्षा 10 व 11 फरवरी को आयोजित कराई गई थी। 17 फरवरी को जब उत्तर पुस्तिकाएँ जारी की गईं तो कुछ छात्रों के 200 में से 190 व 195 से भी अधिक अंक आए और होनहार छात्र 168 के भीतर ही सिमट कर रह गए,  वो भी तब जब कृषि समूह के 100 प्रश्नों में से तीन प्रश्नों के उत्तर प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड द्वारा जारी की गई उत्तर पुस्तिका में गलत लिए जा रहे हैं और वही उत्तर इन छात्रों द्वारा भी लगाए गए जिससे इनको 100 में 99 अंक आए हैं। वंचित रहने वाले होनहार छात्रों ने पूरे मामले की जाँच कराने की माँग मुख्यमंत्री से की है।
आरटीई के तहत निजी स्कूलों में अप्रैल से शुरू होंगे प्रवेश
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के निजी स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया अप्रैल माह में शुरू हो सकती है। इसके लिए स्कूलों में अधिकतम 25 प्रतिशत सीटों को लॉक करने, दावा-आपत्ति निराकरण प्रक्रिया 12 मार्च तक पूरी हो जाएगी। नए सत्र के लिए अप्रैल माह से प्रवेश शुरू होंगे। 22 फरवरी तक प्रत्येक प्राइवेट स्कूल की अधिकतम 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएँगी। 27 फरवरी तक इस सूची की जिला परियोजना समन्वयक जाँच करेंगे। 1 मार्च को स्कूलों के नाम तथा सीटें आरटीई पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएँगी। 10 मार्च तक दावा-आपत्तियों का िनराकरण किया जाएगा। 
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।