शाहनगर न्यूज: मौरयाई दूज पर शाहनगर में आस्था का जनसैलाब,

खजलहाई तलैया सहित नदी-घाटों पर उमड़ी भीड़


शाहनगर डिजिटल डेस्क |मौरयाई दूज / मोरछठ के पावन अवसर पर शाहनगर मुख्यालय की खजलहाई तलैया सहित क्षेत्र के सभी जलाशयों और नदी घाटों पर श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा।

बुंदेलखंड और उत्तर भारत के कई अंचलों में भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को मनाया जाने वाला यह लोकपर्व संतान की सुख-समृद्धि और नवविवाहित जोड़ों के सुखद वैवाहिक जीवन की कामना से जुड़ा है।

इस दिन महिलाएं नदियों, तालाबों और जलाशयों पर पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना करती हैं। अपने घरों में सुख-समृद्धि और संतान के उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं।

वैवाहिक नवदंपतियों की विशेष परंपरा:

बुंदेलखंड अंचल में यह पर्व उन परिवारों के लिए बेहद खास होता है, जिनके घर में हाल ही में लड़के या लड़की का विवाह हुआ हो। विवाह के समय दूल्हे द्वारा पहने गए 'मौर' (मुकुट) को इस दिन जलाशयों में विसर्जित और पूजित करने की लोक परंपरा है, जिसके चलते इसे 'मौरयाई दूज' कहा जाता है।

पूरे दिन शाहनगर में मेला जैसा माहौल रहा।


Created On :   13 Sept 2026 6:45 PM IST

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