Panna News: श्री रामजानकी मंदिर में मिला दुर्लभ पांडुलिपियों, महाभारत स्कंदपुराण व केशवदास जैसी कृतियों किया जायेगा संरक्षित

श्री रामजानकी मंदिर में मिला दुर्लभ पांडुलिपियों, महाभारत स्कंदपुराण व केशवदास जैसी कृतियों किया जायेगा संरक्षित
भारत सरकार के ज्ञान भारतम कार्यक्रम के तहत पन्ना जिले में प्राचीन व दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज जारी है। कलेक्टर ऊषा परमार द्वारा गठित समिति के सदस्य आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश पाण्डेय और धर्मार्थ शाखा प्रभारी मनोज पाण्डेय की विशेष पहल पर पन्ना स्थित श्री रामजानकी मंदिर की बंद अलमारियों की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण हस्तलिखित ग्रंथ मिले हैं।

Panna News: भारत सरकार के ज्ञान भारतम कार्यक्रम के तहत पन्ना जिले में प्राचीन व दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज जारी है। कलेक्टर ऊषा परमार द्वारा गठित समिति के सदस्य आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश पाण्डेय और धर्मार्थ शाखा प्रभारी मनोज पाण्डेय की विशेष पहल पर पन्ना स्थित श्री रामजानकी मंदिर की बंद अलमारियों की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण हस्तलिखित ग्रंथ मिले हैं। पांडुलिपियाँ क्षत-विक्षत हालत में पाई गईं और नमी के कारण पन्ने आपस में चिपके हुए थे। इन्हें सावधानी से निकालकर मंदिर कार्यालय में सुरक्षित किया गया। पांडुलिपियों में मुख्यत: संस्कृत साहित्य के ग्रंथ शामिल हैं। महाभारत के विभिन्न भाग विशेषकर भीष्म पर्व जिसमें युद्ध के प्रारम्भिक दिन युद्ध के नियम, सेनाओं का विवरण, धृतराष्ट्र.संजय संवाद, जम्बूद्वीप का वर्णन तथा अर्जुन के विषाद व गीता के उपदेशों से संबंधित सामग्रीकृ की पांडुलिपि मिली है। भीष्म पर्व की स्थिति अपेक्षाकृत ठीक पाई गई जबकि अन्य भाग क्षतिग्रस्त मिले हैं। साथ ही महाभारत का सौप्तिक पर्व और पाण्डव गीता की हस्तलिखित प्रतियाँ भी बरामद हुई हैं।

ओरछा दरबार की हस्तलिखित प्रति मिली

तुलसीदास के समकालीन महाकवि केशवदास की रचना श्रसिकप्रियाश सन 1591 ओरछा दरबार की हस्तलिखित प्रति भी मिली है जिसमें श्रृंगार रस और ओरछा तथा राजपरिवार का परिचय शामिल है। रीतिकाल के कवि सेनापति की ऋतु वर्णन, स्कन्दपुराण, तुलसीदास की एक अनाम रचना आरंभिक पृष्ठ अनुपस्थित रत्न परीक्षा, राजा भर्तृहरि की वैराग्य शतक तथा रीवा के महाराज द्वारा बघेली भाषा में रचित एक ग्रंथ जो पन्ना के युवराज राघवेंद्र सिंह जू को भेजा गया था । इसके अतिरिक्त परमार्थ निर्णय, अरुगनी निर्णय, संगीत रघुनन्दन, राग रत्नाकर, तंत्रविद्या, वचनामृत सातौग्रज धर्म सभा, गीता माला मंत्र व वीर मित्रोदयस्थ सूची पत्रम जैसे विभिन्न ग्रंथों की पांडुलिपियाँ मिलीं जिनमें से कई के पृष्ठ नष्ट या क्षतिग्रस्त थे।

ऐतिहासिक और साहित्यक महत्व

स्कन्दपुराण की विशेषताए जिसमें सातों पुरियों तथा तीर्थों का वर्णन नदियों गंगा, यमुना, सरस्वती, के उद्गम की कथाएँ, शिवरात्रि व सत्यनारायण व्रत कथाएँ, रामायण, भागवत आदि ग्रंथों की महिमा तथा प्राचीन भूगोल व इतिहास का ललित विवरण शामिल है इस संग्रह के ऐतिहासिक और साहित्यिक महत्व को और बढ़ाती है।

महारानी दिलहर कुमारी से मिले थे मंदिर में स्थापित पुस्तकालय के लिए ग्रंथ

मंदिर के मुसद्दी कुंजबिहारी शर्मा ने बताया कि ये सभी ग्रंथ पन्ना की महारानी स्वर्गीय दिलहर कुमारी द्वारा मंदिर पुस्तकालय के लिये दिये गये थे परन्तु उचित संरक्षण की कमी के कारण ऐतिहासिक पांडुलिपियों की स्थिति खराब हो गई थी। अब जिला समिति ने इन पांडुलिपियों को संरक्षित करने के निर्देश दिये हैं। समिति के तत्वावधान में सभी ग्रंथों को स्कैन कर ज्ञान भारतम मोबाइल एप पर अपलोड कर दिया गया है। इस कार्य में राजेश गौतम, अरविंद जडिय़ा, राजेंद्र पटेरिया और कृष्णकांत पाण्डेय का सहयोग रहा।

Created On :   28 Jun 2026 3:42 PM IST

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