Pune City News: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय एक साल से बकाया, मातृ वंदना योजना में बढ़ी नाराजगी

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय एक साल से बकाया, मातृ वंदना योजना में बढ़ी नाराजगी
  • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं की देखभाल का जिम्मा निभाने वाली कार्यकर्ताओं को नहीं मिला 250 रुपये प्रति लाभार्थी
  • वेतन में भी अनियमितता

भास्कर न्यूज, पुणे। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं की लगातार निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को उनके काम का मानदेय पिछले एक वर्ष से नहीं मिला है। राज्यभर की करीब 1 लाख 20 हजार 845 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता इस समस्या से जूझ रही हैं। यह योजना वर्ष 2017 से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आंगनवाड़ियों के माध्यम से लागू है। इसके तहत पहली संतान के जन्म पर 7,500 रुपये और दूसरी संतान यदि बेटी हो तो फिर से 7,500 रुपये की सहायता दी जाती है। योजना के अंतर्गत लाभार्थी महिला के गर्भधारण से लेकर बच्चे के पूर्ण टीकाकरण तक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को लगातार फॉलोअप करना होता है।

इस प्रक्रिया में कार्यकर्ता को महिला की फोटो सहित 17 प्रकार की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होती है। साथ ही गर्भावस्था के चौथे और सातवें महीने, प्रसव के बाद तथा बच्चे के सभी टीकाकरण की नियमित जानकारी भी ऑनलाइन दर्ज करनी पड़ती है। यह पूरा कार्य पूरा करने के बाद प्रति लाभार्थी 250 रुपये मानदेय तय है, जो अब तक नहीं मिला है।

पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ शहर में करीब 2 हजार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं, जबकि जिले में यह संख्या 4,395 है। शहरी क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की संख्या अधिक होने के कारण कार्यकर्ताओं पर काम का दबाव भी ज्यादा है, लेकिन उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा। ग्रामीण क्षेत्रों की कार्यकर्ता भी दिनभर काम करने के बावजूद अपने हक के पैसे से वंचित हैं।

मानदेय के अलावा वेतन में भी अनियमितता सामने आई है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को हर महीने 13,500 रुपये वेतन मिलता है, जिसमें से 5,000 रुपये केंद्र सरकार और 8,500 रुपये राज्य सरकार देती है। दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक तीन महीने का केंद्र सरकार का हिस्सा नहीं मिला, जिससे कार्यकर्ताओं को केवल राज्य सरकार के हिस्से पर निर्भर रहना पड़ा। हाल ही में यह बकाया मिला, लेकिन मार्च 2026 का भुगतान फिर से लंबित है।

इस संबंध में जिला परिषद पुणे के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद खंडागले ने कहा कि यह समस्या तकनीकी कारणों से उत्पन्न हुई है। योजना विभिन्न विभागों में स्थानांतरित होने के कारण कुछ अड़चनें आई हैं, जिन्हें जल्द ही दूर कर मानदेय जारी किया जाएगा।

वहीं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे अपने नियमित कार्य के साथ-साथ योजना का पूरा जिम्मा निभाती हैं। राष्ट्रीय मजदूर संघ की प्रतिनिधि गीतांजली थिटे ने कहा कि ऑनलाइन जानकारी अपलोड करना, इंटरनेट की व्यवस्था करना और लगातार फॉलोअप करना आसान नहीं है। इतना काम करने के बाद भी मानदेय नहीं मिलना उचित नहीं है।

Created On :   25 April 2026 5:52 PM IST

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