Pune City News: जुन्नर के पठारी भाग के संरक्षण से खुलेगी विकास की नई राह

जुन्नर के पठारी भाग के संरक्षण से खुलेगी विकास की नई राह
पशुपालन, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए तैयार होगा विशेष विकास आराखड़ा

भास्कर न्यूज, पुणे। जुन्नर के पश्चिमी घाट क्षेत्र के प्राकृतिक रूप से समृद्ध पठार किसानों को सशक्त बनाने और पर्यटन विकास का आदर्श मॉडल बन सकते हैं। यह जानकारी जुन्नर वन विभाग के उपवन संरक्षक प्रशांत खाडे ने क्षेत्रीय दौरे के दौरान दी।

वन विभाग की पठार संरक्षण समिति के सदस्य गणेश कोरे, वन अधिकार समिति के सदस्य किरण लोहकरे तथा सहायक वन संरक्षक स्मिता राजहंस ने हिवरे पठार क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान क्षेत्र की जैव विविधता और संरक्षण की संभावनाओं का अध्ययन किया गया।

जुन्नर तहसील के तांबे, सुकालवेढे, दुर्ग ढाकोबा और हिवरे पठार क्षेत्र में विशेष प्रकार के घासयुक्त पठार मौजूद हैं। इनका कुछ हिस्सा वन विभाग के अधीन है, जबकि कुछ भूमि किसानों की निजी मालिकी में है।

विधायक शरद सोनवणे ने इस क्षेत्र के वैश्विक महत्व को देखते हुए इसे यूनेस्को के ग्लोबल जियोपार्क में शामिल करने के लिए योजना तैयार करने की मांग की है। इसके बाद वन विभाग और प्रशासन ने क्षेत्रीय सर्वेक्षण शुरू किया है। विकास योजना तैयार करने से पहले ग्रामवासियों और ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की बैठकें आयोजित की जाएंगी। साथ ही घासभूमि विशेषज्ञों द्वारा जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

वन विभाग के अनुसार घासभूमि संरक्षण से पशुधन को बेहतर चारा उपलब्ध होगा। इससे पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही पर्यटन विकास के जरिए स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

उपवन संरक्षक प्रशांत खाडे ने बताया कि पठार संरक्षण का यह मॉडल पहली बार जुन्नर तहसील में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए विशेषज्ञों की समिति गठित की गई है और यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क का प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

विधायक शरद सोनवणे ने कहा कि संरक्षण के माध्यम से जुन्नर को समृद्ध बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं वरसुबाई देवस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष दत्ता गवारी ने कहा कि क्षेत्र की जैव विविधता को सुरक्षित रखते हुए प्रकृति और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा।

Created On :   12 Jun 2026 8:15 PM IST

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