Pune City News: मासूम से दरिंदगी और हत्या के मामले में नराधम भीमराव कांबले को फांसी

मासूम से दरिंदगी और हत्या के मामले में नराधम भीमराव कांबले को फांसी
  • वारदात के महज दो महीने के भीतर विशेष अदालत ने सुनाया फैसला
  • कोर्ट ने माना 'दुर्लभ से दुर्लभतम' मामला

भास्कर न्यूज, पुणे। भोर तहसील के नसरापुर में साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी बेरहमी से हत्या करने वाले 65 वर्षीय आरोपी भीमराव प्रभाकर कांबले को विशेष अदालत ने सोमवार को फांसी की सजा सुनाई। विशेष न्यायाधीश एस. आर. सालुंके की अदालत ने इस कृत्य को घृणास्पद, क्रूर और समाज को झकझोर देने वाला बताते हुए इसे दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का मामला माना। इससे पहले कोर्ट ने 25 जून को आरोपी को दोषी करार देकर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

महाराष्ट्र दिवस पर हुई थी वारदात

यह घटना 1 मई (महाराष्ट्र दिवस) को हुई थी। आरोपी ने मासूम बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने के बाद उसकी निर्मम हत्या कर दी थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर 18 गंभीर जख्म पाए गए थे। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था।

फांसी की सजा के मुख्य आधार

विशेष सरकारी वकील अजय मिसर ने अदालत में सुप्रीम कोर्ट के 12 महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए आरोपी को मौत की सजा देने की मांग की थी। अदालत ने सजा सुनाते समय अभियोजन पक्ष की इन दलीलों को स्वीकार किया:

सोची-समझी साजिश: आरोपी ने पूरी योजना बनाकर ठंडे दिमाग से इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया।

कानून का खौफ नहीं: आरोपी पहले भी दो महिलाओं के उत्पीड़न के मामलों में सबूतों के अभाव में बच निकला था, जिससे उसका दुस्साहस बढ़ गया था।

पछतावे का नामोनिशान नहीं: पूरी अदालती कार्यवाही के दौरान आरोपी के चेहरे पर अपने किए पर कोई ग्लानि या पछतावा नहीं दिखा।

पुख्ता वैज्ञानिक सबूत: पुलिस ने कोर्ट के सामने अकाट्य डीएनए (DNA) रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज पेश किए, जिन्हें कोर्ट ने माना।

आरोपी के खिलाफ पोक्सो कानून की धाराओं और भारतीय न्याय संहिता के तहत बलात्कार, विनयभंग और हत्या के आरोप पूरी तरह सिद्ध हुए।

न्यायिक इतिहास में सबसे तेज सुनवाई: 60 दिनों में फैसला

यह मुकदमा महाराष्ट्र के न्यायिक इतिहास में सबसे तेजी से निपटाए गए मामलों में पहले स्थान पर आ गया है। घटना के बाद पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीपसिंह गिल के मार्गदर्शन में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था।

वरिष्ठ महिला पुलिस निरीक्षक विजयमाला पवार ने महज 15 दिनों के भीतर कोर्ट में 55 से अधिक गवाहों के बयानों के साथ 1200 पन्नों का आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया था। 21 मई से इस संवेदनशील मामले की विशेष अदालत में बंद कमरे में (इन-कैमरा) रोजाना सुनवाई की जा रही थी।

नराधमों को समाज में रहने का अधिकार नहीं: मुख्यमंत्री

इस ऐतिहासिक फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ऐसे अपराधियों को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है। वहीं, फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्यायपालिका का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी बच्ची को सच्ची श्रद्धांजलि उसी दिन मिलेगी, जिस दिन आरोपी को फंदे पर लटकाया जाएगा।

Created On :   29 Jun 2026 5:33 PM IST

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