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रीवा न्यूज: नगर निगम की उदासीनता से बंद हो गया तीन दशक पुराना सरकारी स्कूल

डिजिटल डेस्क रीवा |
नगर निगम प्रशासन अपना अपने ही इकलौते स्कूल को नहीं संभाल पाया और कला मंदिर मार्ग में वर्षों से संचालित यह संस्था अब बंद हो गई। इसमें कार्यरत एकमात्र शिक्षिका के रिटायर होने के बाद स्कूल में पढ़ने वाले छात्र अन्य सरकारी संस्थाओं में चले गए। बताया गया कि कभी 10वीं कक्षा तक इसमें गरीब तबके के बच्चों को शिक्षा मिलती रही है, स्कूल बंद होने के बाद इस भवन में एक गैर सरकारी संस्था बाल कौशल केंद्र चल रही है जिसमें छोटे बच्चों को शारीरिक कौशल मसलन जूडो-कराते और मिट्टी की कलाकृतियां बनाने का हुनर सिखाया जा रहा है। बताया गया कि बच्चों के स्कूल छोड़ने की प्रमुख वजह यह भी रही है कि यहां अध्ययन करने वाले सरकारी स्कूल के छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं नहीं मिलती थी,जिसमें गणवेश,सायकल और अन्य सहायता शामिल हैं। नगर निगम प्रशासन इस बिल्डिंग में गरीब छात्रों एवं छात्राओं को नि:शुल्क कोचिंग सेंटर संचालित करने की योजना तैयार की है। गौरतलब है कि कला मंदिर मार्ग में नगर निगम गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा के लिए कक्षा 10वीं तक स्कूल शुरू किया था। यह संस्था करीब तीन दशक से अधिक तक चली, लेकिन बाद में शिक्षकों के अभाव के चलते शैक्षणिक कार्य पर असर पडऩे लगा और धीरे-धीरे यह स्कूल एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गया, जब इसे पूरी तरह से बंद कर देना पड़ा। गत शिक्षा सत्र में यहां कार्यरत एक मात्र शिक्षिका सेवानिवृत्त हो गई और छात्र दूसरे स्कूल में चले गए।
आधा दर्जन कमरों पर एनजीओ का कब्जा
क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि स्कूल के ऊपरी मंजिल के आधा दर्जन कमरे नगर निगम प्रशासन ने एक एनजीओ को दे रखा है। यह संस्था बाल कौशल केंद्र के रूप में यहां अपनी गतिविधियां संचालित कर रही है, जिसमें जूडो-कराते और अन्य शारीरिक -मानसिक विकास के कार्यक्रम शामिल हैं। नगर निगम प्रशासन संस्था की गतिविधियों की मॉनीटरिंग भी करती है। इसमें अधिकांश बच्चे गरीब परिवारों से आते हैं, जिन्हे नि:शुल्क प्रशिक्षण आदि दिए जाते हैं।
10वीं से 5वीं में आ गया था स्कूल
बताया गया कि नगर निगम प्रशासन के उदासीन रवैए के चलते यह स्कूल 10वीं से घटकर पहले 8वीं तक होकर रह गया और कोरोना काल के बाद केवल 5वीं तक संचालित किया जा रहा था। इस संस्था के शिक्षक भी रिटायर होते गए और नगर निगम नए शिक्षक भर्ती नहीं कर सका। अधिनियमों के चलते निगम प्रशासन को शिक्षक नियुक्ति का अधिकार ही नहीं है। शिक्षा विभाग से भी किसी प्रकार की सहायता के प्रावधान नहीं होने से अंतत: स्कूल बंद हो गया।
स्कूल भवन पर कब्जा करने की होड़
नगर निगम द्वारा संचालित स्कूल बंद होने के बाद पिछले कुछ महीनों में भवन पर कब्जा जमाने की होड़ सी मच गई है। यहां के कुछ हिस्सों में व्यापारियों ने पहले से अपना कब्जा कर रखा है और अब नगर निगम के अस्थाई कर्मचारियों ने कई कमरों में डेरा जमा लिया है। वे स्कूल के कमरों में परिवार सहित रहने लगे है। हालांकि ननि की ओर से एक महिला कर्मचारी को देखरेख करने के लिए रखा गया है,लेकिन वह केवल सुबह आकर ताला खोलकर चली जाती है,और बाद में ताला लगाने आती है।
वर्जन
इस भवन में गरीब बचों को कोचिंग आदि नि:शुल्क दिलाने की योजना है, जिसपर काम किया जा रहा है। अभी एक एनजीओ की गतिविधियां संचालित कराई जा रही है।
Created On :   23 Sept 2026 6:47 PM IST












