Satna News: चोट के 7 दिन बाद टेटनस, डॉक्टरों ने की ट्रेकियोस्टोमी, वेंटिलेटर पर किशोर

चोट के 7 दिन बाद टेटनस, डॉक्टरों ने की ट्रेकियोस्टोमी, वेंटिलेटर पर किशोर
गौरतलब है कि जिला अस्पताल में टेटनस से भर्ती होने वाला डेढ़ माह में यह दूसरा मामला है।

डिजिटल डेस्क,सतना। जिले के पाथर कछार गांव निवासी 15 वर्षीय किशोर शीतल खैरवार को टेटनेस होने पर गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल के सेकण्ड आईसीयू में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार करीब सात दिन पहले उसके पैर में चोट लगी थी, जिसके बाद संक्रमण बढ़ने से उसे टेटनेस हो गया।

हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां फिलहाल मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर है। डॉक्टरों के अनुसार किशोर की स्थिति गंभीर बनी हुई है और विशेषज्ञों की निगरानी में लगातार उपचार किया जा रहा है। मरीज का इलाज डॉ. एलपी सिंह के निर्देशन में डॉ. बद्री विशाल सिंह और सीनियर रेजीडेंट डॉ. चेतन कर रहे हैं।

सांस लेने में हुई तकलीफ तो यह रास्ता अपनाया

टेटनस की वजह से मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगी। ऐसे में शासकीय मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहित समाधिया ने मरीज की ट्रैकियोस्टॉमी कर श्वास मार्ग को सुरक्षित किया। डॉक्टरों की टीम लगातार मरीज की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल दी जा रही है।

क्या विधा है यह

ट्रैकियोस्टॉमी एक मेडिकल प्रक्रिया है, जिसमें मरीज की सांस लेने में मदद के लिए गर्दन के सामने वाले हिस्से में एक छोटा छेद (छोटी सर्जरी से) बनाया जाता है और उसमें एक ट्यूब डाली जाती है। जब मरीज सामान्य तरीके से मुंह या नाक से सांस नहीं ले पाता, तब यह प्रक्रिया की जाती है। विशेषज्ञ श्वास नली (विंड पाइप) तक सीधा रास्ता बना देते हैं इससे ऑक्सीजन सीधे फेफड़ों तक पहुंचती है।

डेढ़ माह में दूसरा मामला

गौरतलब है कि जिला अस्पताल में टेटनस से भर्ती होने वाला डेढ़ माह में यह दूसरा मामला है। सरसा (पन्ना) निवासी मुन्ना सिंह के 19 वर्षीय पुत्र लोकेन्द्र सिंह का शरीर अकड़ने लगा था, तब वह मैंगलौर में था।

तबीयत बिगड़ने पर वह अपने गांव आया और मैहर से उसे सतना के लिए रेफर किया गया था। उसे भी वेंटीलेंटर सपोर्ट पर रखा गया था। रेयर डिसीज में शुमार हो चुके टेटनस का पेशेंट करीब 15 वर्ष बाद सामने आया था। वर्ष 2010-11 में ऐसे मरीजों की संख्या ज्यादा हुआ करती थी। डॉक्टरों के अथक प्रयासों और उपचार के बाद मुन्ना सिंह ठीक हो गया था।

इनका कहना है

चोट लगने के बाद समय पर उपचार और टीकाकरण नहीं होने से टेटनेस जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। चोट लगने पर तत्काल उपचार कराएं और टेटनेस से बचाव के लिए आवश्यक टीकाकरण जरूर कराएं।

डॉ. बद्री विशाल सिंह

सहायक प्राध्यापक (मेडिसिन), जीएमसी

Created On :   25 Feb 2026 5:26 PM IST

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