बिरला ने कहा - पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र के आधार स्तंभ, प्रत्येक रुपये का रखा जाए समुचित हिसाब

डिजिटल डेस्क, तिरुवनंतपुरम. लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि सरकारी खजाने से निकाले गए सार्वजनिक धन के प्रत्येक रुपये का समुचित हिसाब रखा जाना चाहिए तथा उसका पूर्ण उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए, जिसके लिए उसे स्वीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र के आधार स्तंभ हैं तथा सार्वजनिक व्यय की वास्तविक कसौटी यह होनी चाहिए कि उससे आम नागरिकों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया है।
बिरला ने मंगलवार को केरलम विधान सभा परिसर में संसद और राज्य विधान मंडलों की लोक लेखा समितियों के सभापतियों के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए ये बातें कही। बिरला ने कहा कि लोक लेखा समिति (पीएसी) संसदीय लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण संस्था है, जिसे सार्वजनिक व्यय की जांच करने, वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने और कार्यपालिका को जवाबदेह बनाने का दायित्व सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि समितियों का दायित्व केवल लेखा-जोखा और लेखापरीक्षा निष्कर्षों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें यह भी आकलन करना चाहिए कि सार्वजनिक धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति और अपेक्षित परिणाम हासिल करने में हुआ है या नहीं।
पीएसी के सभापति के रूप में विपक्ष के किसी सदस्य को नियुक्त करने की विशिष्ट लोकतांत्रिक परंपरा का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि यह प्रथा भारत के संसदीय लोकतंत्र की परिपक्वता, समावेशिता और मजबूती को दर्शाती है। समिति में सभी राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व यह सुनिश्चित करता है कि सार्वजनिक व्यय की जांच के दौरान विभिन्न दृष्टिकोणों को उचित स्थान मिले। उन्होंने इस व्यवस्था को इस बात का बेहतरीन उदाहरण बताया कि लोकतांत्रिक संस्थाएं एक साझा राष्ट्रीय उद्देश्य की पूर्ति के लिए राजनीतिक विचारों और मतभेदों से ऊपर उठकर कार्य कर सकती हैं। उद्घाटन सत्र को केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, संसद की लोक लेखा समिति के सभापति के. सी. वेणुगोपाल समेत कई अन्य गणमान्य लोगों न संबोधित किया।
संसद सत्र में पीएसी की कम-से-कम एक रिपोर्ट पर हो चर्चाः वेणुगोपाल
संसद की लोक लेखा समिति के सभापति वेणुगोपाल ने कहा कि जवाबदेही केवल व्यय की जांच तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संसदीय निगरानी का दृष्टिकोण परिणामोन्मुखी होना चाहिए, ताकि सार्वजनिक धन के प्रत्येक रुपये का विवेकपूर्ण उपयोग हो और उससे निर्धारित उद्देश्य की पूर्ति सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह प्रस्ताव भी रखा कि संसद के प्रत्येक सत्र के दौरान लोक लेखा समिति की कम से कम एक रिपोर्ट तथा उस पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई पर चर्चा होनी चाहिए।
Created On :  
