Umaria news: बांधवगढ़ मे वाइल्डलाइफ कॉरिडोर, मानव जानवर द्वन्द रोकने साझा हुई गतिविधियाँ

बांधवगढ़ मे वाइल्डलाइफ कॉरिडोर, मानव जानवर द्वन्द रोकने साझा हुई गतिविधियाँ
मानव-वन्यजीव संघर्ष और समाधान पर चर्चा

डिजिटल न्यूज़ उमरिया

WWF-India ने बांधवगढ़ में एक विशेष मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य पर्यावरण और संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सटीक, तथ्यपरक और जागरूक रिपोर्टिंग को बढ़ावा देना था। साथ ही, पारिस्थितिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वाले मीडिया कर्मियों में जागरूकता, संवेदनशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर भी जोर दिया गया। इन सत्रों में कॉरिडोर कनेक्टिविटी और उसका महत्व, हाथी कॉरिडोर, संरक्षण की कार्यप्रणालियां एवं चुनौतियां तथा मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। WWF-India की टीम ने भारत में संरक्षण संचार के लिए अपनाए जा रहे नैतिक मानकों और बेहतर कार्यप्रणालियों पर भी प्रकाश डाला तथा वन्यजीव और संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सटीक, संतुलित और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के महत्व को रेखांकित किया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप निदेशक योहान कटारा ने बताया कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में होने वाली सभी घटनाओं को लेकर पूरी पारदर्शिता बरती जाती है। भोपाल से आये वरिष्ठ पत्रकार हरिकृष्ण दुबौलिय ने कहा, “बांधवगढ़ मध्य प्रदेश का सर्वाधिक बाघ आबादी वाला टाइगर रिजर्व के साथ जैव-विविधता से समृद्ध स्थल भी है। ऐसे में प्रेस और मीडिया की जिम्मेदारी है कि पर्यावरण और वन्य जीव कानूनों का पालन सुनिश्चित हो। जहां कानूनों का उल्लंघन होता दिख रहा है हमें उसे ठीक ढंग से और संवेदनशीलता के साथ रिपोर्ट करना चाहिए” WWF-India की हेड – कंजर्वेशन पार्टनरशिप्स, नेहा सिन्हा ने कहा, “किसी मीडिया आलेख का स्वर लोगों और उनकी सोच को प्रभावित करता है और इसका असर नीतियों पर भी पड़ सकता है। यदि हर एक संघर्ष की घटना के बाद पूरे वन्यजीव समुदाय को दोषी ठहराया जाता है, तो इससे न केवल वन्यजीवों को नुकसान पहुंचता है, बल्कि लोगों पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ सकता है। मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों और इसके समाधान की संभावनाओं पर भी खोजपरक कहानियां की जा सकती हैं।

Created On :   24 Aug 2026 9:51 PM IST

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