वाशिम कोर्ट का फैसला: पुलिस हिरासत में मौत मामले में 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद, तत्कालीन थानेदार भी दोषी

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  • मुकदमे के दौरान न्यायालय में 47 गवाहों के बयान दर्ज किए गए
  • विभिन्न गंभीर धाराओं में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई
  • वाशिम न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला

Washim News. वाशिम के जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जे.पी. झपाटे ने वर्ष 2011 के चर्चित पुलिस हिरासत मृत्यु मामले में रिसोड़ के तत्कालीन थाना प्रभारी सहित नौ पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। गुरुवार को सुनाए गए इस फैसले को प्रदेश के चर्चित न्यायिक निर्णयों में शामिल माना जा रहा है।

यह मामला 9 मई 2011 का है। पुलिस के अनुसार लूट के एक मामले की जांच के दौरान रिसोड़ पुलिस ने हिंगोली जिले की सेनगांव तहसील के वाढोणा गांव से पारधी समाज के बेंग्या पवार (25) और राजू पवार (28) को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। आरोप है कि पुलिस हिरासत में दोनों के साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे बेंग्या पवार की मौत हो गई।

शुरुआत में मामले में केवल आकस्मिक मृत्यु दर्ज की गई थी, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद जांच राज्य सीआईडी को सौंप दी गई। मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर आपत्ति जताई थी। सीआईडी के तत्कालीन उपाधीक्षक अनवर शेख, उपाधीक्षक चव्हाण और उनकी टीम ने मामले की दोबारा गहन जांच कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।

मुकदमे के दौरान न्यायालय में 47 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। गवाहों की गवाही, चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराया।

न्यायालय ने तत्कालीन थाना प्रभारी माधव माणिकराव धांडे तथा पुलिसकर्मी मदन केशव पवार, शिवाजी नामदेव खिल्लारी, पंजाब माणिकराव पाटकर, रमेश सीताराम पवार, प्रकाश सीताराम ताराम, नागोराव भगवानराव खंडके, अशोक निवृत्ति वैद्य और वसंत कनीराम जाधव को हत्या सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता श्रीराम नारायण कालू ने दलील दी कि मृतक बेंग्या पवार का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और उसके खिलाफ कोई अपराध सिद्ध नहीं हुआ था। इसके बावजूद पुलिस ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए हिरासत में उसके साथ अमानवीय मारपीट की, जिसके कारण उसकी मृत्यु हुई।

न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की हत्या, कबूलनामा प्राप्त करने के लिए यातना देने, गंभीर चोट पहुंचाने और आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं के तहत सभी आरोपियों को दोषी ठहराया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिसकर्मियों को हिरासत में हुई मौत के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के इस फैसले की पुलिस महकमे के साथ-साथ न्यायिक और सामाजिक क्षेत्र में व्यापक चर्चा हो रही है।

Created On :   2 July 2026 8:43 PM IST

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