Vighnaraja Sankashti Chaturthi 2026: कब है विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी? जानें सही तारीख, पूजा मुहूर्त और विधि

कब है विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी? जानें सही तारीख, पूजा मुहूर्त और विधि
इस बार चतुर्थी तिथि मंगलवार को पड़ रही है और इस दिन आने वाली चतुर्थी को अंगारकी संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है।

डिजिटल डेस्क, भोपााल। भगवान गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी का व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, चतुर्थी तिथि पर व्रत और पूजा करने पर श्री गणेश जल्द ही कष्टों से मुक्ति देते हैं। भक्त अपने जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना बप्पा से करते हैं। वहीं आश्विन मास की संकष्टी को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, भगवान गणेश को समर्पित विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी इस बार बेहद खास संयोग में पड़ रही है।

इस बार चतुर्थी तिथि मंगलवार को पड़ रही है और इस दिन आने वाली चतुर्थी को अंगारकी संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। मान्यता है कि अंगारकी संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की आराधना करने से संकटों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। इस बार यह व्रत 29 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। आइए जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत विधि...

तिथि कब से कब तक

चतुर्थी तिथि आरंभ:29 सितंबर 2026, मंगलवार की शाम 5 बजकर 09 मिनट से

चतुर्थी तिथि समापन: 30 सितंबर 2026, बुधवार की दोपहर 2 बजकर 55 मिनट तक

चंद्रोदय: लगभग शाम 7:40–7:45 बजे, स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है।

व्रत पारण: चंद्रमा को अर्घ्य देने और गणेश जी की पूजा के बाद किया जाता है

पूजा सामग्री

जल और गंगाजल, रोली और अक्षत, दूर्वा, फूल, दीपक और घी/तेल, धूप या अगरबत्ती, मोदक या लड्डू, फल, पंचामृत और चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल।

पूजन विधि

- पूजा के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा को ईशानकोण में चौकी पर स्थापित करें।

- चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा पहले बिछा लें।

- भगवान के सामने हाथ जोड़कर पूजा और व्रत का संकल्प लें।

- बप्पा को जल, अक्षत, दूर्वा घास, लड्डू, पान, धूप आदि अर्पित करें।

- ओम ‘गं गणपतये नम:’ मंत्र बोलते हुए गणेश जी को प्रणाम करें।

- इसके बाद एक थाली या केले का पत्ता लें, इस पर आपको एक रोली से त्रिकोण बनाना है।

- त्रिकोण के अग्र भाग पर एक घी का दीपक रखें। इसी के साथ बीच में मसूर की दाल व सात लाल साबुत मिर्च को रखें।

- पूजन के बाद चंद्रमा को शहद, चंदन, रोली मिश्रित दूध से अर्घ्य दें, पूजन के बाद लड्डू प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।

डिसक्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारी अलग अलग किताब और अध्ययन के आधार पर दी गई है। bhaskarhindi.com यह दावा नहीं करता कि ये जानकारी पूरी तरह सही है। पूरी और सही जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ (ज्योतिष, वास्तुशास्त्री) की सलाह जरूर लें।

Created On :   28 Sept 2026 1:30 PM IST

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