एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: हर महिला में मर्दानी है, लेकिन वह खुद इन सच्चाइयों से कतराती हैं - रानी मुखर्जी

हर महिला में मर्दानी है, लेकिन वह खुद इन सच्चाइयों से कतराती हैं - रानी मुखर्जी

डिजिटल डेस्क, मुम्बई। मर्दानी 3 के साथ रानी मुखर्जी एक बार फिर शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में लौट रही हैं, लेकिन इस बार लड़ाई और भी गहरी, निजी और सामाजिक है। मर्दानी के हर भाग ने सफलता दर्ज की। अब दैनिक भास्कर से खास बातचीत में रानी ने महिला सुरक्षा, सिनेमा की सामाजिक जिम्मेदारी और अपने किरदार की मानसिक-शारीरिक तैयारी पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि कैसे मर्दानी फ्रेंचाइजी ने सिर्फ बॉक्स ऑफिस ही नहीं, समाज में भी जागरूकता पैदा की है और क्यों ऐसी फिल्मों का सफल होना जरूरी है, ताकि सशक्तिकरण की ये कहानियां बनती रहें। मर्दानी 3 के लिए इजराइली क्राव मागा जैसी कठिन ट्रेनिंग लेने वाली रानी मानती हैं कि शिवानी शिवाजी रॉय आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं क्योंकि जब तक डर है, तब तक ‘मर्दानी’ की जरूरत है।

जेंडर बायस्ड विवाद को हवा मत दें

रानी कहती हैं, मर्दानी वह फिल्म है जिसकी आज समाज को जरुरत है। फिल्म को फिल्म की तरह देखना चाहिए ना कि महिला प्रधान या पुरुष प्रधान फिल्म की तरह। ऐसी बातें बोलकर हम खुद जेंडर बायस्ड को हवा देते हैं। फिल्म या तो अच्छी होती है या बुरी। मर्दानी फिल्म में जो संदेश है उस पर बात होनी चाहिए। एकलौती महिला प्रधान फ्रेंचाइजी है उस पर नहीं।

आज डिस्टर्ब होना जरुरी है

मुझे कई लोगों ने कहा कि बच्चियों की तस्करी पर क्यों फिल्म बनाना है ? मैंने उन्हें कहा क्यों नहीं ? लोग तो इस पर बात भी नहीं करना चाहते , खासकर महिलाएं। एक बड़े प्रोडक्शन हाउस का ऐसे मुद्दों पर फिल्म बनाना भी बड़ी बात होती है। महिलाओं ने जरा सा ट्रेलर देखा और कहा अरे यह तो बहुत डिस्टर्बिंग है मुझे नहीं देखना। पर मुझे लगता है आज के दौर में आपको थोड़ा डिस्टर्ब होना अब जरुरी है। जब तक आप असहज नहीं होंगे आप इस पर बात नहीं करेंगे ,और अब बच्चियों और लड़कियों की सुरक्षा के लिए इस पर जागरूकता बढ़ानी पड़ेगी और बात करनी पड़ेगी।

सिस्टम को भी बरतनी होगी सख्ती

मर्दानी की हर फ्रेंचाइज में मेरी यही कोशिश होती है कि लड़कियों को थोड़ा सतर्क कर सकूं क्योंकि पता नहीं किस गली और कोने में शराफत का चोला पहने कौन सा हैवान छुपा बैठा है। वो एक नाज़ुक पल आपकी जिंदगी खराब कर सकता है इसलिए बार-बार इस पर सतर्कता जरुरी है।उन बच्चियों की हालत और उनके पेरेंट्स पर क्या बितती होगी जब बच्चियों को अगवा कर उनकी तस्करी होती है ? और हम इस पर बात करने से कतराते हैं ? हम तो फिल्मों के जरिये इन मुद्दों को उठा रहे हैं लेकिन सिस्टम को भी थोड़ा सख्त होने की जरुरत है।

दुखद है कि यह कल्पना नहीं सच है

मुझे दुख इस बात का है कि जो फिल्म में हम दर्शा रहे हैं वह काल्पनिक नहीं बल्कि हकीकत है। उसी बात से मैं परेशान हो जाती हूं। शिवानी शिवाजी राय का यह मेरा किरदार मेरे लिए सबसे मुश्किल है क्योंकि उस घिनौने सच को मैं दिखा भी रही हूं और यूनिफॉर्म की जिम्मेदारी को भी बखूबी निभाना है। मैं भी एक मां हूं। तकलीफ और दर्द शूट के दौरान और ज्यादा महसूस होता है जब मैं उस प्रक्रिया से गुजरती हूं।

मार्शल आर्ट भी सीखा

महिलाएं एक जरूर काफी शक्तिशाली हैं लेकिन यह बात भी सही है कि उन्हें खुद को शारीरिक रूप से भी मजबूत करना चाहिए। मैंने भी इस बार फिल्म के लिए कठिन मार्शल आर्ट ट्रेनिंग, खासकर इजराइली क्राव मागा जैसी सेल्फ-डिफेंस तकनीक में प्रशिक्षण लिया है ताकि मेरे एक्शन दृश्य यथार्थपूर्ण और प्रभावशाली दिखें। क्राव मागा वह तकनीक है जो प्रतिद्वंद्वी की ताकत से कहीं अधिक प्रभावी तरीके से निपटना सिखाती है। मैंने पहले मर्दानी के दौरान भी यह मेरी ट्रेनिंग का हिस्सा रही है, इससे मैंने यह महसूस किया कि शारीरिक शक्ति से ज्यादा तकनीक और आत्मविश्वास जरूरी है। शिवानी शिवाजी रॉय जैसा किरदार आज भी बेहद प्रासंगिक है क्योंकि फिल्में केवल मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक संदेश भी देती हैं और महिलाओं को सशक्त बनने का संदेश फैलाती हैं।

महिला सशक्त किरदार निभाना प्राथमिकता

मुझे सिनेमा में भारतीय सशक्त महिला के किरदार को निभाना हमेशा से बेहद पसंद रहा है। मैंने वही रोल निभाए जिसमें दुनिया को गर्व से दिखा सकूं कि यह हैं हम। देश में एक बच्ची के जन्म के साथ ही कई जिम्मेदारियों को निभाने के लिए उसे तैयार किया जाता है। बचपन में वह गुड्डे गुड़ियों से घर-घर खेलती है उसे वही से ट्रेनिंग या परवरिश दी जाती है कि आगे चलकर कई और रोल निभाने वाली है। वह बचपन में ही मातृत्व और ममता के भाव के साथ बड़ी होती है। हर नारी का जीवन संघर्ष से भरा होता है। मैंने भी काफी संघर्ष किया है, अपनी मां, दादी और नानी को देखा है। अभिनय के ३० साल बाद नेशनल अवार्ड मिला। हमें हर जगह खुद को हर बार प्रूफ करना पड़ता है। किसी भी क्षेत्र में आसानी से जगह नहीं मिलती। लेकिन मैं अपनी कोशिश कभी नहीं छोड़ती।

हर महिला में मर्दानी, स्त्री होने पर गर्व

मुझे नारीत्व का भाव बेहद पसंद है। स्त्री होने पर गर्व है , उसके साथ ही ईश्वर ने बेटी की मां भी बना दिया, उससे ज्यादा अच्छा कुछ नहीं हो सकता । मैंने बचपन से अपनी मां , दादी और नानी की हिम्मत को करीब से देखा है। मुझे लगता है हर महिला में देवी के 9 रूप मौजूद हैं और समय आने पर वह अपने अंदाज में सामने आते हैं। उन्हें मैंने साधारण ढंग से शांति से घर चलाते भी देखा है और समय आने पर कठोरता से लड़ते भी देखा है। इस देश की हर स्त्री में भी उतना ही दम है। मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे स्त्री का जन्म मिला।

Created On :   30 Jan 2026 3:58 PM IST

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