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एक्शन में कोच इगोर, किंग्स कप के लिए तैयार की 37 खिलाड़ियों की लिस्ट

एक्शन में कोच इगोर, किंग्स कप के लिए तैयार की 37 खिलाड़ियों की लिस्ट

हाईलाइट

  • कोच इगोर स्टिमैच ने नियुक्त होते ही एक्शन में आ गए हैं
  • इगोर स्टिमैच ने संभावित खिलाड़ियों की लिस्ट तैयार की है
  • इस लिस्ट में 37 खिलाड़ी शामिल हैं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय फुटबॉल टीम के नवनियुक्त कोच इगोर स्टिमैच नियुक्त होते ही एक्शन में आ गए हैं। उन्होंने अगले महीने थाईलैंड में शुरु हो रहे किंग्स कप से पहले होने वाले प्रैक्टिस सेशन के लिए संभावित खिलाड़ियों की लिस्ट तैयार की है। इस लिस्ट में 37 खिलाड़ी शामिल हैं। घायल स्ट्राइकर जेजे लालपेखलुआ को चार अन्य नियमित खिलाड़ियों को इस लिस्ट में नहीं शामिल किया गया है। बता दें कि किंग्स कप टूर्नामेंट 5 से 8 जून तक थाईलैंड के बुरिराम में आयोजित की जाएगी।

प्रैक्टिस सेशन 20 मई से नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। कोच इगोर स्टिमैच ने अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (AIFF) के हवाले से कहा, 'मैंने AFC एशियन कप 2019 के मैच देखे थे। इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम में शामिल खिलाड़ियों ने मुझे काफी प्रभावित किया था। मैंने इसे ध्यान में रखकर यह टीम चुनी है। इसमें शामिल नए खिलाड़यों को मैंने आई-लीग और इंडियन सुपर लीग के मैचों को देखकर और उसपर रिसर्च कर चुना है।'

इगोर ने कहा, 'मैं सभी खिलाड़ियों को बधाई देता हूं और उन्हें आगे के लिए शुभकामनाएं देता हूं। मैं तुरंत काम पर पहुंचने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। मैंने हमेशा नई चुनौतियों को बखूबी निभाया है और इसबार मैं ब्लू टाइगर्स (भारत) की कोचिंग के लिए तत्पर हूं।' जेजे घुटने की चोट से जूझ रहे हैं और वह बुधवार को AFC कप में भी नहीं खेल पाए थे। ऐसा कहा जा रहा है कि वह मई में अपने घुटनों की सर्जरी करवाने जा रहे हैं।

जेजे के अलावा हलिचरण नारजारी (घुटने की चोट), मंदार राव देसाई (हैमस्ट्रिंग की चोट), आशिक कुरुनियान (घुटने की चोट), नरेंद्र गहलोत (घुटने की चोट) और जेरी लालरिनजुआला को इस लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है। बता दें कि जुलाई में किंग्स इंटरकांटिनेंटल कप के बाद किंग्स कप होगा। किंग्स कप फीफा द्वारा स्वीकृत इंटरनेशनल 'A' टूर्नामेंट है, जिसे 1968 से थाईलैंड FA द्वारा आयोजित किया जाता रहा है। किंग्स कप में भारत की पिछली भागीदारी 1977 में हुई थी। मेजबान थाईलैंड और वियतनाम टूर्नामेंट में भाग लेने वाली दो अन्य टीमें हैं।

संभावित खिलाड़ियों की सूची :

गोलकीपर: गुरप्रीत सिंह संधू, विशाल कैथ, अमरिंदर सिंह, कमलजीत सिंह।

डिफेंडर्स : प्रीतम कोटाल, निशु कुमार, राहुल भेक, सलाम रंजन सिंह, संदेश झिंगन, आदिल खान, अनवर अली, सुभाशीष बोस, नारायण दास।

मिडफील्डर्स : उदंत सिंह, जैकीचंद सिंह, ब्रैंडन फर्नांडिस, अनिरुद्ध थापा, रेनीर फर्नांडिस, बिक्रमजीत सिंह, धनपाल गणेश, प्रोणय हाल्डर, रोलिन बोरगेस, जर्मनप्रीत सिंह, विनीत राय, साहल अब्दुल, अमरजीत सिंह, रिडम त्लांग, लल्लिअनजुआला छांगते, कोमल थाटल, माइकल सूसाईराज।

फॉरवर्ड : बलवंत सिंह, सुनील छेत्री, जोबी जस्टिन, सुमीत पासी, फारुख चौधरी, मनवीर सिंह

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।