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आईएसएल-6 : रॉय कृष्णा ने हैदराबाद एफसी के खिलाफ एटीके को हार से बचाया

आईएसएल-6 : रॉय कृष्णा ने हैदराबाद एफसी के खिलाफ एटीके को हार से बचाया

हाईलाइट

  • दो बार के चैम्पियन एटीके के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ से संतोष करना पड़ा

डिजिटल डेस्क, हैदराबाद। एक नाटकीय मुकाबले में हैदराबाद एफसी को जीएमसी बालायोगी स्टेडियम में शनिवार को खेले गए हीरो इंडियन सुपर लीग (ISL) के अपने नौवें दौर के मुकाबले में दो बार के चैम्पियन एटीके के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ से संतोष करना पड़ा। इस रोमांचक मैच के 85वें मिनट तक दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर चल रही थीं, लेकिन डेविसन रोजेरियो दा सिल्वा उर्फ बोबो ने 85वें मिनट में हेडर के जरिए गोल करते हुए हैदराबाद को 2-1 से आगे कर दिया था।

हैदराबाद टीम अपनी जीत का जश्न मनाने की तैयारी में थी लेकिन इसी बीच उसके गोलकीपर कमलजीत सिंह ने 90वें मिनट में ऐसी गलती की, जो उसे भारी पड़ गई। उनकी गलती का फायदा उठाकर रॉय कृष्णा ने गोल करते हुए एटीके को 2-2 से बराबरी दिला दी। इस गोल में जावी हर्नादेज ने कृष्णा की मदद की। यह इस सीजन में कृष्णा का आठवां गोल है।

बोबो के गोल के बाद लगा कि हैदराबाद एफसी कोलकाता में मिली 0-5 की हार का हिसाब बराबर कर लेगी लेकिन किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया। दोनों टीमों का यह नौवां मुकाबला था। दो बार की चैम्पियन एटीके चार जीत, दो हार और तीन ड्रॉ से 14 अंक लेकर 10 टीमों की तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गई है। उसे एक स्थान का फायदा हुआ है।

दूसरी ओर, पहली बार ISL में खेल रही हैदराबाद एफसी के खाते में छह हार, एक जीत और दो ड्रॉ है। उसके पास पांच अंक हैं और वह तालिका में अभी भी सबसे नीचे है। फाउल के साथ शुरू होने वाला इस मुकाबले का पहला हाफ प्रतिस्पर्धा के लिहाज से बराबर रहा। दो बार के चैम्पियन एटीके ने जहां 15वें मिनट में हासिल पेनाल्टी पर गोल करते हुए बढ़त हासिल की वहीं मेजबान टीम ने 39वें मिनट में मिले कार्नर को सफलता का मंत्र बनाया और बराबरी कर ली।

मेजबान टीम ने हालांकि आठवें मिनट में एक बेहतरीन मौका बनाया था, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। नौवें मिनट में मेजबान टीम के जाइल्स बार्नेस को पीला कार्ड मिला। एटीके ने 13वें मिनट में एक हमला किया, जिस पर उसे पेनाल्टी मिल गया। इस पर गोल करते हुए रॉय कृष्णा ने एटीके को 1-0 से आगे कर दिया। एटीके को यह पेनाल्टी बॉक्स में आशीष राय द्वारा हैंडबॉल किए जाने पर मिला और इस सीजन में सबसे अधिक गोल करने वाले कृष्णा ने बिना कोई गलती किए गेंद को पोस्ट में डाल दिया। इसी तरह का हालात 23वें मिनट में एटीके के लिए पैदा हुआ था, लेकिन रेफरी ने पेनाल्टी नहीं दिया। मार्सेलिन्हो ने एक लो फ्रीकिक लिया था और गेंद बॉक्स के अंदर कृष्णा के हाथ से टकराया था लेकिन रेफरी ने इसे नजरअंदाज कर दिया। मार्सेलिन्हो और कोच फिल ब्राउन इस पर काफी नाराज नजर आए।

24वें मिनट में हैदराबाद को बराबरी का एक और मौका मिला था लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। 30वें मिनट में हालांकि एटीके के लिए कृष्णा ने एक मौका बनाया लेकिन गेंद वाइड रह गई। इसके जवाब में हैदराबाद के लिए मार्सेलिन्हो और निखिल पुजारी ने मौका बनाया लेकिन प्रीतम कोटाल ने उसे क्लीयर कर दिया। 38वें मिनट में आदिल खान राइट फ्लैंक से गेंद लेकर बॉक्स में पहुंचे लेकिन सलाम रंजन सिंह ने उसे क्लीयर कर दिया। इस पर हैदराबाद को कार्नर मिला। कार्नर नेस्टर गोर्डिलो ने लिया और डेविसन रोजारियो दा सिल्वा (बोबो) ने गोल करते हुए मेजबान टीम को बराबरी पर ला दिया।

बराबरी के गोल से आहत एटीके ने दूसरे हाफ की शुरुआत में 46वें मिनट में एक शानदार मूव बनाया। डेविड विलियम्स ने राइट फ्लैंक से एक अच्छा क्रास दिया, जिस पर कृष्णा ने हेडर के जरिए गोल करना चाहता। गेंद हालांकि पोस्ट के करीब से निकल गई। एटीके ने इसी तरह के दो हमले 57वें और 61वें मिनट में लेकिन वे क्लीयर कर दिए गए। 64वें मिनट में एटीके के सेहनाज सिंह को पीला कार्ड मिला। मार्सेलिन्हो ने 76वें मिनट में मिले फ्रीकिक पर बॉक्स के बाहर से अच्छा शॉट लिया। वह गेंद को वॉल के ऊपर से पोस्ट की ओर भेजने में सफल रहे लेकिन गेंद उम्मीद के मुताबिक कर्ल नहीं हुई और गोलकीपर अरिंदम भट्टाचार्य ने उसे दिशाहीन कर दिया।

इसी बीच, कुछ ऐसा हुआ, जिसकी एटीके को कतई उम्मीद नहीं थी। मार्सेलिन्हो ने लगभग हाफलाइन से एक बेहतरीन एरियल पास बॉक्स में पहुंचे, जिसे हेडर के जरिए पोस्ट में डालकर बोबो ने हैदराबाद को 2-1 से आगे कर दिया। यह एक बेहतरीन गोल था। इसके बाद कृष्णा ने 90वें मिनट में गोल करते हुए स्कोर 2-2 कर दिया।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।