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Football: माराडोना की अटॉप्सी रिपोर्ट आई सामने, शराब या नशीले पदार्थों के सेवन के कोई संकेत नहीं

December 23rd, 2020 22:10 IST
Football: माराडोना की अटॉप्सी रिपोर्ट आई सामने, शराब या नशीले पदार्थों के सेवन के कोई संकेत नहीं

हाईलाइट

  • माराडोना लिवर, किडनी और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित थे
  • अटॉप्सी में शराब या नशीले पदार्थों के सेवन के कोई संकेत नहीं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अर्जेंटीना फुटबॉल के दिग्गज डिएगो माराडोना लिवर, किडनी और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित थे, लेकिन उनकी अटॉप्सी में शराब या नशीले पदार्थों के सेवन के कोई संकेत नहीं है। राजधानी ब्यूनस आयर्स के एक नॉर्दन सबर्ब, सैन इसिड्रो में पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने मंगलवार देर रात माराडोना की अटॉप्सी के परिणाम पब्लिश किए। जांच के एक हिस्से के रूप में इसके आदेश दिए गए थे। इसका मकसद यह पता करना था कि उनको जो हेल्थ केयर दी गई थी उसमें किसी तरह की कोई लापरवाही तो नहीं बरती गई। बता दें कि माराडोना का 25 नवंबर को 60 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। माराडोना की मौत के बाद की गई पहली अटॉप्सी में पाया गया था कि उनके दिल का वजन सामान्य से दोगुना हो गया था।

अपने जीवन के अंतिम दिनों में वह सिरोसिस, हृदय रोग और किडनी फेलियर सहित कई बीमारियों से पीड़ित थे। टॉक्सीकोलॉजी एनालिसिस से पता चला कि उनके रक्त या मूत्र में कोई शराब या नशीले पदार्थ नहीं थे। लेकिन माराडोना अल्सर समेत अन्य बीमारियों के लिए एंटी डिप्रेसेंट्स, एंटी साइकोटिक ड्रग और दूसरे मेडिकेशन ले रहे थे। माराडोना ने अपने जीवन के दौरान कोकेन और शराब के एडिक्शन से लड़ाई की थी। जांचकर्ताओं में से एक तेलम प्रेस एजेंसी ने बताया, 'प्रयोगशाला विश्लेषण से जो निकला है वह उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि यह पुष्टि करता है कि माराडोना को साइकोट्रॉपिक दवाएं दी गई थीं, लेकिन हृदय रोग की कोई दवा नहीं थी।' मनोचिकित्सक अगस्टिना कोसाचोव और हार्ट सर्जन लियोपोल्डो ल्यूक अंडर इन्वेस्टिगेशन है क्योंकि माराडोना का इलाज ये दोनों ही कर रहे थे।

मैराडोना का करियर
अर्जेंटीना से खेलते हुए मैराडोना ने इंटरनेशनल करियर में 91 मैच खेले, जिसमें उन्होंने 34 गोल किए। उन्होंने 4 FIFA वर्ल्ड कप टूर्नामेंटों खेला, जिसमें 1986 का विश्व कप शामिल था। 1986 वर्ल्ड कप में वे अर्जेंटीना के कैप्टन भी थे। वे टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किए गए थे। उन्हें गोल्डन बॉल अवॉर्ड जीता था। मैराडोना को फीफा प्लेयर ऑफ द सेंचुरी से भी नवाजा जा चुका है। उन्होंने एक बार वर्ल्ड कप गोल्डन बॉल, एक बार बेलोन डी ओर, 2 बार साउथ अमेरिकन फुटबॉलर ऑफ द ईयर, 6 बार नेशनल लीग टॉप स्कोरर अवॉर्ड जीता है। साल 2018 में डिएगो माराडोना के 58वें जन्मदिन का जश्न मनाते हुए उनकी पहली कांसे की प्रतिमा का अनावरण किया गया था।

Diego Maradona, Argentina soccer legend who led country to 1986 World Cup, dies at 60 | KTLA

माराडोना ड्रग्स और अल्कोहल की लत के शिकार थे
बता दें कि माराडोना ड्रग्स और अल्कोहल की लत के भी शिकार थे। माराडोना ने 1980 के दशक के मध्य में कोकीन लेना शुरू किया था। उन्हें अगले दो दशकों में ड्रग्स और अल्कोहल की लत लग गई। 1982 में उन्होंने नशीली दवाओं का उपयोग करना शुरू किया और 1984 में स्थिति और भी खराब हो गई जब वे नेपोली चले गए और कॉमर्रा के साथ उनके कनेक्शन थे। 2014 में, माराडोना ने अपने ड्रग उपयोग के बारे में कहा: 'मैंने अपने विरोधियों को एक बड़ा फायदा दिया। क्या आप जानते हैं कि अगर मैं ड्रग्स नहीं लेता तो मैं कैसा खिलाड़ी हो सकता था?' उन्हें पहली बार 1991 में कोकीन का टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद 15 महीने के लिए प्रतिबंधित किया गया था। इसी साल उन्हें ब्यूनस एयर्स में आधा किलो कोकीन रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और उन्हें 14 महीने के निलंबन की सजा दी गई।

Diego Maradona | Biography & Facts | Britannica

1994 में माराडोना एक बार फिर सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने अर्जेंटीना की नेशनल टीम के लिए खेलते हुए ग्रीस के खिलाफ एक गोल दागा था और कैमरे के लेंस के बिल्कुल करीब जाकर इसका जश्न मनाया था। हालांकि एक प्रतिबंधित पदार्थ एफेड्रिन के पांच वेरिएंट के पॉजिटिव टेस्ट के बाद उनपर 15 महीने का प्रतिबंध लगा दिया जिसने उनके इंटरनेशनल करियर को खत्म कर दिया। 1995 में, वह बोका जूनियर्स में चले गए लेकिन दो साल बाद वह छह साल में तीसरी बार ड्रग्स टेस्ट में फेल रहे, जिससे उनके प्लेइंग करियर को खत्म किया। 1996 में, माराडोना ने सार्वजनिक रूप से कहा: 'मैं था, हूं और हमेशा एक ड्रग एडिक्ट रहूंगा।'

Diego Maradona, his cocaine battle, wild celebrations, net worth, Hand of God goal and heart attack death denial - Mirror Online

2000 में माराडोना को ओवरडोज का सामना करना पड़ा। उन्होंने इतनी ज्यादा कोकीन ले ली थी कि उनका हार्ट फेल हो सकता था और उनकी जान जा सकती थी। इसके बाद कई साल तक रिहैबिलिटेशन में रहे थे। 2004 में उन्हें दिल का दौरा पड़ा। एक साल बाद, उन्हें गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी कराना पड़ी। 2007 में हेपेटाइटिस से पीड़ित होने के बाद फिर उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इसके बाद उन्होंने ड्रग्स लेना बंद कर दिया। 2017 में उन्होंने एक पत्रकार को बताया था कि उन्होंने 13 साल से ड्रग्स नहीं लिया था और बहुत अच्छा महसूस कर रहे हैं। हालांकि 2004 से वह शराब का सेवन कर रहे थे। 2018 में अर्जेंटीना के कई मैचों में उन्होंने अपनी विचित्र हरकतों के लिए काफी सुर्खियां बटोरी। 

FIFA World Cup 2018: Diego Maradona's unsavoury celebrations mar Argentina's win - sports

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डिजिटल इंडिया को गति देता रोहित मेहता का Startup Digital Gabbar

डिजिटल इंडिया को गति देता रोहित मेहता का Startup Digital Gabbar

डिजिटल डेस्क,भोपाल। "सफलता सिर्फ उनको नहीं मिलती जो सफल होने की इच्छा रखते है, सफल हमेशा वही होता है जो आगे बढ़ कर उन्हे पाने की चाहत रखते है।" ये उद्धहरण उनके लिए नहीं है जो आराम की जिंदगी को छोड़ कर बाहर नहीं निकालना चाहते, बल्कि ये उनपे लागू होती है जो निरंतर प्रयास करते रहते है।

इसी तर्ज पर चलते हुए, बिहार के पटना के शहर से आने वाले आईटी और तकनीक प्रेमी डबल मास्टर्स डिग्री धारी ने डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय यात्रा शुरू की थी, लेकिन आज वो इस मुकाम पर पहुँचे जाएंगे उन्होंने ऐसा नहीं सोचा होगा, की कुछ साल बाद, वह उन युवाओं के लिए प्रेरणा बनेंगे जो digital content curation में करियर बनाने की इच्छा रखते हैं।

उक्त व्यक्ति और कोई नहीं, बल्कि प्रसिद्ध digital marketer रोहित मेहता हैं, जो एक ब्लॉगर के रूप में उत्कृष्ट हैं और एक प्रख्यात आईटी विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने अपनी ज्ञानवर्धक ई-पुस्तकों के साथ दुनिया के साथ अपने ज्ञान को साझा करते हुए कई अहम भूमिकाएँ निभाई हैं।

एक दशक से अधिक की अवधि के लिए IT industry में काम करने के बाद, रोहित मेहता ने खुद को एक ऐसे tech blogger के रूप में प्रतिष्ठित किया है जो अपने पाठकों के साथ ऐसी तकनीकी ज्ञान को साझा करता है जो उन्हें बेहतर बेहतर बनने में मदद करती है।

हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओ में अपनी किताब को करने वाले रोहित ने ये साबित कर दिया है की डिजिटल मार्केटिंग केवल अंग्रेजी जानने वालों के लिए नहीं है। हिंदी में भी पढ़ कर आप इसे सिख सकते है ओर अपना करियर बन सकते है। इनकी सबसे अधिक लोकप्रिये बुक '15 Proven Secrets of Internet Traffic Mastery' है, जिसमे अपने अनलाईन बिजनस या ब्लॉग पर ट्राफिक (पाठक) लाने के 15 बेहतरीन तरीके बताए है।

आज, रोहित मेहता डिजिटल गब्बर (Digital Gabbar) नामक भारत के सबसे बड़े डिजिटल कंटेंट प्लेटफ़ॉर्म के संस्थापक संपादक हैं, एक अभूतपूर्व विज़न जिसका नेतृत्व डिजिटल उत्साही लोगों के एक समूह द्वारा किया जा रहा है।

जीवन में अपनी विभिन्न गतिविधियों पर रोहित के साथ बातचीत में, वे कहते हैं, " हर दूसरे आदमी की तरह, मैं भी इंटरनेट की दुनिया में नया था जब मैनें इसमे कदम रखा था। शुरू से ही कुछ नया सीखने और उसको साझा करने की चाहते ने मुझे ब्लॉगिंग में अपना करियर शुरू करने की प्रेरणा दी, तब से मैंने पीछे नहीं देखा हर एक नए सुबह के साथ इच्छा सकती मजबूत होती गई, Digital Gabbar शुरू करने से पहले बहुत से ब्लॉग/वेबसाइटें शुरू की मगर खुशी (kick) नहीं मिली”।

"डिजिटल गब्बर केवल एक ड्रीम प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि हमारे पाठकों के साथ जुड़ने का जरिया है जो किसी भी सीमा से परे है। हम ब्लॉगिंग, एफिलिएट से सम्बंधित टिप्स और ट्रिक्स की अपडेटेड जानकारी साझा करते हैं। जैसे : मार्केटिंग, एसईओ, ड्रापशीपिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन मनी मेकिंग, गाइड्स, ट्यूटोरियल्स और बहुत कुछ।  

डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय कैरियर का नेतृत्व करने के बाद, डिजिटल गब्बर की टीम लोकप्रिय डिजिटल मार्केटर्स, ब्लॉगर्स, YouTubers, उद्यमियों के साथ साक्षात्कार की एक श्रृंखला शुरू करने पर विचार कर रही है, ताकि भविष्य में डिजिटल इंडिया उनकी एक झलक दिखा सकें। जीवन की कहानियां जो प्रेरणा मिलती है वो सायद ही किसी और कार्य से मिलती होंगी।

रोहित मेहता के प्रमुख योगदान

आज दूरदर्शी रोहित मेहता ने डिजिटल मार्केटिंग, ब्लॉगिंग, एफिलिएट, एसईओ, ड्रापशीपिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन मनी मेकिंग मे अनेकों गाइड्स और सुझावों इत्यादि अपने पाठकों के डिजिटल गब्बर पे बिल्कुल मुफ़्त में साझा करते है।

साथ ही अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए नए उधमियों को मुफ़्त मे सलाह भी साझा करते है। @bloggermehta से आप इन्हे फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम,ट्विटर इत्यादि पे संपर्क कर सकते है।

गब्बर रोहित का लक्ष्य

अपने ब्लॉग डिजिटल गब्बर के अनुशार रोहित बताते है की उनका लक्ष्य सिर्फ जानकारी को साझा करना नहीं है, बल्कि डिजिटल इंडिया के युवाओ से उसको अमल भी करवाना चाहते है। ताकि आने वालों कुछ सालों में डिजिटल के क्षेत्र में इंडिया युवा पीढ़ी किसी से काम न रहे। यही कारण है की इन्होंने डिजिटल गब्बर की शुरुवात हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओ में एक साथ की है।

https://www.digitalgabbar.com/ और https://www.digitalgabbar.in/ क्रमशः रोहित के इंग्लिश और हिंदी के ब्लॉग है।

साथ ही साथ रोहित मेहता ने अपने जैसे युवाओ और start-up को बढ़ावा देने के लिए Indian Gabbar के नाम से एक साइट शुरू किया है। Digital Gabbar सभी उधमी और startup को Indian gabbar के रूप में संबोधित करते हुए उनकी आर्टिकल को बिल्कुल मुफ़्त में साझा कर रहा है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।