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Samsung Galaxy Tab S7 FE और Tab A7 Lite हुए लॉन्च, इन प्रीमियम फीचर्स से लैस हैं ये टेबलेट

Samsung Galaxy Tab S7 FE और Tab A7 Lite हुए लॉन्च, इन प्रीमियम फीचर्स से लैस हैं ये टेबलेट

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया की दिग्गज टेक कंपनी Samsung ने (सैमसंग) ने दो नए टैबलेट को लॉन्च किया है। इनमें Galaxy Tab S7 FE  (गैलेक्सी टैब एस7 एफई) और Tab A7 Lite (टैब ए7 लाइट) शामिल हैं। दोनों ही टेब प्रीमियम फीचर्स से लैस हैं। भारत में इसकी सेल जल्द ही भी शुरू हो जाएगी। इनमें से Galaxy TAb S7 FE जहां स्टाइलिश मेटल फिनिश के साथ आता है। इसे रोजाना की जरुरत को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। 

Galaxy Tab S7 FE टैबलेट चार कलर वेरिएंट में उपलब्ध होगा जिसमें मिस्टिक ब्लैक, मिस्टिक सिल्वर, मिस्टिक ग्रीन और मिस्टिक पिंक शामिल हैं। वहीं A7 Lite टैब दो कलर वेरिएंट में उपलब्ध होगा जिसमें ग्रे और सिल्वर कलर ऑप्शन शामिल हैं। आइए जानते हैं इनकी कीमत और स्पेसिफिकेशन के बारे में...

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कीमत
बात करें कीमत की तो, Galaxy Tab S7 FE के 64GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत रीब 60,000 रुपए है। वहीं इसके 128GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत करीब 65,000 रुपए है। जबकि Galaxy Tab A7 Lite का Wi-Fi वेरिएंट करीब 15,000 रुपए में और LTE वेरिएंट करीब 18,000 रुपए में उपलब्ध हो सकता है। हालांकि कंपनी ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। 

Samsung Galaxy Tab S7 FE के स्पेसिफिकेशन्स 
इस टैब में 12.4 इंच की एलसीडी डिस्प्ले दी गई है, जो कि 2560×1600 पिक्सल का रिजॉल्यूशन देती है। इसमें मैजिक S-Pen सपोर्ट दिया गया है। इसमें डॉल्बी एटमोस और AKG साउंड सपोर्ट वाले ड्युअल स्टेरिओ स्पीकर दिए गए हैं। इसमें 8 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा और 5 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा दिया गया है। पावर बैकअप के लिए इस टेब में 10,090mAh की बैटरी दी गई है, जो कि 45W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। 

यह Android 11पर आधारित Samsung OneUI पर काम करता है। बेहतर परफोर्मेंस के लिए इसमें क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 750G ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है। टैबलेट में 4GB रैम के साथ 64GB स्टोरेज और 6GB रैम के साथ 128GB स्टोरेज दी गई है। इंटरनल स्टोरेज को माइक्रोएसडी कार्ड स्लॉट के जरिए बढ़ाया जा सकता है। 

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Samsung Galaxy Tab A7 Lite के स्पेसिफिकेशन्स 
Galaxy Tab A7 Lite में 8.7-इंच की TFT डिस्प्ले दी गई है, जो कि 1340×800 पिक्सल का रिजॉल्यूशन देती है। इसमें डॉल्बी एटमोस और AKG साउंड सपोर्ट वाले ड्यूल स्टेरिओ स्पीकर दिए गए हैं। इस टैबलेट में 8 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और सेल्फी के लिए 2 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है।

इसमें 3GB रैम के साथ 32GB स्टोरेज और 4GB रैम के साथ 64GB स्टोरेज दी गई है। दी गई इंटरनल स्टोरेज को माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए 1TB तक बढ़ाया जा सकता है। यह एंड्राइड 11 पर काम करता है। इस टैब में MediaTek Helio P22 प्रोसेसर दिया गया है। 
पावर बैकअप के लिए इस टैब में 5,100mAh की दमदार बैटरी दी गई है, जो कि 15W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।