Chabahar Port: ईरान का चाबहार बंदरगाह भारत के लिए जरूरी, नई दिल्ली में ब्रिक्स मीटिंग के बाद ईरानी विदेश मंत्री ने क्यों कही ये बात?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की अगुवाई में ब्रिक्स का आयोजन हो रहा है। इस बैठक में वही देश के विदेश मंत्री शामिल हुए है, जो इसका हिस्सा है। इस संगठन का हिस्सा ईरान भी है। जिसमें वहां के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शिरकत की है। इस मीटिंग के खत्म होने के बाद अब्बास अराघची ने मीडिया से बातचीत करते हुए भारत से अपील की है, जिसमें कहा गया है कि वह चाबहार बंदरगाह पर अपना निवेश बंद नहीं करे। साथ ही कहा कि मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए बड़ी भूमिका अदा करे।
भारत को अमेरिका से मिली थी छूट
अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी, 2026 को युद्ध शुरु हुआ था, इस दौरान वॉशिंगटन ने तेहरान पर कई तरह की आर्थिक पाबंदियां लगाई है। लेकिन अमेरिका की तरफ से भारत को चाबहार बंदरगाह के लिए एक विशेष छूट दी थी, जो 26 अप्रैल, 2026 को समाप्त हो गई है। इसके बाद से भारत यह सोच-विचार कर रहा है कि वह उस पोर्ट पर काम को आगे बढ़ाएं या नहीं।
अमेरिकी प्रतिबंधों को स्वीकार
ईरानी विदेश मंत्री इस बंदरागाह को लेकर कहा कि यह भारत और ईरान के बीच सहयोग का सबसे बड़ा प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने इसे खड़ा करने में अहम भूमिका अदा की है। साथ ही खुशी जाहिर की है कि वहां पर भारतियों ने काम किया है। लेकिन उन्होंने इस बात को भी माना कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत के निवेश में कमी आई है। साथ ही उम्मीद जताई कि भारत आगे भी वहां पर काम जारी रखेगा।
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भारत के लिए सुनहरा दरवाजा
अब्बास अराघची का कहना है कि चाबहार बंदरगाह भारत के लिए एक सुनहरा दरवाजा हो सकता है। जिसके जरिए वह मध्य एशिया, काकेशस और यूरोप तक पहुंच सकता है। इसी प्रकार यूरोप और मिडिल ईस्ट के देश इसी रास्ते होकर हिंद महासागर तक जहाज पहुंचते हैं। उसके लिए एक बड़ा व्यापारिक मार्ग बन सकता है।
Created On :   15 May 2026 10:48 PM IST











