हमले की आंखों देखी!: अमेरिका के हमले में मारे गए थे ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई, अराघची ने बताई घटना की आंखों देखी, अपने नेता के साथ ही मौजूद थे विदेश मंत्री

अमेरिका के हमले में मारे गए थे ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई, अराघची ने बताई घटना की आंखों देखी, अपने नेता के साथ ही मौजूद थे विदेश मंत्री
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का एक बड़ा दावा सामने आया है। उन्होंने शुक्रवार को बताया कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी, 2026 को संयुक्त कार्रवाई की थी।

डिजिटल डेस्क, तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का एक बड़ा दावा सामने आया है। उन्होंने शुक्रवार को बताया कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी, 2026 को संयुक्त कार्रवाई की थी, इस दौरान वह ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के ऑफिस के पास ही थे। उन्होंने आगे बताया कि इस हमले को लेकर उनके मन में डर पैदा हो गया था कि खामेनेई की हालत कैसी है। इसके बाद उनके शव को मलबे से निकाला गया और 1 मार्च को इसकी पुष्टि की गई। हालांकि, इससे पहले अमेरिका ने दावा किया था कि ईरानी सुप्रीम लीडर की इस संयुक्त कार्रवाई में मौत हो गई है।

ईरानी विदेश मंत्री ने क्या बताया?

ईरानी मीडिया ने लेबनान में स्थित अल मायादीन टीवी के हवाले अब्बास अराघची का आंखों देखे हादसे के बारे में बताया। बकौल अराघची खामेनेई पर जब हमला हुआ तब वो उसी दफ्तर में मौजूद थे। हमला बहुत भयानक था, इसलिए उनके मन में एक ही सवाल बार बार आ रहा था कि उनके नेता का क्या हाल होगा।

हमले से पहले खामेनेई-अराघची की बातचीत

इस हमले के बाद उन्होंने बताया कि सुप्रीम लीडर के शव को मलबे से बाहर निकालने वाली कोशिश कर रहे थे। लेकिन सबको ये चिंता थी कि अब आगे क्या होगा। इस इंटरव्यू में अराघची ने बताया कि इससे पहले खामेनेई से किसी सुरक्षित जगह शिफ्ट होने पर बातचीत हुई थी। लेकिन उन्होंने साफ कह दिया था कि वो किसी सुरक्षित स्थान पर, जब तक नहीं जाएंगे, तब तक उनके देश की जनता के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं मिल जाती। उन्होंने ये भी कह दिया था कि देश की जनता के साथ जो भी होगा, वही उनके साथ भी होगा। यानी इस बातचीत को लेकर लगता है कि ईरान को अमेरिका और इजरायल के हमले की पहले की भनक लग चुकी थी।

तेहरान ने खाड़ी देशों का किया था विरोध

ईरानी विदेश मंत्री ने इस चर्चा के दौरान बताया कि तेहरान ने खाड़ी देशों की सरकारों का विरोध किया था कि वो अपनी जमीन अमेरिकी सेना को इस्तेमाल करने के लिए नहीं दे। इसी बात को वॉशिंगटन ने भी नजरअंदाज किया था। उन्होंने बताया कि ईरान ने इस हमले की जवाबी कार्रवाई की और अमेरिका और उसके सहयोगी देश इजरायल को चौंका दिया था।

Created On :   5 Jun 2026 7:27 PM IST

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