नेतन्याहू रहेंगे या जाएंगे?: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच इजराइल में बजा चुनावी बिगुल, केंडिडेट नहीं पार्टी को वोट देते हैं मतदाता, समझें भारत से कितना अलग है सरकार चुनने का तरीका

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच इजराइल में चुनाव की तारीख की घोषणा हो गई है। नेसेट के कानूनी सलाहकार सागिट अफिक ने रविवार को घोषणा की। उन्होंने कहा कि नेसेट 17 जुलाई को भंग हो जाएगी। इसके साथ ही चुनाव अपनी तय तारीख 27 अक्टूबर से कराए जाएंगे। यह इजरायली कानून के तहत सबसे आखिरी तारीख है। 27 अक्टूबर को इजरायल के वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की किस्मत का फैसला होगा। इजरायली मीडिया टाइम्स ऑफ इजरायल की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, अफिक ने नेसेट हाउस कमेटी की चर्चा के दौरान कहा, 'मौजूदा नेसेट अपना कार्यकाल पूरा करेगी और इसे जल्दी भंग नहीं किया जाएगा। चुनाव की तारीख कानून के अनुसार तय की गई है और यह 27 अक्टूबर ही रहेगी।' आज के एक्सप्लेनर में जानेंगे इजराइल की चुनावी प्रणाली के बारे में। साथ ही यहां पर कितने सालों के बाद चुनाव समय पर हो रहे हैं। साथ ही यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वर्तमान पीएम बेंजामिन नेतन्याहू फिर सत्ता में बरकरार रहते हैं या उनकी जगह इजराइल की जनता किसी नए नेतृत्व को चुनेंगी।
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38 साल बाद पहली बार तय समय पर हो रहे चुनाव
मालूम हो कि, साल 1988 के बाद इजराइल में चुनाव तय कार्यक्रम के मुताबिक कराए जाएंगे। इसके अलावा 53 साल में पहली बार कोई सरकार अपना पूरा कार्यकाल पूरा करने के बाद चुनाव में जाएगी।
यदि ऐसा होता है तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार 1973 के बाद पहली ऐसी इजराइली सरकार बन जाएगी। जो अपने पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा करेगी। वहीं, इजराइल में आम चुनाव की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब गठबंधन ने संसद भंग होने से पहले अपनी सबसे विवादित बिल पास कराने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। संसद भंग होने पर आम तौर पर कानून तब तक नहीं बनते जब तक गठबंधन और विपक्ष दोनों सहमत न हों। बता दें, इजरायल की 37वीं मौजूदा सरकार 29 दिसंबर, 2022 को नफ्ताली बेनेट-यायर लैपिड सरकार के गिरने के बाद बनी थी।
सरकार गिराने की मिली थी धमकी
बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली मौजूदा गठबंधन सरकार, जिसमें लिकुड, कई अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स और दक्षिणपंथी दल शामिल हैं। जिन्हें व्यापक रूप से इजरायल के इतिहास की सबसे कट्टरपंथी सरकारों में से एक माना जाता है। नेतन्याहू की सरकार के लिए हाल का समय काफी मुश्किल भरा रहा। कई बार ऐसे हालात बने, जब लगा कि इजरायली सरकार में टकराव होगा। हमास के साथ बंधक-सीजफायर डील के विरोध में, गाजा में युद्ध के दौरान कट्टर दक्षिणपंथी पार्टियों ने कई मौकों पर सरकार गिराने की धमकी दी। हालांकि, अब तक इजरायली सरकार एक साथ आगे बढ़ रही है।
इजरायली मीडिया ने बताया कि पोल के मुताबिक, अगर आज चुनाव हुए तो नेतन्याहू और उनके साथी 120 सीटों वाली नेसेट में बहुमत से काफी पीछे रह जाएंगे। वहीं, विपक्षी गुट खुद बहुमत के किनारे पर डगमगा रहा है। नेतन्याहू के खिलाफ इस गठबंधन में अरब-बहुमत वाली और अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियां शामिल नहीं हैं।
बता दें, इजरायल की राजनीति लंबे समय से अस्थिर रही है। आमतौर पर यहां गठबंधन टूटने, बहुमत खोने या राजनीतिक संकट के चलते समय से पहले चुनाव कराए गए हैं। लेकिन, इस बार हालात अलग हैं। इजराइल की वर्तमान सरकार अपना पूरा कार्यकाल पूरा करने के बाद चुनाव में उतर रही है। इजराइरल में ऐसा 53 साल बाद हो रहा है।
पीएम बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह चुनाव लड़ेंगे। उनका कहना है कि वह ऐसी राष्ट्रीय सरकार बनाना चाहते हैं, जो सिर्फ किसी एक विचारधारा पर आधारित न हो। चुनाव प्रचार में उनका फोकस सुरक्षा के मुद्दों पर रहेगा। खासकर ईरान और लेबनान के हिजबुल्लाह के खिलाफ चलाए गए सैन्य अभियानों को वह जनता के सामने प्रमुख मुद्दे के रूप में रख सकते हैं।
पिछले हफ्ते इजराइली चैनल 12 न्यूज के सर्वे में पीएम नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और गादी आइजनकोट की पार्टी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली थी। 120 सदस्यीय संसद में दोनों पार्टियों को 23-23 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया। इससे साफ है कि मुकाबला आसान नहीं रहने वाला।
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जानें इजराइल की चुनावी प्रणाली
बता दें, इजराइल में संसद यानी नेसेट की 120 सीटों के लिए हर चार साल में चुनाव कराए जाते हैं। लेकिन, किसी सरकार का पूरा कार्यकाल तय नहीं माना जाता। अगर सरकार संसद का विश्वास खो दे या बहुमत खत्म हो जाए या संसद खुद को भंग करने का फैसला कर ले। तब ऐसी स्थिति में समय से पहले भी चुनाव कराए जा सकते हैं। यहां आनुपातिक प्रतिनिधित्व (Proportional Representation) प्रणाली लागू है। मतदाता किसी एक उम्मीदवार के बजाय राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं। जिस पार्टी को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी अनुपात में उसे संसद में सीटें मिलती हैं। बाद में बहुमत जुटाकर सरकार बनाई जाती है।
इसे ऐसे समझ सकते हैं, अगर किसी पार्टी को 10 फीसदी वोट हासिल होते हैं तो उसे 120 सीटों (120 का 10 फीसदी=12) में से 12 सीटें मिलती हैं। इजरायल की संसद नेसेट में सीट हासिल करने के लिए कुल मतदान का न्यूनतम 3.25 फीसदी मत हासिल करना जरूरी है। अगर कोई पार्टी इससे कम मत हासिल करती है तो उसे नेसेट में सीटें नहीं मिलती हैं।
क्यों खास है इस बार का चुनाव
बता दें, यह चुनाव ऐसे समय हो रहा है, जब इजरायल कई बड़े सुरक्षा और राजनीतिक मुद्दों के दौर से गुजर रहा है। बीते कुछ समय में इजराइल ने हमास, हिजबुल्लाह और ईरान से जुड़े संघर्ष देखे हैं। ऐसे में नई सरकार की नीतियों का असर गाजा, वेस्ट बैंक और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी पड़ सकता है। लिहाजा, 27 अक्टूबर का चुनाव सिर्फ इजरायल ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों की नजर में भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Created On :   14 July 2026 8:22 PM IST











