US-Iran War: किसकी बदौलत ईरान अमेरिका जैसी सुपरपावर को टक्कर दे रहा, पर्दे के पीछे रहकर रूस कर दे रहा मदद, जाने कैसे?

किसकी बदौलत ईरान अमेरिका जैसी सुपरपावर को टक्कर दे रहा, पर्दे के पीछे रहकर रूस कर दे रहा मदद, जाने कैसे?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग को 14 दिन हो चुके हैं। तीनों पक्षों की ओर से हमले लगातार हो रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके दोस्त बेंजामिन नेतन्याहू लगातार तेहरान सहित कई शहरों पर हमला कर रहे हैं। दूसरी तरफ ईरान पूरी ताकत के साथ लड़ रहा है गल्फ देशों (खाड़ी देश) में स्थित अमेरिका के सैन्य ठिकानों को तबाह कर रहा है। एक बड़े स्तर पर यूएने के ठिकानों को निशाना बना रहा है। ऐसे इस बात की सुगबुगाहट तेज हो गई है कि क्या रूस अपने दोस्त ईरान की पर्दे के पीछे रहकर उसकी मदद कर रहा है। जिसकी बदौलत वह अमेरिका जैसी सुपरपावर को टक्कर दे रहा है।

बता दें, रूस और यूक्रेन जंग जब शुरू हुई थी तब ईरान ने पुतिन की मदद की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यही वजह है मॉस्को उस मदद का किसी न किसी रूप में अपने दोस्त का कर्ज चुका रहा है। रूस अपने इस दांव से तीन बड़ी ताकतों को (अमेरिका, इजरायल और यूक्रेन) को साथ रहा है। इन देशों को वह धीरे-धीरे कमजोर कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी ने कहा कि पुतिन अपने साथी ईरान के द्वारा ली गई ममद का कर्ज उतार रहे हैं।

जंग में रूस की क्या भूमिका?

चेलानी ने एक्स पर लिखा, "यूक्रेन जंग के शुरूआती सालों में ईरान ने रूस की बड़ी मदद की थी। उसने 50 हजार से ज्यादा शाहिद ड्रोन रूस को दिए थे। यह रूसी सेना के हथियार के जखीरे में एक बड़ा जानलेवा इजाफा साबित हुआ। इसलिए इस बात पर कोई किन्तु परंतु नहीं कि आज रूस, अमेरिका और इजरायल की आक्रामक चाल का मुकाबला करने में ईरान की मदद न कर रहा हो। मॉस्को का मुख्य उद्देश्य शायद दुश्मन को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना होगा। मतलब अमेरिका को मध्य पूर्व में अपने गोला बारूद और संसाधनों को खर्च करने पर एक तरह से मजबूर कर रहा है। क्योंकि ट्रंप इन हथियारों का रूस के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए यूक्रेन को दे सकते थे।" मॉस्कों तीनों सूरमाओं को चोट भी पहुंचा रहा है और ईरान का एक तरह से कर्ज भी चुकता कर रहा है।

दुनिया की रणनीतिक समीकरण

ईरान अभी तक आत्मघाती ड्रोन को उस तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाया है जैसे उसे करना चाहिए। राजनीतिक सलाहकारों का कहना है कि अगर रूस अपना अनुभव ईरान को देता है तो यह सोने पर सुहागा हो सकता है। अगर मॉस्को और ईरान के बीच सैन्य सहयोग बढ़ता है तो यह जंग केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह विश्व स्तरीय हो सकती है। इससे दुनिया की शक्ति संतुलन पर भी बड़ा असर पड़ेगा। आने वाले दिनों यह देखना बहुत महत्वपूर्ण होगा कि क्या पुतिन वास्तव में ईरान की मदद करने के लिए आगे आते हैं या फिर केवल कूटनीतिक समर्थन तक ही सीमित रहते हैं।

Created On :   13 March 2026 10:43 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story