France Student Protest: छोटे से स्कूल से शुरू हुए आंदोनल की पूरे देश में फैली आग, जानें क्यों फ्रांस की सड़कों पर उतरे गुस्साए छात्र?

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। फ्रांस की राजधानी पेरिस में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सितंबर में शुरू हुआ आंदोलन अब पूरे देश में फैल गया है। स्कूलों में बढ़ती भीड़, अव्यवस्था और शिक्षकों की कमी को लेकर छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शन के दौरान देश में अलग-अलग जगहों पर पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हुई। लेंस शहर में एक स्कूल के पास हुए धमाके में 15 साल के एक छात्र बुरी तरह जख्मी हो गया। वहीं एक अन्य छात्र सिर में आंसू गैस का गोला लगने की खबर सामने आई। उसके जबड़े में दो जगह फ्रैक्टर होने की खबर सामने आई है।
5 हजार लोगों की गिरफ्तारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आंदोलन में अभी तक 190 छात्र घायल हुए हैं। वहीं पुलिस ने करीब 5 हजार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 85 फीसदी छात्र नाबालिग हैं।
यूनियन सिंडिकेल लिसेन समेत अन्य छात्र संगठनों ने लोगों से मंगलवार यानि आज होने वाले आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी। उनके अलावा कई शिक्षक संगठनों ने आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उनके मुकाबले कक्षाएं, शिक्षक और दूसरी सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई हैं।
क्या बोली सरकार?
आंदोलन के बीच फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने छात्रों और शिक्षकों की समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने का ऐलान किया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि हिंसक प्रदर्शन पर सरकार की ओर से कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। देश के शिक्षा मंत्री एडुआर जॉफ्रे ने बताया कि आंदोलन शुरू होने के बाद से अभी तक 24 स्कूलों में जमकर तोड़फोड़ की गई, उन्हें आग के हवाले कर दिया गया।
कब शुरू हुआ आंदोलन?
इस आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के एक स्कूल से हुई थी। छात्रों की मांग थी कि स्कूल में स्टाफ और संसाधनों की कमी दूर की जाए। छात्रों की ये मांग पूरी होने के बाद उन्होंने हड़ताल खत्म कर दी, लेकिन तब तक आंदोलन दूसरे इलाके में पहुंच गया। स्कूल से शुरू हुआ ये आंदोलन धीरे-धीरे कॉलेज और यूनिवर्सिटी तक पहुंच गया।
बता दें कि पिछले दो दशक में फ्रांस के माध्यमिक स्कूलों में छात्रों के मुकाबले शिक्षकों की संख्या कम हुई है। छात्र करीब ढाई लाख बढ़े हैं, जबकि इस बढ़ोतरी के अनुसार स्कूलों में शिक्षकों की संख्या नहीं बढ़ी है।
दरअसल, फ्रांस में साल 2010 में करीब साढ़े 8 लाख बच्चे पैदा हुए, जो कि 1980 दशक के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा था। बच्चों के जन्म में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण 30 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में बढ़ी प्रजनन दर थी। 2010 में पैदा हुए बच्चे अब 15-16 साल के हो चुके हैं और हाई स्कूल में पढ़ रहे हैं। लेकिन, छात्रों की संख्या बढ़ने के मुकाबले स्कूलों में कक्षाएं, सुविधाएं और शिक्षकों की संख्या में अनुपात में बढ़त नहीं हुई है।
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विरोध केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं
फ्रांस में इस समय विरोध केवल शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति पर ही नहीं हो रहा है। बल्कि सरकारी कर्मचारी, फायर फाइटर, शिक्षक और स्वास्थ्य कर्मी भी सैलरी में बढ़ोतरी समेत अपनी अलग-अलगा मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
क्यों बिगड़े हालात
फ्रांस इस समय ईरान और यूक्रेन युद्ध की वजह से बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। उस पर करीब 4 ट्रिलियन डॉलर का सरकारी कर्ज है। यह देश की सालाना अर्थव्यवस्था के करीब 119% के बराबर है। फ्रांस की आबादी बूढ़ी हो रही है, जिस वजह से पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च लगातार बढ़ रहा है।
Created On :   6 Oct 2026 4:00 PM IST












