हेल्थ प्रोडक्ट्स की भीड़ में AttaVita की एंट्री: फोर्टिफिकेशन पर नई बहस

आज बाजार में हेल्थ प्रोडक्ट्स की भरमार है। हर शेल्फ पर 'इम्युनिटी', 'एनर्जी', 'मल्टीविटामिन' जैसे दावे दिखाई देते हैं। लेकिन इतने विकल्प होने के बावजूद एक सवाल अब भी बना हुआ है। क्या हम सच में संतुलित पोषण ले पा रहे हैं?
भारत में माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी एक बड़ी वास्तविकता है। आयरन, विटामिन B12, कैल्शियम और ज़िंक जैसी कमियां बड़ी आबादी को प्रभावित कर रही हैं। एनीमिया के आंकड़े लगातार चिंता जताते हैं। शहरी जीवनशैली, प्रोसेस्ड फूड और अनियमित खान-पान ने इस अंतर को और बढ़ाया है। पेट भर जाता है, लेकिन शरीर को रोज़ जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते।
गोलियां बढ़ीं, लेकिन संतुलन नहीं
जागरूकता बढ़ी तो सप्लीमेंट्स का चलन भी बढ़ा। आयरन टैबलेट, कैल्शियम, मल्टीविटामिन। लेकिन शरीर की जरूरत हर दिन एक जैसी नहीं होती। उम्र, काम, तनाव और गतिविधियों के हिसाब से पोषण की मात्रा बदलती रहती है। बिना समझे नियमित सप्लीमेंट लेना हमेशा संतुलित समाधान नहीं माना जाता।
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि बेहतर तरीका यह है कि रोज़ के खाने को ही मजबूत बनाया जाए।
दुनिया में पुराना मॉडल, भारत में नई चर्चा
अमेरिका और कई यूरोपीय देशों में दशकों से आटे और अन्य खाद्य पदार्थों में आयरन और फोलिक एसिड मिलाए जाते रहे हैं। इसका उद्देश्य था बड़ी आबादी में छिपी पोषण की कमी को कम करना। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य का स्थापित तरीका रहा है।
भारत में फोर्टिफाइड नमक और चावल जैसे कदम उठाए गए हैं, लेकिन घरेलू स्तर पर आटे में संतुलित माइक्रोन्यूट्रिएंट मिलाने की सोच अभी नई है।
इसी पृष्ठभूमि में AttaVita का माइक्रोन्यूट्रिएंट प्रीमिक्स लॉन्च हो रहा है।
रसोई से शुरू होने वाला बदलाव
यह प्रीमिक्स सीधे आटे में मिलाया जाता है। अलग से गोली लेने की जरूरत नहीं। रोटी, पराठा, ब्रेड या किसी भी आटे से बनी डिश में इसे मिलाया जा सकता है। यह स्वादहीन है, इसलिए खाने के स्वाद में बदलाव नहीं आता। यह हीट-स्टेबल है, यानी पकाने के बाद भी इसके पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। इसमें पाँच मुख्य पोषक तत्व शामिल हैं:
ज़िंक इम्युनिटी मजबूत करता है।
आयरन थकान और एनीमिया के जोखिम को कम करने में सहायक है।
कैल्शियम हड्डियों और दांतों के लिए जरूरी है।
विटामिन B9 रक्त निर्माण में मदद करता है।
विटामिन B12 नसों के सही कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है।
कंपनी का कहना है कि इन पोषक तत्वों को संतुलित मात्रा में शामिल किया गया है ताकि नियमित उपयोग में शरीर को स्थिर समर्थन मिल सके।
केवल दावा नहीं, संरचना भी अहम
फोर्टिफिकेशन सिर्फ पोषक तत्व जोड़ देने का नाम नहीं है। यह वैज्ञानिक संतुलन का विषय है। मात्रा, स्थिरता और अवशोषण जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे उत्पादों के पीछे शोध और संरचना की भूमिका अहम मानी जाती है।
AttaVita के अनुसार, यह प्रीमिक्स नियमित घरेलू उपयोग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
परिवार के स्तर पर सोच
एक सैशे पूरे परिवार के लिए एक दिन के लिए पर्याप्त बताया गया है। इसे सुबह, दोपहर या रात जब भी आटा या बैटर तैयार किया जाए, मिलाया जा सकता है। लगभग 1500 रुपये प्रति माह के खर्च में पूरा परिवार माइक्रोन्यूट्रिएंट सपोर्ट पा सकता है। हेल्थ बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन असली बदलाव वहीं होगा जहां समाधान आदत का हिस्सा बन जाए। फोर्टिफिकेशन कोई नया ट्रेंड नहीं, बल्कि लंबे समय से अपनाया गया तरीका है।
अब सवाल यह है कि क्या भारत में भी रोज़ की रसोई से पोषण की यह नई चर्चा आगे बढ़ेगी।
Created On :   4 May 2026 1:42 PM IST












