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दूध के साथ इन 5 चीज़ों का नहीं करें सेवन, बिगड़ सकती हैं तबीयत

दूध के साथ इन 5 चीज़ों का नहीं करें सेवन, बिगड़ सकती हैं तबीयत

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। दूध आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार, कुछ ऐसे फूट आइटम्स हैं, जिन्हें दूध के साथ खाने पर आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। दूध में कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, विटामिन डी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो आपकी हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ ही इम्यूनिटी बूस्टर का काम करता है। साथ ही डिप्रेशन और कैंसर से भी बचाने में मदद करता है। 

दूध और दही 

Top 8 ways to include more curd in your diet | India.com

अगर आप दूध और दही का सेवन एक साथ करते हैं तो ये बिल्कुल गलत हैं क्योंकि इन दोनों को कभी भी एक साथ नहीं खाना चाहिए वरना एसिडिटी, पेट में गैस और उल्टी की समस्या हो सकती है। इसके अलावा आपको सर्दी-खांसी और गला खराब होने की भी दिक्कत आ सकती है।

दूध और खट्टे फल

HD wallpaper: milk drink surrounded by assorted fruits, juices, table, orange | Wallpaper Flare

कभी भी दूध पीने के तुरंत बाद या पहले खट्टे फलों का सेवन बिल्कुल भी न करें, क्योंकि ऐसा करने से आपके पेट में ज्यादा एसिड बनता हैं, जिससे उल्टी और स्किन संबंधी बीमारी होने की संभावना रहती है।

दूध और केला

जानिए: दूध के साथ केला खाने से होते है हैरान कर देने वाले फायदे… – Live Halchal

ज्यादातर लोगों को बनाना मिल्क शेक काफी पसंद होता हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि,आयुर्वेद के अनुसार, केले और दूध का सेवन करने से शरीर में विषैले तत्व पैदा हो सकते हैं जिससे पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है।

दूध और मछली

Eating fish and dairy together at the same meal is toxic | Nutrition Myth Busters | Nestle Family

दूध और मछली का सेवन भूल कर भी नहीं करना चाहिए क्योंकि, मछली की तासीर गर्म होती है और दूध की तासीर ठंडी। यही वजह हैं कि, दो विपरित प्रभाव वाली चीजों को एक साथ खाने से शरीर को नुकसान हो सकता है। बता दें कि, मछली खाकर दूध पीने से पेट में दर्द और फूड पॉयजनिंग और चर्म रोग का खतरा बढ़ जाता है।

दूध और करेला,भिंडी, कटहल

Foods to avoid with milk: दूध के साथ किन चीजों को खाने से बिगड़ सकती है तबीयत, यहां जानें

करेला, भिंडी और कटहल ये ऐसी सब्जियां हैं,जिन्हें खाने के बाद की सब्जी खाने के बाद कभी भी दूध नहीं पीना चाहिए। ऐसा करने से शरीर में इंफेक्शन, एग्जिमा और पाचन से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।