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जानिए क्या हैं मानसून 2018 के फैशन ट्रेंड्स ?

September 06th, 2018 10:15 IST


डिजिटल डेस्क । मानसून की आमद के साथ ही रेनी सीजन शुरू हो चुका है अब इसमें नए फैशन ट्रेंड्स और न्यू लुक्स की डिमांड बढ़ेगी। इस मौसम में लोग अक्सर नए तरीके अपनाते हैं। कुछ अच्छा और अलग दिखने के लिए। युवाओं को यह सीजन बहुत पसंद होता है। फैशन को पूरी तरह से फॉलो करने वालों के लिए काफी अच्छा मौसम माना जाता है। कई लोग इसमें ब्राइट कलर्स को ट्राय करना पसंद करते हैं और कुछ नए और डिफरेंट स्टाइल ट्राय करना पसंद करते है। आइए हम आपको बताते है इस साल के नए फैशन ट्रेंड्स के बारे में :
  

ट्रेंड में है ट्रेंचकोट और शॉर्ट्स

-बारिश के मौसम में ऐसी ड्रेस ट्रेंड में होती है जो आसानी से कैरी की जा सके।

-तो ऐसे में शॉर्ट्स, मिनी स्कर्ट और ट्रेंचकोट काफी चलन में होता है।  

-इसी कम्फर्ट के कारण घुटनो तक लम्बे ट्रेंच कोट चालू किये गए है। 

-ये गर्ल्स को बहुत पसंद आ रहे हैं। 

-मानसून में कॉटन और लाइका से बने ट्रेंच कोट मार्केट में काफी चलते हैं। 

-ट्रेंचकट में डॉट प्रिंट और फ्लावर प्रिंट काफी चलन में हैं। 

-ऑफिस जाने वाली लेडीज भी इसमें प्लेन कलर्स पसंद करती हैं। 

-हर रंग में उपलब्ध ट्रेंचकट सबकी पसंद बनते जा रहे हैं। 

एक्सेसरीज भी हो ट्रेंडी 

-बारिश के मौसम में आप अपने ऊपर डिफरेंट तरह की एक्सेसरीज को ट्राय कर सकती हैं और ट्रेंडी और अच्छा दिखने के लिए। बारिश के मौसम में लोगो को इन सब की जानकारी होनी चाहिए। इन एक्सेसरीज में सबसे ज्यादा इस्तमाल हैंड बैग्स का होता है। कपडे, जुट, कॉर्डराय और रैग्जीन से बने हैंडबैग ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। प्लेन हैंडबैग के बजाय प्रिंटेड बैग्स ज्यादा पसंद किये जाते है। ब्लैक और ब्राउन कलर के बजाय येलो और रेड कलर के बैग्स ज्यादा ट्रेंड में है। अभी स्टाइलिश ड्रेस के साथ बेल्ट भी पसंद किया जा रहा है। कलरफुल और प्रिंटेड बेल्ट्स ज्यादा पसंद किये जा रहे हैं।   

ट्रेंडी हेयर स्टाइल 

-बदलते मसम में बालो का झड़ना, टूटना और रुखा होना बेहद आम बात है। और हुम बालों को ले कर बहुत चिंतित हो जाते है। बालों की हालत बदलते मौसम के साथ साथ ठीक होने लगती है। बारिश के मौसम में बालों का खास ध्यान रखना चाहिए। इस मौसम में सबसे बड़ी समस्या ये होती है की हेयर स्टाइल कौनसी बनाई जाये, हलाकि -ये समस्या लड़कियों को ज्यादा रहती है बजाय लड़को के। बाल लांबे हो तो पोनी टेल बना ले या चोटी गूथ कर कुछ नई स्टाइल बना लें। इन हेयर स्टाइल से इस मौसम में होने वाले बालों के नुकसान से बचा जा सकता है। 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।