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रनिंग करते समय कैसे ब्रीथ की शॉर्टनेस को कर सकते हैं कम, जानिए टिप्स

रनिंग करते समय कैसे ब्रीथ की शॉर्टनेस को कर सकते हैं कम, जानिए टिप्स

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रनिंग करना एक इंटेंस फिजिकल एक्टिविटी है जिसमें हमारी मांसपेशियों को बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। हमारे शरीर में अधिक कार्बन डाइऑक्साइड का उत्पादन होता है, जिसे अधिक ऑक्सीजन के साथ बदलने की आवश्यकता होती है। यह अतिरिक्त सांस लेना और सांस छोड़ना सांस की तकलीफ पैदा कर सकता है। नीचे दिए गए सुझाव दौड़ने के दौरान सांस की तकलीफ को कम करने में मदद करने के सुझाव हैं।

वॉर्म अप
हमारे शरीर की गर्मी बढ़ाने से हमें अपनी मांसपेशियों और टिशू में ब्ल्ड फ्लो को बढ़ाने में मदद मिलती है। जब तक हम दौड़ना शुरू करते हैं, तब तक हमारी मांसपेशियां शारीरिक परिश्रम से निपटने के लिए तैयार हो जाती हैं। जॉगिंग या रनिंग शुरू करने से पहले कुछ हल्की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज काफी है।

शॉर्ट ब्रेक
दौड़ते समय कुछ छोटे ब्रेक लेने से हमें काफी मदद मिलती है। छोटे ब्रेक सांस को नॉर्मल करते हैं और सांस की शॉर्टनेस को रोकने में मदद करते हैं। दोड़ने के दौरान अपनी स्पीड को थोड़ा धीमा कर लेने से भी आपको मदद मिली है।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज
ब्रीदिंग एक्सरसाइज फेफड़ों और हृदय को उनकी क्षमता बढ़ाने में मदद करती हैं। यहां हम आपको एक सामान्य ब्रीदिंग एक्सरसाइज बता रहे हैं जिसे कोई भी कर सकता है। सबसे पहले नाक के माध्यम से धीरे-धीरे सांस लीजिए। सांस को 10 सेकंड के लिए रोककर रखें और फिर मुंह से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। अगर आपको लंबे समय तक ब्रीद शॉर्टनेस की समस्या बनी रहती है तो ये किसी बीमारी का लक्षण भी हो सकती है। ऐसे मामलों में आपको किसी चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

मेडिकल इश्यू
स्टडी के अनुसार, हाई-इंटेनसिटी वाली एक्सरसाइज अस्थमा संबंधी स्थिति का कारण बन सकते हैं जिन्हें ब्रोन्कियल हाइपररिस्पॉन्सिव के रूप में जाना जाता है। यह स्थिति एक्सरसाइज के बाद वायु मार्ग के रुकावट का कारण बनती है। एक्सरसाइज शुरू करने से पहले मरीजों को ब्रोन्कोडायलेटर्स की आवश्यकता होगी। दौड़ने के दौरान अगर आपको सांस की तकलीफ, खांसी और कफ होता है तो आपको डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। इस तरह के लक्षण फेफड़ों से संबंधित बीमारी के हो सकते हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।