comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

दिल्ली में दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या को बीजेपी ने बनाया मुद्दा, 1 करोड़ मुआवजे की मांग

October 10th, 2020 17:02 IST
 दिल्ली में दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या को बीजेपी ने बनाया मुद्दा, 1 करोड़ मुआवजे की मांग

हाईलाइट

  • दिल्ली में दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या को बीजेपी ने बनाया मुद्दा, 1 करोड़ मुआवजे की मांग

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर(आईएएनएस)। दिल्ली के आदर्श नगर में दूसरे समुदाय की युवती से प्रेम प्रसंग के मामले में 18 वर्षीय दलित युवक राहुल की हत्या पर बीजेपी मुखर हो गई है। भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने शनिवार को पीड़ित परिवार से मुलाकात कर केजरीवाल सरकार से एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की। भाजपा ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर दोषियों को जल्द से जल्द सजा देने की मांग की है। आदर्श नगर में राहुल की बुधवार की शाम हत्या हुई थी।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने राहुल की हत्या की तुलना वर्ष 2019 में हुए अंकित सक्सेना मर्डर से की है। उस वक्त भी दूसरे समुदाय के लोगों ने प्रेम प्रसंग के मामले में अंकित सक्सेना पर हमला कर मौत के घाट उतार दिया था। परिवार से मिलने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने कहा, आदर्श नगर में राहुल के पीड़ित परिवार से मिला और परिवार को न्याय दिलवाने का भरोसा दिलाया। मैं मुख्यमंत्री केजरीवाल से मांग करता हूं कि वह पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दें और मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराकर दोषियों को शीघ्र सजा दिलाएं।

प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने कहा कि, दलित युवक राहुल को एक विशेष समुदाय के लोगों ने मार-मार कर अधमरा कर दिया और बाद में उसकी अस्पताल में मृत्य हो गई। तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले मुख्यमंत्री अभी तक मौन धारण किये हुए हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल पीड़ित के परीवार को अविलंब मुआवजा दें।

आदेश कुमार गुप्ता ने कहा कि, 2018 में अंकित सक्सेना के साथ भी ऐसे हुआ था। उस घटना को फिर दोहराया गया। हाथरस की घटना में दलितों को न्याय दिलाने के नाम पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के लोग कैंडल मार्च निकाल रहे थे। लेकिन राजधानी दिल्ली में दलित राहुल की हत्या पर खामोशी है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समुदाय विशेष की तुष्टीकरण कर रही हैं।

एनएनएम/एएनएम

कमेंट करें
z3yQb
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।