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वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का निधन, पत्रकारिता के क्षेत्र में दिया था अहम योगदान

August 23rd, 2018 14:57 IST
वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का निधन, पत्रकारिता के क्षेत्र में दिया था अहम योगदान

हाईलाइट

  • देश के वरिष्ठ पत्रकार और राज्यसभा सांसद कुलदीप नैयर का निधन
  • पिछले कुछ समय आईसीयू में थे भर्ती
  • पत्रकारिता के क्षेत्र में नैयर ने दिया था अहम योगदान

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व राज्यसभा सांसद कुलदीप नैयर का 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। कुलदीप नैयर ने बुधवार रात दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत खराब चल रही ​थी, वह तीन दिनों से आईसीयू में भर्ती थे। बुधवार रात करीब साढ़े बारह बजे नैयर ने अंतिम सांस ली। आज दोपहर एक बजे लोधी रोड पर स्थित विश्राम घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

पीएम मोदी दी नैयर को श्रद्धांजलि

कुलदीप नैयर का जन्म 14 अगस्त 1924, सियालकोट पाकिस्तान में हुआ था। उन्होंने अमेरिका से पत्रकारिता की डिग्री ली थी। कुलदीप नैयर ने भारत सरकार के प्रेस सूचना अधिकारी के पद पर कई वर्षों तक कार्य करने के बाद वे यूएनआई, पीआईबी, ‘द स्टैट्समैन', ‘इण्डियन एक्सप्रेस' के साथ लम्बे समय तक काम किया। वे पच्चीस वर्षों तक ‘द टाइम्स' लन्दन के संवाददाता भी रहे। कुलदीप नैयर ने अपने करियर की शुरूआत ऊर्दू प्रेस से की थी। वह 1996 में संयुक्त राष्ट्र के लिए भारत के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य थे। 1990 में उन्हें ग्रेट ब्रिटेन में उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था, अगस्त 1997 में राज्यसभा में नामांकित किया गया था। अपने जीवन काल में लेखक और पत्रकार कुलदीप नैयर ने करीब 15 किताबें भी लिखी। जिनमें ‘द जजमेंट: इन्साइड स्टोरी आॅफ इमरजेंसी इन इंडिया’, ‘वॉल ऐट वाघा – इंडिया पाकिस्तान रिलेशंस’, ‘डिस्टेंट नेबर्स: अ टेल ऑफ द सबकॉन्टिनेंट’, ‘बियॉन्ड द लाइंस’, ‘इंडिया आफ्टर नेहरू’, ‘सप्रेशन आॅफ जजेस’, ‘विदाउट फीयर: द लाइफ एंड ट्रायल ऑफ भगत सिंह’ और ‘इमरजेंसी रिटोल्ड’ सबसे ज्यादा चर्चित रही। 

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक का काउंटडाउन शुरु हो चुका हैं। 23 जुलाई से शुरु होने जा रहे एथलेटिक्स त्यौहार में भारतीय दल इस बार 120 खिलाड़ियों के साथ 18 खेलों में दावेदारी पेश करेगा। बता दें 81 खिलाड़ियों के लिए यह पहला ओलंपिक होगा। 120 सदस्यों के इस दल में मात्र दो ही खिलाड़ी ओलंपिक पदक विजेता हैं। पी.वी सिंधू ने 2016 रियो ओलंपिक में सिल्वर तो वहीं मैराकॉम ने 2012 लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था।

भारत पहली बार फेंनसिग में चुनौता पेश करेगा। चेन्नई की भवानी देवी पदक की दावेदारी पेश करेंगी। भारत 20 साल के बाद घुड़सवारी में वापसी कर रहा है, बेंगलुरु के फवाद मिर्जा तीसरे ऐसे घुड़सवार हैं जो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। 

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युवा कंधो पर दारोमदार

टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने जा रहे भारतीय दल में अधिकतर खिलाड़ी युवा हैं। 120 खिलाड़ियों में से 103 खिलाड़ी 30 से भी कम आयु के हैं। मात्र 17 खिलाड़ी ही 30 से ज्यादा उम्र के होंगे। 

भारतीय दल में 18-25 के बीच 55, 26-30 के बीच 48, 31-35 के बीच 10 तो वहीं 35+ उम्र के 7 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इस लिस्ट में सबसे युवा 18 साल के दिव्यांश सिंह पंवार हैं, जो शूटिंग में चुनौता पेश करेंगे, तो वहीं सबसे उम्रदराज 45 साल के मेराज अहमद खान होंगे जो शूटिंग में ही पदक के लिए भी दावेदार हैं।