Vinod Tawde Political Profile: बीजेपी ने जिस नेता को किया था दरकिनार, अब यूपी में उसके ही सहारे, बिहार और हरियाणा में दिखा चुके कमाल, विनोद तावड़े के 'कमबैक' की इनसाइड स्टोरी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में साल 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है। यह जिम्मेदारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उत्तर प्रदेश देश की राजनीति में सबसे अहम राज्यों में से एक गिना जाता है। विनोद तावड़े के सामने अब संगठन को काफी मजबूत करने, नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बढ़ाने और चुनाव की तैयारी को जमीन तक पहुंचाने की चुनौती होगी। इसमें खास बात यह है कि कुछ साल पहले तक तावड़े को महाराष्ट्र की राजनीति में किनारे किए जाने की चर्चा तेज थी लेकिन उन्होंने हार मानने की जगह संगठन के साथ काम करना जारी रखा था और धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी जगह मजबूत कर ली थी। बिहार में मिली सफलता के बाद अब बीजेपी ने उन पर उत्तर प्रदेश को लेकर भी भरोसा जताया है।
मुंबई से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर
बता दें, विनोद तावड़े का जन्म 20 जुलाई 1963 को मुंबई के गिरगांव इलाके में हुआ था। पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव राजनीति और सामाजिक काम की तरफ बढ़ने लगा था। वह छात्र संगठन से जुड़े और धीरे-धीरे संगठन के काम में एक्टिव होते रहे। उनका रिश्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी पुराना रहा है। छात्र संगठन में काम करते हुए उन्होंने युवाओं के बीच अपनी पकड़ बनाई थी और यही दौर उनके राजनीतिक जीवन की असली पाठशाला बना। वह बड़े नेताओं के साथ काम करते हुए संगठन चलाने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और चुनाव के समय जमीनी स्तर पर काम करने की बारीकियां सीखते गए और समय के साथ पार्टी ने उन्हें महाराष्ट्र में कई अहम जिम्मेदारियां दीं। साल 1995 में वह महाराष्ट्र भाजपा के महासचिव बने और इसके बाद मुंबई भाजपा की कमान भी उन्हें मिली। ऐसा बताया जाता है कि इस पद तक पहुंचने वाले वह कम उम्र के नेताओं में शामिल थे।
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विधान परिषद से विधानसभा और फिर मंत्री पद
वर्ष 2002 में तावड़े महाराष्ट्र विधान परिषद पहुंचे और बाद में वह विधान परिषद में विपक्ष के नेता भी बने। इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ कई मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया और राज्य की राजनीति में अपनी पहचान बनाई। साल 2014 में भाजपा ने उन्हें बोरीवली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया और वह चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार बनी और तावड़े को कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली है। वह स्कूली शिक्षा, उच्च और तकनीकी शिक्षा और संस्कृति जैसे विभागों के मंत्री रहे। इस दौरान वह महाराष्ट्र सरकार के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए और उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ता गया। ऐसा लग रहा था कि आगे भी उन्हें बड़ी भूमिका मिलती रहेगी। लेकिन साल 2019 में अचानक उनका विधानसभा टिकट काट दिया गया और इस फैसले ने सबको चौंका दिया था। तावड़े को लेकर यह चर्चा शुरू हो गई कि शायद अब उनकी सक्रिय राजनीति का दौर खत्म हो गया है।
टिकट कटने के बाद नहीं जताई खुलकर नाराजगी
साल 2019 का समय तावड़े के लिए आसान नहीं था। सत्ता में रहने के बाद भी अचानक चुनाव से टिकट नहीं मिला लेकिन तावड़े ने सार्वजनिक तौर पर बगावत या नाराजगी का रास्ता नहीं चुना। उन्होंने पार्टी के साथ काम जारी रखा और यही बात आगे चलकर उनके लिए फायदेमंद साबित हुई। साल 2020 में उन्हें पार्टी में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी मिली और वह दिल्ली की राजनीति में आ गए। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाया गया और फिर साल 2021 में राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिल गई। इस तरह महाराष्ट्र की राजनीति में पीछे छूटते दिख रहे तावड़े ने राष्ट्रीय संगठन में अपनी नई जगह बना ली। उन्हें हरियाणा का प्रभारी भी बनाया गया था और यहां से उनके लिए राजनीति का एक नया दौर शुरू हो गया था।
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बिहार में कामयाबी ने बढ़ाया भरोसा
साल 2022 में तावड़े को बिहार का प्रभारी बनाया गया था। उन्होंने वहां संगठन और गठबंधन दोनों पर ध्यान दिया और पार्टी के नेताओं और सहयोगी दलों के बीच तालमेल बनाने में अहम भूमिका निभाई है। बाद के चुनावों में बिहार में बीजेपी और उसके सहयोगियों का प्रदर्शन अच्छा रहा। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभाली थीं। इसके बाद वर्ष 2025 में बिहार में भाजपा और जनता दल यूनाइटेड की सरकार बनने में भी संगठन स्तर पर उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया था। बिहार में सीटों के बंटवारे और सहयोगी दलों के बीच तालमेल जैसे मामलों को संभालने के कारण पार्टी के अंदर उनका भरोसा और बढ़ गया।
उत्तर प्रदेश उनकी सबसे बड़ी परीक्षा
अब तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। पार्टी के लिए यह जिम्मेदारी बहुत ही ज्यादा अहम होने वाली है। उत्तर प्रदेश में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी अभी से अपनी चुनावी तैयारियों को लेकर सक्रिय है। पार्टी ने जून में प्रदेश संगठन में भी बड़े बदलाव किए थे। वहीं, तावड़े के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एक साथ रखने की होने वाली है। प्रदेश में कई अहम नेता और अलग-अलग सामाजिक समूह हैं, ऐसे में सभी के साथ तालमेल बनाकर आगे बढ़ना आसान नहीं होगा। इसके अलावा साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को उत्तर प्रदेश में लगे झटके के बाद कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना भी उनके काम का हिस्सा रहने वाला है। पार्टी को गैर-यादव पिछड़े वर्ग और अपने पुराने समर्थक वर्ग के बीच पकड़ मजबूत करनी है। साथ ही सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाना भी जरूरी होगा। उत्तर प्रदेश भाजपा पहले ही 2027 के चुनाव की तैयारी शुरू कर चुकी है और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी प्रदेश में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया है।
जिस नेता को कभी किनारे माना गया, अब उसी पर बड़ा भरोसा
विनोद तावड़े की कहानी का सबसे खास हिस्सा यह रहा है कि राजनीतिक जीवन में झटका मिलने के बाद भी उन्होंने अपना रास्ता नहीं छोड़ा है। साल 2019 में टिकट कटने के बाद उनका चुनावी सफर रुक गया था, लेकिन संगठन में उनका काम जारी रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर उनकी जिम्मेदारियां बढ़ती गईं और बिहार में कामयाबी ने उनकी पहचान को और मजबूत कर दिया। अब राज्यसभा पहुंचने के बाद उनके राजनीतिक सफर को एक और नया रास्ता मिला है। इसके अलावा अप्रैल 2026 से वह महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य भी हैं। अब उत्तर प्रदेश उनके लिए अगली बड़ी परीक्षा है। यहां की राजनीति में संगठन, सामाजिक समीकरण और चुनावी रणनीति तीनों को साथ लेकर चलना होगा। तावड़े के पुराने अनुभव को देखते हुए बीजेपी ने उनको यह जिम्मेदारी सौंपी है।
Created On :   18 Aug 2026 4:41 PM IST











