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सरकार को शक- SME स्कीम की आड़ में GST की चोरी कर रहे छोटे कारोबारी

January 01st, 2018 13:18 IST
सरकार को शक- SME स्कीम की आड़ में GST की चोरी कर रहे छोटे कारोबारी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। GST लागू होने के बाद से इसका काफी विरोध किया जा रहा था। कई कारोबारी संगठनों ने इसके खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन किया। विरोध के बाद सरकार ने इसमें कुछ बदलाव किए, लेकिन अब सरकार को शक है कि छोटे कारोबारियों की सुविधा के लिए लाई गई कंपोजिशन स्कीम का दुरुपयोग करके हर तिमाही, टर्नओवर औसतन 2 लाख रुपए का कम दिखाया जा रहा है। जुलाई-सितंबर तिमाही में करीब 10 लाख एंटिटीज ने GST के लिए कंपोजिशन स्कीम का चयन किया।

बता दें कि इस स्कीम के तहत सिर्फ टर्नओवर के डीटेल्स बताने होते हैं और सामान्य दर से टैक्स भरना होता है। आज की तारीख में कंपोजिशन स्कीम के तहत दर्ज छोटी कंपनियों की संख्या करीब 15 लाख है, जबकि सितंबर में इनकी संख्या 10 से 11 लाख थी। इनमें से भी मात्र 6 लाख कंपनियों ने ही जुलाई से सितंबर का जीएसटी रिटर्न भरा है।

टाइम्स ऑफ इंडिया से एक अध‍िकारी ने कहा कि हम योजना बना रहे थे कि इस स्कीम के तहत अध‍िकतम सीमा 1 करोड़ से ज्यादा बढ़ाई जाए, लेक‍िन औसत डिक्लेरेशन दिखाता है कि इसमें 8 लाख रुपए सालाना टर्नओवर है। ऐसे में हम ये सोच रहे हैं कि क्या अध‍िकतम सीमा बढ़ाने की जरूरत है भी क‍ि नहीं। बता दें कि नवंर में जीएसटी परिषद ने कंपोजिशन स्कीम के लिए अध‍िकतम सीमा 1.5 करोड़ रुपये कर दी है।

सरकार के मन में ये आशंका पैदा हो गई  है कि इस स्कीम का फायदा उठाने वाले कारोबारी कहीं जानबूझकर तो अपना टर्नओवर कम नहीं दिखा रहे। इससे सरकार का राजस्व कम हो रहा है।

इन चौंकानेवाले आंकड़ों से वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को इस स्कीम की आड़ में इनकम टैक्स के तहत अनुमानित टैक्स पेमेंट में गड़बड़ी की भी आशंका सता रही है और वो इसकी जांच करने की जरूरत महसूस करने लगे हैं। दरअसल, संबंधित स्कीम की तहत सालाना आय की सीमा दोगुनी कर 2 करोड़ रुपये कर दी गई है। आंकड़ों के मुताबिक, औसत सालाना आया 18 लाख रुपए होती है, जो अधिकारियों के मुताबिक ये असली आमदनी से कम है। 

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