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कार्तिक माह में इन बातों का रखें खास ख्याल, ना करें ये कार्य

कार्तिक माह में इन बातों का रखें खास ख्याल, ना करें ये कार्य

डिजिटल डेस्क। हिन्दू धर्म में त्यौहारों के साथ व्रतों का भी खासा महत्व है, जो सालभर में हर महीने आते हैं। वहीं कार्तिक माह में आने वाले व्रत और त्यौहारों को खास तरीके से मनाया जाता है। माना जाता है कि कार्तिक मास में तामसिक भेजन नहीं करना चाहिए। इस माह में नित्य स्नान करें और हविष्य ( जौ, गेहूं, मूंग, तथा दूध-दही और घी आदि) का एक बार भोजन करें, तो सब पाप दूर हो जाते हैं।

पुराणों के अनुसार, इस मास को चारों पुरुषार्थों- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला माना गया है। स्वयं नारायण ने ब्रह्मा को, ब्रह्मा ने नारद को और नारद ने महाराज पृथु को कार्तिक मास के सर्वगुणसम्पन्न माहात्म्य के सन्दर्भ में बताया है। ज्योतिषों के अनुसार इस माह में कुछ परहेज के साथ उपाय भी हैं, आइए इनके बारे में जानते हैं...

कार्तिक माह में करें ये कार्य
इस माह में प्रातः काल सूर्योदय होने से पहले उठकर स्नान करना चाहिए, जिससे लाभ होगा। कार्तिक के महीने में अपने घर की पूर्व दिशा को गंगाजल से साफ करके एक लकड़ी के पटरी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान सूर्य नारायण की फोटो स्थापित करें। तांबे के दीये में गाय के शुद्ध घी के साथ कलावे की बाती लगाकर भगवान सूर्यनारायण के सामने दीया जलाएं। आसन पर बैठकर भगवान सूर्यनारायण के सामने सूर्याष्टक का 3 बार पाठ करें। पाठ के बाद भगवान सूर्यनारायण को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें और नेत्रहीन लोगों को मीठा भोजन कराएं। इस माह में सूर्य उपासना विशेष फलदायी होती है। कार्तिक मास में हरि संकीर्तन मुख्य रूप से किया जाता है। कार्तिक मास में तुलसी की वेदी के पास कार्तिक महात्म्य सुनने से परिवार में सुख शांति रहती है। 

इस माह ना करें ये कार्य
इस मास में धूम्रपान निषेध होता है। 
इस माह में लहुसन, प्याज और मांसाहर का सेवन भी वर्जित होता है। 
इस माह में दाल खाना तथा दोपहर में सोना अच्छा नहीं माना जाता है।
इस महीने में भक्त को बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए उसे भूमि शयन करना चाहिए। 
इस मास में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, जो आपको जगत की काम्वास्नाओं से दूर करता है।

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