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बुर्का विवाद पर बोलीं साध्वी प्रज्ञा- 'बुर्का बैन होना ही चाहिए, विदेशों में निर्वस्त्र कर देते हैं'

बुर्का विवाद पर बोलीं साध्वी प्रज्ञा- 'बुर्का बैन होना ही चाहिए, विदेशों में निर्वस्त्र कर देते हैं'

हाईलाइट

  • शिवसेना ने मोदी सरकार से की बुर्को बैन करने की मांग
  • बढ़ती आतंकी गतिविधियों के मद्देनजर रखी मांग
  • बीजेपी ने शिवसेना की मांग किया विरोध

डिजिटल डेस्क, मुंबई। श्रीलंका सरकार द्वारा बुर्के पर बैन लगाने के बाद NDA की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भारत में बुर्का और नकाब बैन करने की मांग की है। शिवसेना की इस मांग का बीजेपी ने कड़ा विरोध किया है। ईस्टर-डे पर हुए सीरियल ब्लास्ट के बाद श्रीलंका सरकार ने बुर्के पर बैन लगा दिया है। आतंकी गतिविधियों के मद्देनजर शिवसेना ने ये मांग पीएम मोदी के सामने रखी है। हालांकि बीजेपी ने इस पर आपत्ति जताते हुए विरोध किया है। बीजेपी नेता और प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि भारत में बुर्के पर बैन की कोई जरूरत नहीं है। 

बुर्के पर बैन को लेकर बीजेपी की ओर से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ने कहा, बुर्के को देशहित में बैन करना जरुरी है। साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि किसी कारण से अगर कोई इस माध्यम का लाभ उठाता हैं और इससे देश को नुकसान पहुंचता हो, लोकतंत्र खतरे में हो या फिर सुरक्षा खतरे में हो तो ऐसी परंपराओं में थोड़ी ढील देनी चाहिए। कानून के जरिए बैन लगाया जाए इससे अच्छा है कि वो खुद ही इस पर फैसला लें। अगर कोई इसके लिए जरिए गलत काम करता है तो उनका ही पंथ बदनाम होगा।

साध्वी ने कहा जब हम सुरक्षा जांच के लिए हवाई अड्डे पर बुर्का हटाने के लिए कहते हैं तो हम विरोध नहीं करते। विदेशों में निर्वस्त्र कर देते हैं। उन्होंने आगे कहा, लोकतंत्र में हमें यह निर्णय देश के हित में लेना चाहिए। सरकार के बजाय खुद मुस्लिम समुदाय को बुर्के पर बैन का निर्णय लेना चाहिए। 

मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने शिवसेना के बुर्का पर प्रतिबंध लगाने के बयान पर कहा कि बुर्का पहनने वाली सभी महिलाएं आतंकवादी नहीं होती हैं। अगर वे आतंकवादी हैं, तो उनका बुर्का हटाना चाहिए। हालांकि, बुर्का पहनना एक ट्रेडिशन है और मुस्लिम महिलाओं को इसे पहनने का अधिकार है, इसलिए बुर्का पर भारत में प्रतिबंधन नहीं लगना चाहिए।

बुर्का विवाद पर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा, ये कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। मैं इस मामले मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। यह कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। जो चुनावी मुद्दा है उस पर बहस होनी चाहिए। 

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है, मौजूदा सरकार ने ‘ट्रिपल तलाक’ के खिलाफ कानून बनाकर पीढ़ित मुस्लिम महिलाओं का शोषण रोकने की दिशा में सही कदम उठाया है। यह स्वीकार है, लेकिन भीषण बम विस्फोट के बाद श्रीलंका में बुर्का और नकाब सहित चेहरा ढंकनेवाली हर चीज पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हम इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी को भी श्रीलंका के राष्ट्रपति के कदमों पर कदम रखते हुए हिंदुस्तान में भी ‘बुर्का’ और उसी तरह ‘नकाब’ बंदी करें, ऐसी मांग राष्ट्रहित के लिए कर रहे हैं। 

सामना पत्र में "रावण की लंका में हुआ, राम की अयोध्या में कब होगा" शीर्षक के साथ लिखा है कि श्रीलंका लिट्टे के आतंक से मुक्त हुआ यह देश अब इस्लामी आतंकवाद की बलि चढ़ा है। हिंदुस्तान, विशेषकर इसका जम्मू-कश्मीर प्रांत उसी इस्लामी आतंकवाद से त्रस्त है। सवाल इतना नही है कि श्रीलंका, फ्रांस, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन जैसे देश जिस तरह सख्त कदम उठाते हैं, उसे तरह के कदम हम कब उठाने वाले हैं?

बता दें कि श्रीलंका विस्फोट के बाद हुई मौत के आकंड़े को बढ़ाकर बताते हुए शिवसेना ने कहा कि इस्लामिक आतंकवाद की वजह से श्रीलंका में 400 लोगों की बलि चढ़ गई। लिट्टे आतंकवाद से श्रीलंका उबरा तो इस्लामिक आतंकवाद हावी हो गया, इसलिए बुर्को बैन होना चाहिए। फ्रांस में भी आतंकवादी हमला होते ही वहां की सरकार ने बुर्का पर बैन लगाया है। न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में भी यही हुआ। फिर इस बारे में हिंदुस्तान पीछे क्यों ?

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