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रिश्वत लेने वाले कार्यपालन यंत्री एवं सहायक को 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास

रिश्वत लेने वाले कार्यपालन यंत्री एवं सहायक को 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास

डिजिटल डेस्क, अनूपपुर। लोक स्वास्थ्य यंत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री को रिश्वत के मामले में विशेष न्यायाधीश राजेश कुमार अग्रवाल विशेष न्यायालय ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए दस वर्ष के कारावास से दंडित किया है । न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी मानते हुए 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 2.5 लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। सह अभियुक्त रहे सूर्यकांत मिश्रा सहायक ग्रेड-2 को भी अफसर के बराबर का दंड दिया गया है । राज्य की ओर से मामले की पैरवी विशेष अभियोजक लोकायुक्त हेमन्त अग्रवाल ने की थी। प्रकरण में आरोपियों को 5-5 साल के पृथक-पृथक कारावास की सजा सुनाई गई है। लिहाजा, प्रत्येक आरोपी को 10 वर्ष कारावास में रहना होगा। साथ ही, शिकायतकर्ता को एक लाख रुपए क्षतिपूर्ति स्वरूप दिलाए जाने का आदेश भी पारित किया गया है। 

बिल भुगतान में मांगे थे 20 फीसदी 

वर्ष 2014 में कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग  हीरा सिंह धुर्वे और सूर्यकांत मिश्रा सहायक वर्ग-2 के रूप में तैनात थेे। शिकायतकर्ता छत्तीसगढ़ जिला सूरजपुर निवासी विजय शंकर द्विवेदी मेसर्स गोयल बोरवेल भोपाल के यहां तैनात था। गोयल बोरवेल को जैतहरी एवं कोतमा में नलकूप खनन का कार्य दिया गया था। कार्य समाप्ति के बाद 24 लाख 40 हजार रुपयों का बिल कार्यपालन यंत्री के कार्यालय में प्रस्तुत किया। बिल जारी करने के एवज में एसके मिश्रा ने 20 प्रतिशत कमीशन के तौर पर 4 लाख 88 हजार रुपयों मांगे थे। 

रंगे हाथ हुए थे गिरफ्तार 

लिहाजा, विजय शंकर द्विवेदी ने 31 मार्च 2014 को मामले की शिकायत लोकायुक्त कार्यालय रीवा में की। पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त के निर्देशन में 3 अप्रैल 2014 कार्यपालन यंत्री रहे हीरा सिंह धुर्वे को 1 लाख 22 हजार रुपयों एवं सहायक ग्रेड-2 सूर्यकांत मिश्रा को 3 लाख 66 हजार रुपए रिश्वत के साथ रंगे हाथों ट्रैप कर लिया गया, जिसके बाद दोनों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा में मामला पंजीबद्ध करते हुए न्यायालय में पेश किया गया था।
 

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