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कुण्डली में अशुभ केतु होने पर करें ये उपाय

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 03rd, 2018 14:35 IST

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कुण्डली में अशुभ केतु होने पर करें ये उपाय

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आज हम केतु ग्रह के बारे में बात करेंगे कौन सा उपाय या कौन सा टोटका केतु की पीड़ा से मुक्ति प्रदान कर सकता है और ऐसा क्या है जो नहीं करना चाइए... केतु आकाश में दिखने वाले ग्रहों में से नहीं है ये छाया ग्रह माना है। इसका वर्णन ज्योतिष में छाया ग्रह के रूप में किया गया है। ज्योतिषानुसार केतु को बेहद अहम माना जाता है। 

केतु ग्रह का प्रभाव
कुंडली में छठा भाव केतु का अपना घर होता है। इस भाव में केतु अपना शुभ फल देता है। वैसे अशुभ केतु होने की स्थिति में केतु मनुष्य को कई प्रकार के कष्ट देता है जैसे नपुंसकता, रीढ़ की हड्डी में पीड़ा आदि। अशुभ केतु को शांत करने के लिए ज्योतिष में कई प्रकार के उपायों का वर्णन किया गया है। यदि केतु ग्रह के कारण आपके जीवन में कुछ उथल-पुथल हो रही है तो आप आगे दिए हुए उपाय अपना सकते हैं।

केतु यदि प्रथम भाव में हो तो
कुंडली में अगर केतु प्रथम भाव में नीचा यानि उचित फल देने वाला ना हो तो बंदरों को गुड़ खिलाएं, माथे पर केसरिया या केसर का तिलक लगाएं व संतान की समस्याओं को दूर करने के लिए मंदिर में कंबल दान करना चाहिए।

केतु दूसरे भाव में हो तो
केतु ग्रह के उत्तम फल पाने के लिए तिलक-रूप में हल्दी या केसर लगाएं, चरित्रवान बने रहें, मंदिर में श्रद्धा से भक्ति करने से उत्तम फल प्राप्त होगा।

केतु तृतीय भाव में हो तो
केतु ग्रह की पीड़ा शांत करने के लिए केसरिया तिलक लगाना व सोने के आभूषण धारण करना चाहिए। ऐसी स्थिति में गुड़ और चावल जल में प्रवाह करना शुभ माना जाता है। 

केतु चौथे भाव में हो तो
यदि चौथे भाव में बैठे केतु के कारण आपको परेशानी हो रही है तो घर में कुत्ता पालने, चाँदी धारण करने और बहते जल में पीले रंग की वस्तु प्रवाह करने की सलाह दी जाती है।

केतु पांचवे भाव में हो तो
केतु की पीड़ा शांत करने के लिए जातक को दूध और चीनी का दान करे करना चाहिए।

केतु छठे भाव में हो तो
ज्योतिषियों के अनुसार छठे भाव में केतु ग्रह के शुभ फल पाने के लिए जातक को बाएं हाथ की
उंगली में सोने की अंगूठी धारण करना चाहिए। साथ ही कानों में सोने के आभूषण धारण करने और 
केसर का दूध पीने से भी राहत मिलती है। 

केतु सातवे भाव में हो तो
कुण्डली के अनुसार सातवें भाव में अगर केतु ग्रह से हानि हो रही हो तो जातक किसी भी तरह का कोई संकल्प नहीं लेना चाहिए। साथ ही केसरिया तिलक धारण करने से भी ऐसी स्थिति में राहत मिलती है।

केतु आठवें भाव में में हो तो
केतु ग्रह के अशुभ परिणामों को कम करने के लिए घर में कुत्ता पालने और मंदिर में काले व सफ़ेद रंग के कंबल का दान देने का सुझाव देते हैं।

केतु नौवें भाव में हो तो
केतु की पीड़ा कम करने के लिए जातकों को कुत्ता पालने का सुझाव दिया जाता है। ज्योतिष मानते हैं कि घर के किसीभी कोने में सोने का टुकड़ा रखने और कान में सोने के आभूषण धारण करने से भी राहत मिलती है।

केतु दसवें भाव में हो तो
केतु ग्रह की पीड़ा शांत करने के लिए जातक को चाँदी के बर्तन में शहद भर कर घर में रखना चाहिए।

केतु ग्याहरवे भाव में हो तो
कुंडली में केतु के ग्याहरवे भाव में होने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो जातक को गोमेद या पन्ना रत्न धारण करना चाहिए। इसके अलावा काला कुत्ता पालना भी शुभ माना जाता है।

केतु यदि बहारवे भाव में हो तो 
कुण्डली के बहारवे भाव में बैठे केतु ग्रह की पीड़ा या अशुभ फलों को कम करने के लिए भगवान गणेश 
की पूजा करने और कुत्ता पालने की सलाह दी जाती है।

पुराणों के अनुसार:- 
अमृत वितरण के समय राहु देवताओं का वेष बनाकर उनके बीच में आ बैठा और देवताओं के साथ उसने भी अमृत पी लिया। अमृत पिलाते-पिलाते ही भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका शीश काट दिया था।

भगवान विष्णु के चक्र से शीश कटने के कारण शीश वाला भाग राहु बना और बचा हुआ धड़ केतु के नाम से प्रसिद्ध हुआ। केतु राहु का ही भाग है। राहु के साथ केतु भी ग्रह बन गया। 

मत्स्यपुराण के अनुसार केतु बहुत सारे हैं, उनमें धूमकेतु का नाम प्रमुख है।

केतु वाला मकान:-
कोने वाला मकान या तीन तरफा खुला हुआ और एक तरफ कोई मकान या जिस मकान में तीन तरफें खुली होंती हैं तो वाह केतु का मकान कहा जाता है। केतु के इस मकान में नर संतानें लड़के चाहे पोते जो भी हों कुल तीन होंगे। बच्चों से संबंधित, खिड़कियां, दरवाजे, बुरी हवा, अचानक धोखा होने का भय या खतरा बना रहता है। 

मन्दे केतु की पहचान :- 
मूत्राशय से सम्बंधित रोग, जोड़ों में दर्द, संतान की उत्पति में रुकावट और गृहकलह।

तेज केतु की पहचान :- 
मकान, दुकान या वाहन पर ध्वजा के समान होता है। केतु का शुभ होना अर्थात पद, प्रतिष्ठा और संतानों का सुख होता है।

अशुभ ग्रह के साथ केतु फल :- 
मंगल के साथ केतु का होना बहुत ही खराब माना गया है। इसे शेर और कुत्ते की लड़ाई समझें। 
चंद्र के साथ होने से चंद्र ग्रहण माना जाता है। मंदा केतु पैर, कान, रीढ़, घुटने, लिंग, किडनी और जोड़ के रोग पैदा कर सकता है।

उपाय:- 
आपकी संतानें केतु हैं। इसलिए संतान से संबंध अच्छे रखें। भगवान गणेश की आराधना करें।
दोरंगी कुत्ते को रोटी खिलाएं। अपने कान छिदवाएं। एवं कुत्ता पालना आपके लिए श्रेष्ठ उपाय हे।

कृपया ध्यान रहे की केतु या किसी और ग्रह के 
किसी भी उपाय को करने से पहले अपनी कुंडली का 
विश्लेषण अवश्य कराएं। उपरोक्त उपाय मात्र संकेतक हैं
इन्हें बिना जानकारी के उपयोग करना विपरीत परिणाम भी दे सकता है।

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