पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन और शादी

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन और शादी
14 साल की एक ईसाई लड़की के गायब होने से पाकिस्तान में जबरदस्ती धर्म परिवर्तन और शादी कराने के क्रूर तंत्र का एक बार फिर पर्दाफाश हुआ है।

इस्लामाबाद, 18 जून (आईएएनएस)। 14 साल की एक ईसाई लड़की के गायब होने से पाकिस्तान में जबरदस्ती धर्म परिवर्तन और शादी कराने के क्रूर तंत्र का एक बार फिर पर्दाफाश हुआ है।

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक महिलाओं और लड़कियों का जबरदस्ती धर्म परिवर्तन और जबरदस्ती शादी कराना, लिंग-आधारित हिंसा और धार्मिक भेदभाव के सबसे परेशान करने वाले मामलों में से एक बन गया है।

निशा बीबी, जो घरों में काम करती थीं, उन्हें एक शादीशुदा मुस्लिम व्यक्ति अपने साथ ले गया। उसने निशा की मेडिकल स्थिति का फायदा उठाया, जबरदस्ती उनका धर्म परिवर्तन कराकर इस्लाम में शामिल किया और उससे शादी कर ली।

'यूरोपियन टाइम्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार, निशा बीबी के पिता अब्बास मसीह (जो दिहाड़ी मजदूर हैं) तब हैरान रह गए जब पुलिस ने उन्हें ऐसे दस्तावेज दिखाए जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने महीनों पहले धर्म परिवर्तन कर लिया था और अपनी मर्जी से शादी की थी।

उन्होंने कहा, "हम सबूत के तौर पर दिखाए गए कथित धर्म परिवर्तन प्रमाण-पत्र और शादी के दस्तावेज देखकर हैरान रह गए।" उन्होंने जोर देकर कहा कि ये सब मनगढ़ंत बातें अपराधी को सजा से बचाने के लिए रची गई थीं। मजिस्ट्रेट के सामने एक बयान भी पेश किया गया, जिसमें दावा किया गया कि वह 18 साल की थीं और अपने परिवार से सुरक्षा की मांग कर रही थीं।

'यूरोपियन टाइम्स' की रिपोर्ट में कहा गया, "असल में जवाबदेही से बचने के लिए धर्म को हथियार बनाया जा रहा था और एक कमजोर बच्ची के अस्तित्व को मिटाया जा रहा था। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक महिलाओं और लड़कियों का जबरदस्ती धर्म परिवर्तन और जबरदस्ती शादी, लिंग-आधारित हिंसा और धार्मिक भेदभाव का सबसे परेशान करने वाला पहलू बन गया है।"

रिपोर्ट में आगे कहा गया, "पीड़ित ज्यादातर नाबालिग (12 से 17 साल की उम्र की) होती हैं, जिन्हें अगवा किया जाता है, धमकाया जाता है और जबरदस्ती शादी के लिए मजबूर किया जाता है।

बाद में जाली धर्म परिवर्तन प्रमाण पत्रों के जरिए इन शादियों को कानूनी मान्यता दे दी जाती है। आज पाकिस्तान में, महिला और गैर-मुस्लिम के तौर पर पैदा होने का मतलब अक्सर अपनी आजादी, पहचान और कानूनी सुरक्षा खो देना होता है।"

अप्रैल में हुई एक ऐसी ही घटना में, जिया लियाकत (16) नाम की एक ईसाई लड़की को तब अगवा कर लिया गया जब उसके माता-पिता खेतों में काम कर रहे थे। कुछ सप्ताह बाद, जिया लियाकत के पिता को दुबई से एक व्यक्ति का वाट्सएप कॉल आया, जिसने उन्हें मामले की पैरवी न करने की चेतावनी दी।

पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की और कथित तौर पर जिया की शादी यूएई में एक मुस्लिम व्यक्ति से ऑनलाइन करा दी गई। इसमें सीमा-पार हेरफेर, स्थानीय मिलीभगत और पुलिस की निष्क्रियता का पैटर्न दिखा।

'यूरोपियन टाइम्स' की रिपोर्ट में कहा गया, "ये मामले एक सोचे-समझे पैटर्न को उजागर करते हैं, जिसमें अपहरण, जबरदस्ती, जाली दस्तावेज और न्यायिक मान्यता शामिल हैं। यौन हिंसा को छिपाने के लिए धर्म परिवर्तन का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि पुलिस और अदालतें लापरवाही या मिलीभगत के जरिए अपराधियों को बचाती हैं। तस्करी का तरीका साफ है कि अगवा की गई लड़कियों के साथ बलात्कार किया जाता है, उन्हें 'धर्म-परिवर्तित' घोषित किया जाता है और उन्हें अगवा करने वालों से ही शादी करा दी जाती है, जिससे वे अपने समुदायों से पूरी तरह कट जाती हैं।"

अप्रैल में, पाकिस्तान में बिशपों ने एक ईसाई नाबालिग की शादी को संघीय संवैधानिक अदालत द्वारा सही ठहराए जाने के बाद चिंता जाहिर की थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस (पीसीबीसी) ने कहा कि अदालतें 18 साल से कम उम्र में शादी पर रोक लगाने वाले कानूनों को लगातार लागू नहीं कर रही हैं। उन्होंने कानून के इस चुनिंदा तरीके से लागू किए जाने को बेहद चिंताजनक बताया है।

पीसीबीसी के अध्यक्ष बिशप सैमसन शुकार्डिन ने कहा कि अगवा की गई ईसाई लड़कियों से जुड़े मामलों में कानून के मुताबिक सुनवाई नहीं हो रही है। 'यूरेशिया रिव्यू' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर के कैथोलिक आर्कबिशप खालिद रहमत ओएफएम कैप ने एक अलग 'विरोध और तत्काल खंडन बयान' में एक ईसाई लड़की से जुड़े मामले में अदालत के फैसले पर नाराजगी जताई।

अल्पसंख्यक समुदाय ने तब नाराजगी जताई जब 25 मार्च को पाकिस्तान की फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट की दो-सदस्यीय बेंच ने ईसाई लड़की मारिया बीबी और मुस्लिम युवक शहरयार अहमद की शादी को वैध करार दिया।

अदालत ने बीबी के पिता शाहबाज मसीह की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी बेटी, जो लगभग 13 साल की थी, को जुलाई 2025 में गैर-कानूनी तरीके से बंधक बनाकर रखा गया था। अदालत ने कहा कि कानून कम उम्र में शादी के लिए सजा का प्रावधान करता है, लेकिन ऐसी शादियों को अमान्य नहीं माना जाता है।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   18 Jun 2026 8:21 PM IST

Tags

Next Story