सरकार और एसीएसआईआर ने पृथ्वी विज्ञान में संयुक्त डॉक्टरेट कार्यक्रमों के लिए समझौता ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर

सरकार और एसीएसआईआर ने पृथ्वी विज्ञान में संयुक्त डॉक्टरेट कार्यक्रमों के लिए समझौता ज्ञापन पर किए हस्ताक्षर
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) और वैज्ञानिक एवं नवाचार अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर) ने सोमवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सभी 10 अनुसंधान संस्थानों को एसीएसआईआर से संबद्ध अनुसंधान संस्थानों के रूप में मान्यता दी गई है, जिससे संयुक्त डॉक्टरेट कार्यक्रमों का रास्ता खुल गया है। यह जानकारी सोमवार को सरकार की ओर से दी गई।

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) और वैज्ञानिक एवं नवाचार अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर) ने सोमवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सभी 10 अनुसंधान संस्थानों को एसीएसआईआर से संबद्ध अनुसंधान संस्थानों के रूप में मान्यता दी गई है, जिससे संयुक्त डॉक्टरेट कार्यक्रमों का रास्ता खुल गया है। यह जानकारी सोमवार को सरकार की ओर से दी गई।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस संस्थागत सहयोग के तहत मंत्रालय की अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं और वैज्ञानिक विशेषज्ञता को एसीएसआईआर के लचीले शैक्षणिक ढांचे के साथ जोड़ा गया है। इसके माध्यम से पृथ्वी प्रणाली विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में डॉक्टरेट (पीएचडी) कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इनमें वायुमंडलीय विज्ञान, महासागर विज्ञान और ध्रुवीय विज्ञान शामिल हैं।

यह साझेदारी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और उसके 10 संस्थानों को एसीएसआईआर के साथ जोड़ती है। इससे समुद्र विज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान, जल विज्ञान और ग्रहीय प्रणालियों के क्षेत्रों में उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और शैक्षणिक क्षमता निर्माण के लिए एक एकीकृत व्यवस्था स्थापित होगी।

इस संयुक्त ढांचे का उद्देश्य विभिन्न विषयों के बीच अनुसंधान को बढ़ावा देना, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के बीच संसाधनों और बुनियादी ढांचे को साझा करने की प्रक्रिया को सुगम बनाना एवं शुरुआती करियर वाले वैज्ञानिकों और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान करना है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला ने कहा कि इस साझेदारी से मंत्रालय को काफी लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि यह सहयोग भविष्य में पृथ्वी विज्ञान के समस्त शिक्षकों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शोधकर्ताओं के लाभ के लिए एक बेहतरीन साझेदारी साबित हो।

इस संयुक्त व्यवस्था के तहत एसीएसआईआर के पीएचडी कार्यक्रम में चयनित छात्र पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संस्थानों में अनुसंधान कर सकेंगे। इस दौरान उन्हें मंत्रालय के ऐसे वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन मिलेगा, जिन्हें एसीएसआईआर के संकाय सदस्य के रूप में मान्यता प्राप्त है। डॉक्टरेट की डिग्री एसीएसआईआर प्रदान करेगा और डिग्री प्रमाणपत्र पर संबंधित मेजबान संस्थान का स्पष्ट उल्लेख होगा।

बयान में कहा गया है कि सभी 10 संस्थान एसीएसआईआर के नवीनतम पीएचडी प्रवेश चक्र में भाग ले रहे हैं। शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारू बनाने के लिए प्रत्येक संस्थान में एसीएसआईआर के नोडल समन्वयक नियुक्त किए गए हैं। इसके साथ ही पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में एक केंद्रीय समन्वयक भी नियुक्त किया गया है।

इस सहयोग के तहत पृथ्वी प्रणाली विज्ञान के विशिष्ट क्षेत्रों में डॉक्टरेट करने के अवसर उपलब्ध होंगे। इनमें मौसम पूर्वानुमान एवं जलवायु सेवाएं, संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान, ध्रुवीय क्षेत्र एवं हिममंडल अनुसंधान, महासागर अवलोकन एवं समुद्री रोबोटिक्स, गहरे समुद्र में खनन एवं विलवणीकरण, भूकंप विज्ञान एवं भूकंप संबंधी जोखिम का आकलन, तटीय प्रक्रियाएं, समुद्री जीवित संसाधन तथा पृथ्वी विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) के अनुप्रयोग शामिल हैं।

अनुसंधान से उत्पन्न बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के तहत छात्र को आविष्कारक के रूप में श्रेय दिया जाएगा, जबकि संयुक्त बौद्धिक संपदा को आपसी सहमति से साझा किया जाएगा।

—आईएएनएस

एबीएस

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Created On :   19 Oct 2026 1:40 PM IST

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