लैक्मे फैशन वीक में सामंत चौहान और जैसलमेर क्राफ्टेड बार का कोलैबोरेशन, भारतीय कारीगरी को मिला मॉडर्न टच

लैक्मे फैशन वीक में सामंत चौहान और जैसलमेर क्राफ्टेड बार का कोलैबोरेशन, भारतीय कारीगरी को मिला मॉडर्न टच
जैसलमेर क्राफ्टेड बार कलेक्टिबल ने 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के ताज पैलेस में आयोजित लैक्मे फैशन वीक एक्स एफडीसीआई में डिजाइनर सामंत चौहान के साथ खास कोलैबोरेशन किया। इस पार्टनरशिप के तहत क्राफ्टेड बार और स्पेशल कलेक्टिबल्स पेश किए गए, जिनमें भारतीय कारीगरी और मॉडर्न डिजाइन का मेल देखने को मिला।

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। जैसलमेर क्राफ्टेड बार कलेक्टिबल ने 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के ताज पैलेस में आयोजित लैक्मे फैशन वीक एक्स एफडीसीआई में डिजाइनर सामंत चौहान के साथ खास कोलैबोरेशन किया। इस पार्टनरशिप के तहत क्राफ्टेड बार और स्पेशल कलेक्टिबल्स पेश किए गए, जिनमें भारतीय कारीगरी और मॉडर्न डिजाइन का मेल देखने को मिला।

इस कोलैबोरेशन की खास बात यह रही कि इसमें क्राफ्ट को सिर्फ एक तकनीक के तौर पर नहीं, बल्कि किसी जगह की पहचान, कारीगरों के हुनर और पारंपरिक कला को नए अंदाज में पेश करने के तरीके के रूप में देखा गया।

सामंत चौहान लंबे समय से बिहार की भागलपुर सिल्क बुनाई परंपरा को आधुनिक रूप देने के लिए जाने जाते हैं। वहीं, जैसलमेर क्राफ्टेड बार कलेक्टिबल्स की प्रेरणा भारत के विभिन्न हिस्सों से प्राप्त बोटैनिकल्स और पारंपरिक आसवन प्रक्रिया से तैयार जिन की कहानी से जुड़ी है। इस तरह यह साझेदारी वस्त्र और बोटैनिकल्स, फैशन और लाइफस्टाइल के बीच एक अनूठा मेल बनकर उभरी।

सामंत चौहान भागलपुर सिल्क और उससे जुड़े बुनकर समुदायों के साथ अपने दीर्घकालिक जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 2006 में अपने फैशन लेबल की स्थापना के बाद से वे इस क्षेत्र की हस्तकरघा (हैंडलूम) परंपरा को नए आयाम देने में जुटे हैं। उन्होंने भागलपुर सिल्क की विशिष्ट बनावट, शिल्पकला और पारंपरिक कौशल को आधुनिक डिजाइन और समकालीन परिधानों के रूप में प्रस्तुत कर उसे नई पहचान दिलाई है।

जैसलमेर के साथ इस कोलैबोरेशन के जरिए इस सोच को कपड़ों से आगे बढ़ाया गया। स्पेशल कलेक्टिबल्स और क्राफ्टेड बार एक्सपीरियंस के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई कि भारत की पारंपरिक कारीगरी को आज के लग्जरी लाइफस्टाइल और डिजाइन में किस तरह नई पहचान दी जा सकती है।

यह साझेदारी जैसलमेर इंडियन क्राफ्ट जिन की शिल्पकला-आधारित विशिष्ट पहचान को भी दर्शाती है। यह जिन 11 प्रकार के बोटैनिकल्स (प्राकृतिक वनस्पति अवयवों) के मिश्रण से तैयार की जाती है, जिनमें से सात भारत के विभिन्न हिस्सों से प्राप्त किए जाते हैं। इनमें दार्जिलिंग ग्रीन टी, लेमनग्रास (नींबू घास) और क्यूबेब पेपर (एक प्रकार की सुगंधित काली मिर्च) प्रमुख हैं।

यह जिन ट्रिपल-डिस्टिल्ड न्यूट्रल ग्रेन स्पिरिट से तैयार की जाती है और पारंपरिक तांबे के पॉट स्टिल्स में दोबारा आसवित (री-डिस्टिल) की जाती है। करीब 40 देशों में उपलब्ध जैसलमेर भारतीय क्षेत्रीय सामग्रियों और जिन निर्माण की आधुनिक शैली को वैश्विक उपभोक्ताओं तक पहुंचाती है।

रेडिको खेतान के मुख्य विपणन अधिकारी (सीएमओ) कुणाल मदान ने कहा, “जैसलमेर में हम भारतीय शिल्पकला को समकालीन लग्जरी अनुभवों के निर्माण की प्रेरणा मानते हैं। सामंत चौहान के साथ हमारा कोलैबोरेशन दो ऐसी दुनिया को साथ लाता है, जो बारीकियों, अपनी जड़ों और किसी भी चीज को तैयार करने के पीछे की कहानी को महत्व देती हैं। इस तरह की पहल के जरिए हम जैसलमेर को सिर्फ एक प्रोडक्ट तक सीमित रखने के बजाय भारत की समृद्ध संस्कृति और क्रिएटिव दुनिया से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।''

डिजाइनर सामंत चौहान ने कहा, “भागलपुर सिल्क एक जीवंत परंपरा का प्रतीक है, जो बुनकर समुदायों के ज्ञान और कौशल की बदौलत आज भी जीवित है। मेरे लिए हमेशा यह प्रयास रहा है कि इस विरासत को उसकी जड़ों से जुड़े रखते हुए आगे बढ़ाया जाए। जैसलमेर के साथ यह सहयोग पारंपरिक शिल्पकला और समकालीन डिजाइन का एक दिलचस्प संगम है, जो भारतीय कारीगरी को अनुभव करने और उसकी सराहना करने के लिए एक नया संदर्भ प्रदान करता है।”

लैक्मे फैशन वीक एक्स एफडीसीआई में जैसलमेर क्राफ्टेड बार पर मेहमानों के लिए खास कॉकटेल एक्सपीरियंस तैयार किया गया, जबकि स्पेशल कलेक्टिबल्स के जरिए इस पार्टनरशिप की डिजाइन थीम को पेश किया गया। इस पार्टनरशिप ने लग्जरी की बदलती दुनिया में भारतीय कारीगरी को खास जगह दी, जहां किसी प्रोडक्ट की अहमियत सिर्फ उसके फाइनल लुक से नहीं, बल्कि उसकी जड़ों, उसे बनाने की प्रक्रिया, इस्तेमाल की गई सामग्री और पारंपरिक हुनर को जिंदा रखने वाले लोगों से भी तय होती है।

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Created On :   16 Oct 2026 6:30 PM IST

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