ताइवान को चीनी खतरे से निपटने के लिए ‘आत्म-निरोधक क्षमता’ बढ़ानी होगी रिपोर्ट

ताइवान को चीनी खतरे से निपटने के लिए ‘आत्म-निरोधक क्षमता’ बढ़ानी होगी रिपोर्ट
ताइवान को अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए चीन के बढ़ते खतरे के बीच “सेल्फ-डिटरेंस” यानी आत्म-निरोधक क्षमता विकसित करनी होगी। यह बात अमेरिकी पत्रिका जॉर्नल ऑफ डेमोक्रेसी में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कही गई है।

वॉशिंगटन, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। ताइवान को अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए चीन के बढ़ते खतरे के बीच “सेल्फ-डिटरेंस” यानी आत्म-निरोधक क्षमता विकसित करनी होगी। यह बात अमेरिकी पत्रिका जॉर्नल ऑफ डेमोक्रेसी में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह रणनीति सैन्य आक्रामकता बढ़ाने की नहीं, बल्कि संभावित हमले की लागत इतनी बढ़ाने की है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के लिए ताइवान पर हमला करना बेहद महंगा और जोखिम भरा हो जाए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की ओर से खतरे केवल सैद्धांतिक नहीं हैं, बल्कि वे रोज़ाना सैन्य दबाव, साइबर हमलों और दुष्प्रचार अभियानों के रूप में दिखाई देते हैं। चीनी लड़ाकू विमान बार-बार ताइवान स्ट्रेट की मध्य रेखा को पार कर रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो रही है।

इसके अलावा, साइबर हमलों के जरिए सरकारी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है और फर्जी सूचनाओं के माध्यम से जनता के विश्वास को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग की रणनीति डर का माहौल बनाकर ताइवान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देना है कि ताइवान का भविष्य पहले से तय है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केवल लोकतंत्र होने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती। इतिहास बताता है कि मजबूत प्रतिरोध क्षमता के बिना लोकतांत्रिक देश भी बाहरी आक्रमण का शिकार हो सकते हैं।

ताइवान की भौगोलिक स्थिति को उसकी ताकत बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि पहाड़ी इलाकों, घनी आबादी वाले शहरों और संकरे समुद्री मार्गों के कारण यहां सैन्य अभियान चलाना बेहद कठिन होगा।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि ताइवान को मोबाइल मिसाइल सिस्टम, मजबूत बुनियादी ढांचा और विकेन्द्रीकृत कमांड सिस्टम में निवेश करना चाहिए। साथ ही नागरिकों को सिविल डिफेंस ट्रेनिंग देकर किसी भी संभावित कब्जे के खिलाफ तैयार करना जरूरी है।

रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान का लक्ष्य चीन को हराना नहीं, बल्कि किसी भी हमले को इतना जोखिम भरा बना देना है कि वह प्रयास ही न करे।

अंत में रिपोर्ट में कहा गया है कि ताइवान की लड़ाई केवल अस्तित्व की नहीं, बल्कि आत्मनिर्णय और स्वतंत्रता जैसे सार्वभौमिक मूल्यों की रक्षा की भी है।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   4 April 2026 5:19 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story