होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से करोड़ों के भुखमरी की चपेट में आने का खतरा बढ़ा यूएन
नई दिल्ली/कोपेनहेगन, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र ने होर्मुज स्ट्रेट की बंदी से होने वाले खतरे की ओर दुनिया का ध्यान दिलाया है। दावा किया कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो करोड़ों लोग भुखमरी की चपेट में आ सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र प्रोजेक्ट सर्विसेज कार्यालय (यूएनओपीएस) ने एक्स पोस्ट में आंकड़ों के साथ ये बात कही है। इसमें मीडिया आउटलेट अल जजीरा से बातचीत का एक वीडियो क्लिप भी जारी किया गया है। स्पष्ट कहा गया है कि अगर किसानों को जरूरी फर्टिलाइजर नहीं मिला, तो 45 मिलियन लोगों के भुखमरी की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाएगा।
एजेंसी के कार्यकारी निदेशक जॉर्ज मोरेइरा दा सिल्वा के अनुसार भूख-भुखमरी का असर लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बंदी से वैश्विक उर्वरक आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी कि यदि समुद्री आपूर्ति बाधित रही तो दुनिया के करोड़ों लोग भूख और अकाल जैसी स्थिति का सामना कर सकते हैं।
जॉर्ज मोरेइरा दा सिल्वा के अनुसार उर्वरक सप्लाई में रुकावट वैश्विक मानवीय संकट को जन्म दे सकती है। मौजूदा समय बुआई का है और ऐसे में उर्वरक किसानों तक पहुंचना बहुत जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो लाखों लोग खाद्य असुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे। इसका असर लंबे समय तक जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों से उर्वरक आयात करने वाले देशों जैसे सूडान, सोमालिया, और मोजाम्बिक पर असर पड़ रहा है। पूरे फर्टिलाइजर मार्केट में उथल-पुथल मची है। "यूरिया की कीमत 65 फीसदी तो अमोनिया की कीमत 40 फीसदी बढ़ गई। तो मुद्दा महज तैयार खाद का नहीं है, बल्कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का भी है।"
उन्होंने बताया कि उर्वरकों के लिए जरूरी कच्चे माल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर खेती की लागत, उत्पादन और खाद्य कीमतों पर पड़ेगा। यह किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि इसका असर वैश्विक तौर पर गहरा पड़ता है। यही वजह है कि यूएन ने टास्क फोर्स बनाई है जो होर्मुज से खाद के इमरजेंसी पैसेज को सुनिश्चित कर सके।
इसके साथ ही, उन्होंने विश्व बिरादरी से अपील की कि वे दखल दें। उन्होंने कहा कि उर्वरक बनाने के कच्चे माल की कीमतें रिकॉर्ड लेवल तक बढ़ गई हैं, जिसके लिए अब सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए तुरंत कूटनीतिक कार्रवाई की जरूरत है।
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Created On :   26 April 2026 4:57 PM IST












