ट्रंप ने फिर साधा जर्मन चांसलर मर्ज पर निशाना, ईरान-यूक्रेन को लेकर बढ़ी तकरार

ट्रंप ने फिर साधा जर्मन चांसलर मर्ज पर निशाना, ईरान-यूक्रेन को लेकर बढ़ी तकरार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज पर लगातार दूसरे दिन जुबानी हमला बोला है। नसीहत दी कि उन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने और अपने देश के आंतरिक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। गुरुवार को ट्रुथ सोशल पर एक बार फिर उन्होंने मर्ज पर तंज कसा।

वाशिंगटन/बर्लिन 30 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज पर लगातार दूसरे दिन जुबानी हमला बोला है। नसीहत दी कि उन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने और अपने देश के आंतरिक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। गुरुवार को ट्रुथ सोशल पर एक बार फिर उन्होंने मर्ज पर तंज कसा।

ट्रंप ने बयान में कहा कि जर्मन नेतृत्व को रूस-यूक्रेन जंग को समाप्त करने में अधिक प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जर्मनी को आव्रजन और ऊर्जा जैसे घरेलू संकटों को प्राथमिकता देनी चाहिए, बजाय उन देशों के मामलों में हस्तक्षेप करने के जो ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।

एक दिन पहले (बुधवार) भी उन्होंने मर्ज की टिप्पणी पर ऐतराज जताया था। ट्रंप ने तंज कसते हुए लिखा, “मर्ज को लगता है कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना ठीक है। उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होता तो पूरी दुनिया बंधक बन जाती।”

उन्होंने आगे कहा कि वह इस समय ईरान को लेकर ऐसे कदम उठा रहे हैं, जो पहले ही उठाए जाने चाहिए थे। साथ ही उन्होंने मर्ज़ पर निशाना साधते हुए जर्मनी के आर्थिक प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए।

ट्रंप की यह टिप्पणी उस समय आई है जब मर्ज ने ईरान को लेकर अमेरिकी रणनीति पर सवाल उठाए थे। मर्ज ने कहा था कि अमेरिका ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत को प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ा सका और कुछ वार्ताएं बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गईं।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को जितना कमजोर समझा गया था, वह उससे कहीं ज्यादा मजबूत निकला और बातचीत में भी वह प्रभावी ढंग से अपनी स्थिति रख रहा है। मर्ज़ के अनुसार, अमेरिका के पास मौजूदा स्थिति से बाहर निकलने की कोई स्पष्ट रणनीति भी नजर नहीं आ रही है।

यूक्रेन-रूस युद्ध और ईरान से जुड़े तनावों के बीच पश्चिमी देशों में रणनीतिक मतभेद उभरकर सामने आए हैं। नाटो के भीतर भी इन मुद्दों पर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अधिक जटिल होती जा रही है।

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Created On :   30 April 2026 8:00 PM IST

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