Congress Protest in Shimla: राहुल गांधी के खिलाफ हुई FIR के विरोध में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, शिमला में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने किया प्रदर्शन

राहुल गांधी के खिलाफ हुई FIR के विरोध में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, शिमला में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने किया प्रदर्शन
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। इस बीच हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने राजधानी शिमला में स्थित उपायुक्त कार्यालय परिसर के पास जोरदार प्रदर्शन किया।

डिजिटल डेस्क, शिमला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। इस बीच हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने राजधानी शिमला में स्थित उपायुक्त कार्यालय परिसर के पास जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और दर्ज हुई एफआईआर को वापस लेने की मांग की।

इस आंदोलन में राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और संगठन पदाधिकारी शामिल हुए। उन्होंने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करना बताया है।

CM ने भाजपा पर लगाया आरोप

राज्य के मुख्यमंत्री का कहना है कि उत्तराखंड में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार हुआ है। इसके जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होने के बजाय राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जो बेहद निंदनीय है। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा, उनके यहां 'तानाशाही का नया ट्रेंड' शुरू हो गया है। इसके साथ कहा कि राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा घबराकर इस प्रकार की कार्रवाई कर रही है।

'जांच एजेंसियों का हो रहा दुरुपयोग'

सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आगे कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक पार्टियों और जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अधिकार है। इसके अलावा वह सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारें राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए कानून और जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही हैं। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

विनय कुमार ने विपक्ष की आवाज पर दी प्रतिक्रिया

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार कहते हैं कि लोकतंत्र सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि विपक्ष की भूमिका, असहमति के सम्मान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता भी इसकी अहम आधारशिलाएं हैं। उन्होंने आगे बताया कि विपक्ष की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुनना चाहिए और राजनीतिक मतभेदों का समाधान लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीकों से होना चाहिए।

Created On :   1 Sept 2026 12:46 AM IST

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