Anti Paper Leak Bill 2026: 'पूरा आर्किटेक्चर ऑफ एजुकेशन को मैं...' एंटी पेपर लीक बिल पर RJD सांसद ने केंद्र सरकार को जमकर घेरा

पूरा आर्किटेक्चर ऑफ एजुकेशन को मैं... एंटी पेपर लीक बिल पर RJD सांसद ने केंद्र सरकार को जमकर घेरा
आरजेडी नेता और राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने एंटी पेपर लीक बिल पर अपनी बात रखी है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा में पास होने के बाद गुरुवार को राज्यसभा में पेश हुआ। इस पर बहस के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी। इसकी क्रम में आरजेडी नेता और राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने इस बिल पर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि हम इस बिल पर यहां बैठक चर्चा नहीं कर रहे होते। कुछ दूसरा ही एजेंडा होता। वे कहते हैं कि स्वर्णिम काल पहले भी नहीं था, लेकिन आज हालात इसके विपरित है। साथ ही सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यदि जेन-जी की भावना को नहीं समझा गया तो फिर से प्रदर्शन के लिए तैयार रहें।

जेपी नड्डा का नाम लेकर क्या बोले?

सदन में मनोज झा कहते हैं, "मैं सिर्फ एक सांसद की भूमिका में नहीं बोल रहा हूं। मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाता हूं। आई एम वन ऑफ द स्टेक होल्डर्स और मैं सदन के अपने पुराने साथियों को याद कराऊंगा जो कभी इधर थे, अब उधर हैं। 2018 में जब मैं सदन में आया तो पहला इंटरवेंशन मेरा एनटीए के खिलाफ था।" उन्होंने आगे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का नाम लेते हुए कहा, "जेपी नड्डा साहब, ये कॉस्मेटिक रिफॉर्म्स काम नहीं करेंगे। आपको बीमारी की जड़ को खत्म करना पड़ेगा जो एनटीए है। मैं ये किसी आधार पर कह रहा हूं, निराधार नहीं है। आपकी ब्यूरोक्रेसी भी जानती है। आपके सांसद भी जानते हैं।"

RJD सांसद का दावा

आरजेडी सांसद ने आगे कहा, "आपने पॉलिटिकल पार्टी में लीकेज करवाई। पॉलिटिकल पार्टीज की लीकेज से शक्ति वर्धन हुआ और उसको चाणक्य नीति कहा गया। वोटर की चिंता नहीं की गई। ये मोरल कैंपस आपका थोड़ा वीक है और ये शिकायत के लहजे में नहीं कह रहा हूं। सहयोग और सलाह के लहजे में कह रहा हूं।" उन्होंने दावा किया, "पूरा आर्किटेक्चर ऑफ एजुकेशन को मैं एक घंटे में समझा सकता हूं। कहां दिक्कत हुई है? स्वर्णिम काल पहले भी नहीं था, लेकिन आज हालात बहुत विपरीत हैं।"

शिक्षा पर दी प्रतिक्रिया

मनोज झा ने बताया, "आज ये पूरी बहस लोग देख रहे होंगे। वो देखेंगे कि बहस का स्तर क्या था? चर्चा शिक्षा पर हो रही थी या नहीं। दो मंत्री यहां पर बैठे हुए हैं। जो पूरे डॉयलॉग में रहे। काश डिसीजन मेकिंग भी हमेशा इनकी भूमिका हो। मैं लोकसभा में देख रहा था कि जेन जी की भाषा को कॉपी करने की कोशिश हो रही है। जो बहुत ही निराशाजनक है। ये न करें। जेन जी की लैंग्वेज पर सवाल मत कीजिए, भाव समझिए। ये नहीं समझेंगे तो अगले आंदोलन के लिए तैयार रहिए।"

Created On :   31 July 2026 12:39 AM IST

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