Lok Sabha Monsoon Session: राहुल गांधी के खिलाफ सदन में विशेषाधिकार हनन का नोटिस, क्या हो सकती है कार्रवाई?

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनके खिलाफ बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपे गए इस तीन पेज के नोटिस में बीजेपी सांसद ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अपमानजनक और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया। साथ ही उन पर बेबुनियाद आरोप लगाए।
अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष से मामले की पूरी जांच कराने और कड़ी कार्रवाई के लिए विशेषाधिकारी समिति को भेजे जाने का आग्रह किया है। उन्होंने राहुल गांधी को सदन और गृहमंत्री दोनों से बिना किसी शर्त के माफी मांगने का निर्देश देने की मांग की है।
बीजेपी सांसद ने लोकसभा की 29 जुलाई की कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि जब एंटी पेपर लीक संसोधन बिल पर चर्चा चल रही थी, तब प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुई बातचीत का ब्यौरा देते समय राहुल ने लोकसभा के नियम 352 का उल्लंघन किया।
अनुराग ठाकुर ने अपने नोटिस में कहा कि नेता प्रतिपक्ष की ओर से इस्तेमाल की भाषा न केवल असंसदीय थी, बल्कि गृह मंत्री के सम्मान को भी ठेस पहुंचाने वाली थी। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही के दौरान ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। राहुल गांधी पर इसके लिए सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
क्या कहा था राहुल गांधी ने?
बुधवार, 29 जुलाई को लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने किसी का नाम लिए बगैर जंतर-मंतर पर एक छात्रा से हुई बातचीत का हवाला देते हुए लोगों को तीन कैटेगरी में बांटा था। उन्होंने इन कैटेगरी को स्टूडेंट, इडियट और अंधभक्त कहा।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जो खुले विचारों और सच के साथ आगे बढ़ते हैं, वो स्टूडेंट हैं। वहीं, जो अहंकारी होते हैं, खुद को भगवान मानते हैं और किसी की नहीं सुनते, वो इडियट होते हैं। वहीं अंधभक्त वो होता है जिसे लगता है कि इडियट ही भगवान है।
उनके इस बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने आपत्ति जताई थी, जिसके जवाब में राहुल ने कहा था कि वे किसी का नाम नहीं ले रहे हैं, बल्कि केवल छात्रों के कहें शब्दों को दोहरा रहे हैं।
क्या होता है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव?
विशेषाधिकार हनन संसद या फिर विधानसभा के सदस्यों को मिलने वाले विशेष अधिकारों को उल्लंघन या अपमान है। संविधान के अनुच्छेद 105 (सांसद) और 194 (विधायक) के तहत सदन के सदस्यों को मिले विशेष अधिकार हैं।
यह तब लाया जाता है जब कोई व्यक्ति या फिर अधिकारी किसी सांसद को उसका काम करने से रोकता है, उसके खिलाफ गलत बयानबाजी करता है, झूठे आरोप लगाता है, सदन की आवमानना करता है और गलत रिपोर्ट को पब्लिश करता है।
इसके बाद पीड़ित सांसद लोकसभा स्पीकर को विशेषाधिकार हनन का नोटिस देता है। अगर स्पीकर उसे सही मानते हैं तो वह उसे विशेषाधिकार समिति को भेज देते हैं।
समिति की जांच में यदि व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो सदन उसे चेतावनी दे सकता है, उसे निलंबित कर सकता है या फिर अन्य दंड दे सकता है।
Created On :   31 July 2026 12:20 AM IST











