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मप्र की सियासत में पाप, पापी अधर्म और धर्म की एंट्री

June 12th, 2020 15:31 IST
 मप्र की सियासत में पाप, पापी अधर्म और धर्म की एंट्री

हाईलाइट

  • मप्र की सियासत में पाप, पापी अधर्म और धर्म की एंट्री

भोपाल, 12 जून (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में आगामी समय में होने वाले 24 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने कदमताल तेज कर दी है। ऑडियो-वीडियो के सहारे एक दूसरे को घेरने की कोशिश हो रही है तो वहीं अब सियासत में पाप, पापी, अधर्म और धर्म की एंट्री हो चुकी है।

वैसे तो राष्ट्रीय राजनीति में चुनाव जीतने का बड़ा हथियार धर्म को बनाया जाता रहा है। मगर मध्यप्रदेश में अब तक की सियासत धर्म से दूर रही है। इसके बावजूद एक-दूसरे के आरोपों का जवाब देने के लिए कोई पाप-पुण्य की बात कर रहा है तो कोई धर्म-अधर्म से लेकर दूसरे को ढोंगी करार देने में लगा है।

राजनीतिक विश्लेषक साजी थामस का मानना है, जब राजनीतिक दलों के पास जनता से जुड़े मुद्दे नहीं होते हैं तो वे धर्म और दीगर विषयों पर ज्यादा बात करने लगते हैं। राज्य में आगामी समय में 24 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव है और दोनों दल एक दूसरे पर बड़ा प्रहार करने की कोशिश कर रहे हैं। उसी कोशिश में जनता के मुद्दे पीछे छूट गए हैं और धर्म, अधर्म, पापी, पाप की बात होने लगी है। इस तरह की बातों से जनता का ध्यान तो बंटता ही है और राजनीतिक दलों को लाभ मिलता है।

राज्य में इंदौर में हुई कार्यकर्ताओं की सभा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ की सरकार गिराने का राज खोला तो उन पर हमले शुरू हो गए। इसका जवाब चौहान ने अपने ही अंदाज में दिया। उन्होंने कहा, पापियों का विनाश तो पुण्य का काम है। हमारा धर्म तो यही कहता है। क्यों? बोलो, सियापति रामचंद्र की जय!

मुख्यमंत्री चौहान ने पुण्य और पाप की बात की तो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी खुलकर सामने आ गए और उन्होंने अपरोक्ष रूप से ढोंगी तक कह डाला। उन्होंने कहा, कुछ लोग खुद को बड़ा धर्म प्रेमी बताते है, खूब ढोंग करते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि ये ही लोग सबसे बड़े अधर्मी, पापी है। जनता के धर्म यानी जनादेश को नहीं मानते हुए उसका अपमान करने वाले धर्म प्रेमी कैसे?

इन दोनों नेताओं के ट्वीट को एक-दूसरे पर हमला माना जा रहा। हमले के लिए दोनों ही नेताओं ने धर्म, अधर्म, पापी, पाप का सहारा लिया है। राज्य की सियासत में यह नए तरह का सियासी अंदाज है।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक गिरजा शंकर कहते हैं, धर्म, अधर्म, पाप और पापी के जो ट्वीट चल रहे हैं वह किसी नेता की सहमति से नहीं चल रहे होंगे बल्कि सोशल मीडिया की जिम्मेदारी जिन नए नवेले और गैर पेशेवर लोगों के हाथ में होती है वह इस तरह के नादानी भरे ट्वीट कर जाते हैं।

राजनेताओं के ट्वीट और सोशल मीडिया को लेकर गिरिजा शंकर कहते हैं कि कोई भी नेता ट्वीट या सोशल मीडिया को खुद संचालित नहीं करता, इसे संचालित तो कोई और करता है मगर नाम होता है शिवराज और कमल नाथ का। ट्विटर पर अगर कोई गड़बड़ी होती है तो उसका नुकसान नेता को होता है, इसलिए जरूरी है कि नेता ऐसे व्यक्ति को यह जिम्मेदारी सौंपे जिसकी राजनीतिक और सामाजिक समझ हो। इस तरह की समझ के अभाव में ही धर्म, अधर्म, पाप और पापी के ट्वीट होते हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।