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Politics: मप्र में आज हो सकता है मंत्रिमंडल गठन, सिंधिया खेमे से तुलसी सिलावट और गोविंद राजपूत बन सकते हैं मंत्री


डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल के गठन की बात आधी हकीकत, आधा फसाना के दौर से गुजर रही है। अब संभावना जताई जा रही है कि शिवराज सिंह चौहान मुंख्यमंत्री बनने के 29 दिन बाद आज (मंगलवार) दोपहर बाद मंत्रिमंडल का गठन कर सकते हैं। फिलहाल भोपाल में राजभवन के पास इस बारे में कोई सूचना नहीं दी गई है। सूत्रों के अनुसार गोपाल भार्गव, नरोत्तम मिश्रा और भूपेंद्र सिंह का नाम मंत्रिमंडल में शामिल होने की लिस्ट में सबसे आगे है। वहीं उम्मीद जताई जा रही है कि सिंधिया खेमे के तुलसी सिलावट, गोविंद राजपूत और बिसाहू लाल सिंह को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। फिलहाल सीएम शिवराज अपने OSD हरीश और मुख्य सचिव के साथ लगातार व्यस्त हैं। दूसरी ओर मध्यप्रदेश भाजपा नेताओं के सुर इसे लेकर अलग-अलग हैं। 

वरिष्ठ नेताओं ने किया इनकार
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय मंत्रिमंडल के गठन को मीडिया की उपज बता रहे हैं। उनका कहना है कि मंत्रिमंडल से ज्यादा जरूरी कोविड-19 से लड़ाई है। इसलिए भाजपा मंत्रिमंडल गठन की जल्दबाजी करके जनता के बीच में गलत संदेश नहीं देना चाहती। कैलाश विजयवर्गीय की राय से वरिष्ठ नेता प्रभात झा भी इत्तेफाक रखते हैं। प्रभात झा का कहना है कि जनता की सेवा और उसकी जान बचाना ज्यादा जरूरी है। मंत्रिमंडल का गठन लॉकडाऊन के बाद भी हो सकता है। 

सिंधिया ने दिखाई सक्रियता
कोविड-19 को लेकर लॉकडाउन रहने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया अचानक काफी सक्रिय हो गए हैं। वह मध्य प्रदेश भाजपा नेताओं के अलावा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिले हैं। कहा जाता है कि सिंधिया ने साथ आए पूर्व विधायकों, पूर्व मंत्रियों को मंत्रिमंडल में जगह और महत्वपूर्ण विभाग दिलाने के लिए भेंट की थी। इस दौरान उन्होंने सितंबर तक राज्य में 24 सीटों पर प्रस्तावित उपचुनाव, उसकी चुनौतियों का भी हवाला दिया। बताते हैं कि सिंधिया की मंशा कुछ दिन बाद ही सही, लेकिन पूर्ण मंत्रिमंडल की है। वह अपने साथ आए कम से कम नौ लोगों को मंत्रिमंडल में स्थान दिलाना चाहते हैं।

अभी हरी झंडी नहीं
सूत्र बताते हैं कि मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल गठन का लगातार रिहर्सल चल रहा है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पुराने के साथ सिधिंया समेत सभी नए नेताओं का सम्मान बनाए रखने के पक्ष में है।

23 मार्च को शिवराज ने बिना मंत्रीमंडल के ही शपथ ली थी
बता दें कि दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस 15 साल बाद सत्ता में आई थी, लेकिन वरिष्ठ नेता सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों के कांग्रेस से बगावत के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ को 20 मार्च को त्यागपत्र देना पड़ा था। इसके बाद सत्ता में 18 महीने बाद लौटे शिवराज सिंह चौहान ने 23 मार्च को कोरोना संकट को देखते हुए राजभवन में अकेले ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। बिना मंत्रिमंडल के ही शिवराज कोरोना वायरस संकट के दौरान काम करते रहे हैं। इसको लेकर विपक्ष ने उन पर निशाना भी साधा। 

कमलनाथ का राज्य और केंद्र सरकार पर आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कुछ दिन पहले एक वीडियो संदेश जारी कर राज्य सरकार पर आरोप लगाया था कि दुनिया का इकलौता राज्य है, जहां कोरोना संकट में स्वास्थ्य मंत्री और गृहमंत्री नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार पर भी लॉकडाउन देरी से लगाने का आरोप लगाया था। 

34 मंत्री बनाए जा सकते हैं 
बता दें कि राज्य में 230 विधानसभा सीटों के लिहाज से मंत्रिमंडल में अधिकतम 15 प्रतिशत यानी मुख्यमंत्री सहित 35 सदस्य हो सकते हैं। ऐसे में 34 व्यक्तियों को मंत्री बनाया जा सकता है। लेकिन, सामान्यत: रणनीतिक तौर पर मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल में कुछ पद रिक्त रखते हैं। कोरोना वायरस संकट को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि केवल 9-10 मंत्रियों को ही शपथ दिलाई जा सकती है।
 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।