बगावत से होगा बंटाधार!: इन नेताओं ने बीजेपी को छोड़कर थामा था दूसरी पार्टियों का दामन, राजनीतिक करियर हुआ खत्म!

January 15th, 2022

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव में एक माह से कम समय बचा है। सभी राजनीतिक दल सत्ता में वापसी के लिए जहां पसीना बहा रहे हैं  तो वहीं सूबे के बड़े नेता राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने की तलाश में जुटे हैं। यूपी की सियासत में उस वक्त हलचल मच गई, जब योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने अपने पद से इस्तीफा देकर सपा का दामन थाम लिया। स्वामी प्रसाद के इस्तीफे के बाद यूपी सरकार में मंत्री रहे दारा सिंह चौहान और धर्म सिंह सैनी का भी बीजेपी पार्टी से मोहभंग हो गया और साइकिल पर सवार हो गए।

इन सभी नेताओं ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से मुलाकात भी की है। इस वक्त यूपी की सियासत में दलबदलू नेताओं की बाढ़ आ गई है। जिन नेताओं को लग रहा है कि उनको पार्टी में टिकट मिलने का खतरा है वो दूसरी पार्टियों में अपना राजनीतिक आशियाना बनाने में जुट गए हैं। ऐसा पहली बार नहीं है कि बीजेपी से कोई बड़े और रसूखदार नेताओं ने पार्टी छोड़ी है। पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की फेहरिस्त बहुत लंबी है, लेकिन इनके छोड़ने से पार्टी को नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि नुकसान खुद उस नेता को हो जाता है, जिसने बीजेपी का साथ छोड़ दिया है।

कुछ ऐसे ही लोकसभा चुनाव में मची थी भगदड़

यूपी विधानसभा चुनावी मौसम में सियासत गर्म है। प्रदेश में बीजेपी के तीन कद्दावर मंत्रियों के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बता दें कि राजनीतिक गलियारों में सवाल उठना शुरू है गया कि बीजेपी के इन बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद उनका राजनीतिक करियर कैसा होगा? अगर हम बात करते हैं बीते लोकसभा चुनाव 2019 की तो कुछ ऐसी ही राजनीतिक हलचल देखने को मिली थी। कई बीजेपी सांसदों ने पार्टी से दामन छुड़ाकर सपा या फिर कांग्रेस ज्वाइन की थी। उसी पार्टी के टिकट पर चुनाव भी लड़े थे लेकिन बुरी तरह से चुनाव में हारे थे और लगभग राजनीति से ही गायब हो गए। जिन्होंने बीजेपीअपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा से छोड़ी थी, उन में से अधिकांश का राजनीतिक भविष्य खत्म ही माना जा रहा है। अब कुछ ऐसे ही कयास यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भी उन नेताओं को लेकर लगाए जा रहे हैं। जो बीजेपी को उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा न पूरी कर पाने के कारण छोड़ रहे हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञ की राय

आपको बता दें कि यूपी चुनावी मौसम के दौरान हो रही उठापटक पर भास्कर हिंदी संवाददाता अनुपम तिवारी ने राजनीतिक विशेषज्ञों से चर्चा की। इस मुद्दे पर यूपी के वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला कहते हैं कि विधासभा चुनाव से पहले अचानक मंत्री पार्टी छोड़कर जा रहे हैं तो कहीं न कहीं पार्टी के अंदर संघर्ष की स्थिति रही है और कोई भी सत्ताधारी दल हो तो स्थितियां ऐसी आ ही जाती हैं। शुक्ला आगे कहते हैं कि लोगों की नाराजगी योगी या फिर मोदी से नहीं है। लोगों की नाराजगी सत्ताधारी पार्टी के विधायकों से है। यही वजह है कि बीजेपी के तमाम विधायकों को संकेत मिल गया था कि उनको अबकी बार विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलेगा और अब वो लोग पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में टिकट की जुगाड़ में जुटे हैं। हालांकि शुक्ला कहते है पहला पहलू यह है कि जो नानपरफार्मेंस वाले विधायक दूसरे दलों में जा रहे हैं, क्या उससे जनता की नाराजगी दूर हो जाएगी।

दूसरे पहलू को लेकर वरिष्ठ पत्रकार शुक्ला कहते है कि स्वामी प्रसाद मौर्या, दारा सिंह चौहान और धर्म सिंह सैनी जैसे नेता भले ही सपा में शामिल हो रहे है लेकिन सपा के लिए बड़ा सिरदर्द होगा। उसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि जो समाजवादी पार्टी के नेता पिछले पांच सालों से संघर्ष करते आ रहे हैं, उनका एडजस्टमेंट कहां होगा। शुक्ला का मानना है कि किसी भी पार्टी में नेताओं का शामिल होना बड़ा मुद्दा नहीं है, उनके साथ ही तमाम और भी पहलू जुड़े है। उन्होंने कहा कि राजनीति शास्त्र में गणित के तरीके से दो और दो चार नहीं होता है, अगर ऐसा होता तो अखिलेश यादव ने मायावती और कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था लेकिन वह बुरी तरह से फ्लॉप रहा। 

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